भरतपुर स्थित विश्व विख्यात केवलादेव नेशनल पार्क इस समय रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदों की सुरीली आवाजों और पंखों की फड़फड़ाहट से पूरी तरह जीवंत हो उठा है। देश के विभिन्न कोनों और सुदूर विदेश से हजारों किलोमीटर का जोखिम भरा सफर तय करके आने वाले प्रवासी पक्षियों ने इस विख्यात अभयारण्य में अपना डेरा डालना शुरू कर दिया है। तड़के सुबह से ही पार्क के विशाल आर्द्रभूमि इलाकों, शांत जलस्रोतों और हरी-भरी घास के फैले मैदानों में इन नन्हे विदेशी मेहमानों की कतारें और झुंड अठखेलियां करते दिखाई पड़ रहे हैं। इन परिंदों के आगमन ने घना की नैसर्गिक सुंदरता में चार चांद लगा दिए हैं।
प्रवासी पक्षियों के लिए पसंदीदा आश्रय स्थल
पार्क के एक नेचर गाइड के अनुसार, बरसात और ठंड के महीनों में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान प्रवासी परिंदों के ठहरने का सबसे मुफीद और सुरक्षित ठिकाना साबित होता है। हर वर्ष अलग-अलग प्रजातियों के पक्षी हजारों मील की लंबी उड़ान भरकर भारत के इस संरक्षित क्षेत्र में पहुंचते हैं। यहां के दलदली इलाकों और जलाशयों में उन्हें भोजन की भरपूर खुराक, स्वच्छ पानी और उनके अनुकूल शांत वातावरण सहजता से मिल जाता है। भोजन और सुरक्षा का यही दुर्लभ मेल ठंड के पूरे मौसम में देशी-विदेशी पक्षी प्रेमियों, पर्यावरण विशेषज्ञों और सैलानियों को इस हरित क्षेत्र की ओर खींच लाता है।
कैमरों और दूरबीनों में कैद हो रही विहंगम दुनिया
अभयारण्य में इन दिनों विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की चहलकदमी और रोजमर्रा की गतिविधियां आने वाले आगंतुकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। विशाल जलाशयों के ऊपर मंडराते, पानी की सतह पर गोते लगाते और किनारे तैरते पक्षियों के दल पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, पेड़ों की घनी शाखाओं पर बैठे परिंदों की चहचहाहट पूरे वन क्षेत्र के माहौल को उल्लास और ताजगी से भर देती है। वन्यजीव छायाकार और पर्यटक अपने उन्नत कैमरों और शक्तिशाली दूरबीनों के सहारे इन दुर्लभ नजारों और उड़ानों को तस्वीरों में सहेजने में मशगूल नजर आ रहे हैं।
स्थानीय पर्यटन और कारोबार को पंख लगने की उम्मीद
पार्क में मौजूद पक्षियों के अद्भुत संसार के साथ-साथ यहां की हरियाली, शांत वेटलैंड्स और प्रदूषण मुक्त प्राकृतिक परिवेश भी शहर की भागदौड़ से दूर आने वाले लोगों को खासा सुकून दे रहा है। विशेष रूप से भोर के समय, जब उगते सूरज की पहली किरणें पानी पर पड़ती हैं और पक्षियों की उड़ान शुरू होती है, वह दृश्य पर्यटकों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन जाता है। इस राष्ट्रीय उद्यान में बढ़ती चहल-पहल से भरतपुर के स्थानीय पर्यटन क्षेत्र, होटल व्यवसाय और गाइडों की आमदनी में सुधार की प्रबल उम्मीद बंधी है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में जब ठिठुरन बढ़ेगी, तब प्रवासी पक्षियों की आमद और घनी होगी, जिससे पर्यटकों की तादाद में भारी इजाफा दर्ज किया जाएगा। प्रकृति की यह खूबसूरत वापसी अब भरतपुर भ्रमण पर आने वाले हर मुसाफिर के लिए सबसे प्रमुख पड़ाव बन चुकी है।


















