अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में मैक्सिकन पेसो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर आने वाले एक वर्ष के दौरान एक निश्चित दायरे में सीमित रहने के आसार हैं। वित्तीय विश्लेषकों क्रिश्चियन लॉरेंस और मौली श्वार्ट्ज के ताजा आकलन के अनुसार, USD/MXN का कारोबार अगले 12 महीनों में मुख्य रूप से 17 और 18 के बीच रहने की उम्मीद है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व और मैक्सिको के केंद्रीय बैंक बैंक्सिको द्वारा मौद्रिक नीति में संभावित फेरबदल के समय को लेकर बाजार में नए सिरे से आकलन चल रहा है, जिससे निकट भविष्य में दोनों मुद्राओं के बीच अस्थिरता बढ़ सकती है। अनुमान है कि आने वाले कुछ हफ्तों में यह विनिमय दर एक बार फिर 17 से नीचे फिसल सकती है, जिसके बाद के महीनों में यह दोबारा 17 के स्तर से ऊपर लौटेगी।
बैंक्सिको की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों का समीकरण
मैक्सिको के केंद्रीय बैंक बैंक्सिको के आगामी कदमों पर वित्तीय जगत की पैनी नजर बनी हुई है। बाजार में यह अनुमान लगाया जा रहा था कि अगले 12 महीनों के दौरान बैंक्सिको अपनी नीतिगत ब्याज दरों में कुल 85 आधार अंकों यानी 85bp की बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, क्रिश्चियन लॉरेंस और मौली श्वार्ट्ज का मानना है कि दर वृद्धि की यह बाजार अपेक्षा पूरी होने की संभावना बेहद कम है। उनके मुताबिक, दरों के पुनर्मूल्यांकन का सटीक समय ही मुद्रा बाजार की भावी दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विश्लेषकों का स्पष्ट अनुमान है कि गुरुवार, 24 सितंबर को होने वाली अपनी आगामी बैठक में बैंक्सिको अपनी ओवरनाइट दर को 6.50% पर अपरिवर्तित रखेगा। यह ठहराव मई के महीने से लगातार जारी है और इस बात की पूरी उम्मीद है कि ब्याज दरों को स्थिर रखने का यह सिलसिला अगले पूरे एक साल तक खिंच सकता है। यह रुख बाजार में 12 महीनों के दौरान 85 आधार अंकों की बढ़ोतरी की मौजूदा कीमतों के बिल्कुल विपरीत है। इसके बावजूद, विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में इतनी बड़ी उथल-पुथल नहीं आएगी कि निवेशक सामूहिक रूप से कैरी ट्रेड से बाहर निकलने लगें। इसी वजह से आने वाले हफ्तों में मुद्रा जोड़ी के 17 से नीचे जाने और फिर कुछ महीनों में 17 के उत्तर में लौटने की संभावना बनी हुई है।
एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन की स्थिति
वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार के तहत सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD 0.7100 के स्तर से ऊपर मजबूती से टिका रहा। अमेरिकी डॉलर की हालिया गिरावट पर फिलहाल ब्रेक लग गया है, जो जुलाई के अंत के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद थोड़ी थमती नजर आ रही है। हालांकि, पीपल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम रेट्स पर यथास्थिति बनाए रखने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव महसूस हुआ, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा एक और संभावित ब्याज दर वृद्धि के दांव ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान की। यह हलचल ट्रंप और शी के बीच होने वाले आगामी शिखर सम्मेलन से ठीक पहले देखी जा रही है।
दूसरी ओर, USD/JPY सोमवार को एशिया में 157.00 के स्तर से नीचे खिसक कर नरम पड़ा। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा रेट चेक किए जाने के बाद संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम के बीच जापानी येन में मामूली मजबूती लौटी। जापान में अवकाश के चलते स्थानीय बाजार शांत रहे, लेकिन रूस-यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट ने कारोबारियों को सतर्क रखा। इस तनाव के कारण अमेरिकी डॉलर की गिरावट सीमित रही, जिससे USD/JPY की नीचे जाने की गुंजाइश भी सीमित हो गई।
बैंक ऑफ जापान की सख्ती और कमोडिटी बाजार का हाल
जापान के केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। यह कदम बाजार के उन अनुमानों के बिल्कुल अनुरूप रहा, जिसकी चर्चा कई हफ्तों से वित्तीय हलकों में चल रही थी। यह निर्णय दिखाता है कि वैश्विक स्तर पर शून्य या नकारात्मक दरों का दौर अब पीछे छूट रहा है।
कमोडिटी बाजार की बात करें तो यूरोपीय कारोबारी सत्र के पहले हिस्से में सोने पर बिकवाली का दबाव देखा गया। सोना लगभग 4,350 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था, जिसमें उस दिन 0.50% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद, पीली धातु पिछले बुधवार को छुए गए छह सप्ताह के निचले स्तर से काफी ऊपर बनी हुई है। निवेशक पश्चिम एशिया के संकट और महंगाई पर उसके पड़ने वाले असर पर नजर गड़ाए हुए हैं, क्योंकि महंगाई के रुझान ही आने वाले समय में ब्याज दरों की दिशा तय करेंगे, जिसका सीधा असर बिना ब्याज देने वाले सोने पर पड़ता है।
तीसरी तिमाही के अंतिम सप्ताह में वित्तीय बाजारों का रुख
तीसरी तिमाही यानी Q3 के अंतिम हफ्तों में कदम रखते ही वित्तीय बाजार एक अनोखी और उलझन भरी स्थिति से गुजर रहे हैं। एक तरफ जहां अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव ने समूचे बाजार को अपनी गिरफ्त में ले रखा है, वहीं दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतें गिर रही हैं। इसके विपरीत, यूरोपीय और अमेरिकी शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ खुलने की तैयारी में दिखे। हालांकि, असली तनाव सरकारी बॉन्ड बाजार में केंद्रित है। शुक्रवार देर शाम यूरोपीय और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में दोबारा उछाल आया, जिससे बॉन्ड बाजारों में नई घबराहट पैदा हुई और प्रतिफल ऊपर चढ़ गए।















