धन, वैभव और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी की साधना का महापर्व महालक्ष्मी व्रत अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। 19 सितंबर से प्रारंभ हुआ यह 16 दिवसीय पावन अनुष्ठान 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को विधिवत संपन्न होगा। इस दिन शाम की विशेष पूजा के साथ साधक अपने व्रत का उद्यापन करेंगे। वैदिक परंपरा के अनुसार, इस पूरे अनुष्ठान के दौरान मां लक्ष्मी की शास्त्रीय रीति-रिवाज से उपासना करने पर परिवार में सुख, शांति, खुशहाली और स्थायी संपन्नता का वास होता है। पूजन के साथ-साथ इस अवसर पर पवित्र अग्नि में आहुति देने अर्थात हवन करने का भी अत्यंत महत्वपूर्ण विधान माना गया है।
हवन का महत्व और राशि अनुसार आहुति
अक्सर भागदौड़ या किसी अनिवार्य कारण से कई साधक व्रत के प्रारंभिक दिनों में नित्य हवन संपन्न नहीं कर पाते। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि पूरे 16 दिनों के दौरान हवन छूट गया हो, तो समापन के दिन विशेष सामग्री से दी गई आहुतियां पूरे अनुष्ठान का फल प्रदान करने में सक्षम मानी जाती हैं। ज्योतिषी आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार, सभी 12 राशियों के जातक अपनी कुंडली और राशि के अनुरूप विशिष्ट सामग्रियों का चयन करके देवी महालक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
मेष से कर्क राशि तक के लिए हवन सामग्री
विभिन्न राशियों के लिए निर्धारित आहुति सामग्री इस प्रकार है
- मेष राशि: मेष राशि के जातकों को मां महालक्ष्मी की कृपा दृष्टि पाने के लिए शुद्ध गाय के घी में ताजी दूर्वा डुबोकर हवन कुंड में आहुति देनी चाहिए।
- वृष राशि: वृष राशि से जुड़े लोगों के लिए अक्षत यानी साबुत चावल से हवन करने का निर्देश दिया गया है।
- मिथुन राशि: मिथुन राशि के साधक कमल के ताजे अथवा सूखे पुष्पों को पहले स्वच्छ जल में भिगो लें और फिर उनसे श्रद्धापूर्वक आहुति दें।
- कर्क राशि: कर्क राशि के जातकों को बेल के फलों में शुद्ध शहद, देसी घी और शक्कर मिलाकर तैयार की गई सामग्री से आहुति समर्पित करनी चाहिए।
सिंह से वृश्चिक राशि के जातकों के लिए विधान
मध्यवर्ती राशियों के लिए शास्त्रों में प्रकृति से जुड़ी दिव्य वनस्पतियों का चयन बताया गया है
- सिंह राशि: सिंह राशि के व्यक्तियों को शुद्ध घी में गिलोय के टुकड़ों को अच्छी तरह डुबोकर यज्ञ वेदी में समर्पित करना चाहिए।
- कन्या राशि: कन्या राशि के जातकों के लिए घी युक्त नन्द्यावर्त के फूल, पीली सरसों और मेषश्रृंगी (लक्ष्मीवल्ली) से हवन करने का विशेष महत्व बताया गया है। यदि ये सभी सामग्रियां एक साथ उपलब्ध न हो सकें, तो इनमें से जो भी वस्तु सुगमता से मिल जाए, उसी से हवन कार्य पूरा किया जा सकता है।
- तुला राशि: तुला राशि वाले लोगों को काली मिर्च, जीरा, सूखा नारियल (गिरी), शुद्ध गुड़ और देसी घी से निर्मित पुओं की आहुति देनी चाहिए।
- वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि के साधकों को समापन दिवस पर मदार की सूखी लकड़ी को घी में डुबोकर महालक्ष्मी को आहुतियां अर्पित करनी चाहिए।
धनु से मीन राशि तक की आहुति सूची
अंतिम चार राशियों के लिए हवन सामग्री का शास्त्रीय विवरण निम्न प्रकार है
- धनु राशि: धनु राशि के जातकों को कद्दूकस की हुई सूखे नारियल की गिरी में शुद्ध घी मिलाकर हवन संपन्न करना चाहिए।
- मकर राशि: मकर राशि से संबंधित लोगों के लिए गुड़ मिले हुए जौ, तिल और चावल के मिश्रण से आहुति देने का विधान बताया गया है।
- कुंभ राशि: कुंभ राशि के जातकों को महालक्ष्मी व्रत के समापन पर केवल सफेद तिल से आहुतियां समर्पित करनी चाहिए।
- मीन राशि: मीन राशि के साधकों को दूध और चावल के संयोग से तैयार की गई पारंपरिक मीठी खीर से हवन कुंड में आहुति देनी चाहिए।
समापन की शाम को विधिपूर्वक आरती, स्तुति और अपनी राशि के अनुकूल हवन संपन्न करने के पश्चात ही व्रत का पारण और प्रसाद वितरण करना श्रेयस्कर माना गया है।


















