सनातन परंपरा में मार्गशीर्ष माह को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने इस महीने की महिमा बताते हुए कहा था कि सब महीनों में वह स्वयं मार्गशीर्ष हैं। भगवान श्री कृष्ण को समर्पित यह समय साधना और आत्मिक शुद्धि के लिए सबसे उत्तम अवसर माना जाता है। इस पूरे माह के दौरान पवित्र गंगा नदी में स्नान करने, अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देने, तुलसी की नियमित आराधना करने और भगवान श्री कृष्ण के पावन नामों का जाप करने वाले साधक को देहावसान के बाद मोक्ष पद प्राप्त होता है। इसके साथ ही इस पूरे समय में घर पर किए गए विशेष अनुष्ठान परिवार में सुख और ऐश्वर्य का संचार करते हैं।
देवघर बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के तीर्थ पुरोहित का मार्गदर्शन
देवघर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल बैद्यनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित के अनुसार, मार्गशीर्ष का यह पावन कालखंड प्रारंभ हो चुका है और यह आगामी 06 दिसंबर तक जारी रहेगा। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि इस अवधि में तुलसी के पौधे की उपासना और जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने से साधक को असीम मानसिक शांति मिलती है। किसी भी शुभ अथवा मांगलिक कार्य में आ रही अड़चनों को दूर कर सफलता प्राप्त करने के लिए यह समय सर्वोत्तम माना जाता है। आध्यात्मिक उन्नति की कामना रखने वाले लोगों के लिए यह महीना विशेष ऊर्जा लेकर आता है। इस दौरान तुलसी से जुड़े नियमों का पालन करने से जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है और तनाव से मुक्ति मिलती है।
शाम के समय दीपक और विशेष नियम
तीर्थ पुरोहित ने इस पावन महीने में तुलसी पूजन से जुड़े कुछ विशेष नियम और सावधानियां भी साझा की हैं। सबसे अहम नियम यह है कि मार्गशीर्ष के दिनों में संध्या काल के समय भूलकर भी तुलसी का पत्ता नहीं तोड़ना चाहिए, क्योंकि धर्म शास्त्रों में गोधूलि बेला में पत्ते तोड़ना पूरी तरह वर्जित माना गया है। इसके विपरीत, शाम ढलते ही प्रतिदिन तुलसी के पौधे के समीप गाय के शुद्ध घी का दीपक अवश्य प्रज्वलित करना चाहिए। मान्यता है कि नियमित रूप से संध्या दीप जलाने से सोया हुआ भाग्य जाग उठता है और घर-परिवार में अपार सुख एवं समृद्धि का वास होता है।
तुलसी मंजरी और सत्यनारायण पूजन से परेशानियां होंगी दूर
इस मौसम में सामान्यतः तुलसी के पौधे में नई मंजरी खिलने लगती है, जिसका धार्मिक उपयोग अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। तीर्थ पुरोहित के अनुसार, मार्गशीर्ष के दौरान जब भी घर में श्री सत्यनारायण व्रत की पावन कथा आयोजित की जाए, उस दिन तुलसी की मंजरी भगवान विष्णु के चरणों में श्रद्धापूर्वक अर्पित करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से मनुष्य के सात जन्मों की दरिद्रता और आर्थिक तंगी का नाश हो जाता है। यह पावन उपाय साधक को हर तरह के कष्टों और बाधाओं से मुक्ति दिलाता है, साथ ही स्वास्थ्य संबंधी पुरानी परेशानियों और बीमारियों का भी निवारण करता है। इन्हीं अद्भुत आध्यात्मिक गुणों के कारण धर्म ग्रंथों में मार्गशीर्ष माह का विशिष्ट स्थान निर्धारित किया गया है।

















