बारिश की पहली फुहार और खेतों में हरियाली की उम्मीद, यही भाव लेकर भोजपुर जिले समेत बिहार के कई इलाकों में अदरा पर्व मनाया जाता है। किसानों के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि अच्छी बारिश और बेहतर खेती की उम्मीद का संकेत है। इस मौके पर घर-घर में दालपुरी, खीर और आम का खास भोजन बनता है और सगे-संबंधियों को बुलाकर सब मिलकर एक साथ भोजन करते हैं।
भोजपुर के ब्राह्मण सुमन बाबा ने इस पर्व की मान्यता और इससे जुड़ी परंपराओं को विस्तार से समझाया। उनके मुताबिक, किसान पूरे साल अदरा नक्षत्र का इंतजार करते हैं। लोक मान्यता है कि अदरा नक्षत्र के प्रवेश के बाद अच्छी बारिश की संभावना बढ़ जाती है, और यही वजह है कि यह समय किसानों के लिए बेहद अहम होता है।
बारिश, खेती और आम का गहरा रिश्ता
अच्छी बारिश होते ही धान की रोपनी और खेती-किसानी के बाकी काम रफ्तार पकड़ लेते हैं। इसी दौरान आम के फलों का आकार भी बढ़ता है और फसल के लिए माहौल अनुकूल बन जाता है। सुमन बाबा कहते हैं कि इन्हीं कारणों से अदरा पर्व किसानों के लिए खुशहाली और समृद्धि का संदेश लेकर आता है।
दालपुरी, खीर और आम का खास महत्व
सुमन बाबा बताते हैं कि अदरा पर्व पर दालपुरी, खीर और आम खाने की परंपरा सदियों पुरानी है। यह वही समय होता है जब आम की पैदावार अपने चरम पर रहती है और नए मौसम के स्वागत के साथ लोग प्रकृति के प्रति आभार जताते हैं। खीर और दालपुरी को शुभ और सात्विक भोजन माना जाता है, जबकि आम को समृद्धि और मिठास का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि इन तीनों व्यंजनों का इस दिन खास महत्व होता है।
रिश्तों को मजबूत करने वाला पर्व
इस दिन सगे-संबंधियों, दोस्तों और पड़ोसियों को भोजन पर बुलाने की परंपरा सामाजिक एकता और आपसी प्रेम को मजबूत करने के लिए बनी है। सुमन बाबा के अनुसार, पुराने समय में लोग खेती-किसानी के कामों में एक-दूसरे का हाथ बंटाते थे, इसलिए अदरा पर्व पर सामूहिक भोज के जरिए रिश्तों को और गहरा किया जाता था। इस तरह यह पर्व सिर्फ स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेने का मौका नहीं, बल्कि परिवार और समाज के बीच प्रेम, सौहार्द और एकजुटता बढ़ाने का संदेश भी देता है।







