त्योहारी सीजन की दस्तक के साथ ही परिधानों और पारंपरिक परिधानों की खरीदारी तेज हो जाती है, विशेषकर दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर सिल्क साड़ियों की मांग काफी बढ़ जाती है। आमतौर पर सिल्क का नाम आते ही लोगों के मन में 10 हजार रुपये से अधिक के भारी बजट का विचार आता है, लेकिन रेशम नगरी के नाम से मशहूर भागलपुर के स्थानीय बाजारों में यह धारणा पूरी तरह बदल जाती है। यहां के मुख्य व्यापारिक क्षेत्रों में 4 हजार रुपये की शुरुआती कीमत से ही खूबसूरत और असली सिल्क साड़ियां उपलब्ध हो जाती हैं। देश से लेकर विदेशों तक पहचान बना चुके इस शहर में खुदरा और थोक ग्राहकों को एक ही दर पर खरीदारी का सीधा फायदा मिलता है।
लूम से सीधे बाजार तक कपड़े का सफर
पूरे भागलपुर जिले में पारंपरिक लूम की खटखट की आवाज पहचान बन चुकी है, जहां दिन-रात रेशम के धागों से ताना-बाना बुना जाता है। खरीदारी के दौरान यह जानना जरूरी है कि लूम से सीधे तैयार कपड़ा नहीं खरीदा जा सकता, क्योंकि करघे पर बुनाई के बाद कपड़े को पूरी फिनिशिंग से गुजरना होता है। फिनिश्ड साड़ियां और तैयार वस्त्र प्राप्त करने के लिए यहां के विशेष बाजार ही सबसे उपयुक्त स्थान माने जाते हैं। चम्पानगर स्थित तांती बाजार इस तरह के रेशमी परिधानों का सबसे प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां 50 से अधिक अधिकृत दुकानें मौजूद हैं। इन दुकानों पर सामान्य खुदरा बाजारों की तुलना में काफी सस्ती दरों पर पारंपरिक भागलपुरी वस्त्र आसानी से मिल जाते हैं।
सुजागंज, हुसैनाबाद और पुरैनी में किफायती खरीदारी
भागलपुर शहर के भीतर सुजागंज बाजार खास तौर पर कपड़ों के बड़े व्यापारिक हब के रूप में जाना जाता है, जहां विशाल पैमाने पर सिल्क वस्त्रों का संग्रह देखने को मिलता है। बुनकरों की सघन आबादी वाला हुसैनाबाद इलाका भी इस शहर का एक अहम बुनकर केंद्र है। इसके अलावा पुरैनी में भी खरीदारों को काफी किफायती दरों पर सिल्क की साड़ियां और फैब्रिक मिल जाते हैं। इन सभी इलाकों में दो तरह की बुनाई तकनीक देखने को मिलती है, जिनमें हैंडलूम और पावरलूम शामिल हैं। हाथ से बुने गए हैंडलूम के कपड़े अपनी विशिष्ट बनावट के कारण अधिक महंगे होते हैं, जबकि पावरलूम पर तैयार वस्त्र तुलनात्मक रूप से काफी सस्ते पड़ते हैं।
तसर से लेकर मटका तक सिल्क की समृद्ध किस्में
स्थानीय उत्पादन में कई अलग-अलग किस्मों का सिल्क तैयार किया जाता है, जिसमें तसर सिल्क को यहां की सबसे अनूठी और प्रसिद्ध पहचान माना जाता है। तसर के अलावा बुनकर मलबरी, कोटा, घिच्चा, एड़ी और मटका सिल्क के बेहतरीन कपड़े भी तैयार करते हैं। इन मुख्य रेशमी किस्मों के अतिरिक्त अन्य लोकप्रिय फैब्रिक का निर्माण भी यहां निरंतर होता है, जिनकी बाजार में भारी मांग बनी रहती है। दुर्गा पूजा और अन्य त्योहारों के अनुसार यहां लगातार नए-नए फैशनेबल डिजाइनों में साड़ियां बुनी जाती हैं, जिससे खरीदारों को थोक भाव में ही रिटेल साड़ियां चुनने का अवसर मिलता है।


















