घरों की सजावट बढ़ाने और आसपास के वातावरण को खुशनुमा बनाए रखने के लिए मनी प्लांट को सबसे लोकप्रिय पौधों में गिना जाता है। इस पौधे को अक्सर घरों की खिड़कियों, बालकनी या फिर पर्याप्त रोशनी वाले कमरों में रखा जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस पौधे को हमेशा दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना काफी शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-शांति बनी रहती है। हालांकि कई बार उचित देखभाल न मिलने के कारण यह पौधा सूखने लगता है और इसकी पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। खासकर सर्दियों के मौसम में इस पौधे को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है ताकि यह स्वस्थ बना रहे।
लगाने में आसान लेकिन रखरखाव जरूरी
यह पौधा बहुत कम मेहनत में आसानी से पनप जाता है। इसे नर्सरी से खरीदकर गमले में लगाया जा सकता है, पुरानी बोतलों में सजाया जा सकता है या फिर केवल पानी में भी उगाया जा सकता है। लेकिन यह भी सच है कि जितनी आसानी से यह लग जाता है, उतनी ही जल्दी इसकी सेहत बिगड़ने का खतरा भी रहता है। यदि समय पर इसे उचित पोषण या खाद नहीं दी जाए तो इसकी पत्तियां झड़ने लगती हैं और जड़ें कमजोर हो जाती हैं। ऐसे में पौधा बेजान नजर आने लगता है, उसकी ग्रोथ रुक जाती है और पत्तियों का आकार भी छोटा रह जाता है।
बुनियादी देखभाल और सही खाद के नियम
पौधे को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले पीली पड़ चुकी पत्तियों को तुरंत हटा देना चाहिए। मिट्टी की ऊपरी सतह सूखने के बाद ही पानी देना चाहिए और अधिक पानी देने से बचना चाहिए ताकि जड़ें सड़े नहीं। हर 20 दिन के अंतराल पर उपलों का पानी देना फायदेमंद रहता है, जबकि हर 3 महीने के अंतराल पर वर्मी कंपोस्ट या गोबर की सड़ी खाद डालनी चाहिए। पौधे को न तो पूरी तरह अंधेरे में रखना चाहिए और न ही तेज धूप में। इसे ऐसी जगह रखना चाहिए जहाँ हल्की और छनकर धूप मिलती रहे।
पोषण बढ़ाने के लिए घरेलू उपाय
पौधे की ग्रोथ तेजी से बढ़ाने के लिए लिक्विड सीवीइड का इस्तेमाल किया जा सकता है जिसे ऑनलाइन मंगवाया जा सकता है। इसके अलावा रसोईघर में मौजूद सामान्य चायपत्ती भी बहुत उपयोगी साबित होती है। एक चम्मच चायपत्ती को एक लीटर पानी में घोलकर 24 घंटे के लिए रख दें और फिर उस पानी को गमले में डालें। चायपत्ती में नाइट्रोजन प्रचुर मात्रा में पाई जाती है जो तने को मजबूत बनाने और पत्तियों को हरा-भरा रखने में काफी मदद करती है।
चावल का पानी भी इस पौधे के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक उर्वरक का काम करता है। इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम, विटामिन-बी, स्टार्च, अमीनो एसिड और कई मिनरल्स होते हैं जो जड़ों को मजबूती देते हैं। इसकी मदद से नई कोंपलें फूटती हैं और पत्तियां बड़ी तथा चमकदार बनती हैं। इस पानी को स्प्रे बोतल में भरकर पत्तियों पर भी छिड़काव किया जा सकता है और हर 10-15 दिन में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा आलू और प्याज के छिलकों का पानी भी इसमें डाला जा सकता है।
कच्चे दूध का जादुई असर
घर में मौजूद कच्चे दूध का इस्तेमाल करके भी मनी प्लांट की सेहत सुधारी जा सकती है। ध्यान रहे कि दूध उबला हुआ नहीं होना चाहिए बल्कि पूरी तरह कच्चा होना चाहिए। यदि घर में एक प्लांट है तो 200 एमएल कच्चे दूध को आधा लीटर पानी में अच्छी तरह मिलाएं और फिर इसे गमले की मिट्टी में डालें तथा पत्तियों पर छिड़काव करें। कच्चे दूध में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन-बी पाए जाते हैं जो पौधे को अंदरूनी पोषण प्रदान करते हैं और उसकी ग्रोथ को रफ्तार देते हैं।



















