अक्सर ऐसा देखा गया है कि साफ-सुथरे और बार-बार धुले हुए कपड़ों से भी पसीने की बदबू पूरी तरह से खत्म नहीं होती है। यह परेशानी केवल गर्मी के महीनों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे साल कभी भी बनी रह सकती है। भले ही शरीर से अधिक पसीना बहता हुआ नजर न आए, लेकिन त्वचा से हर समय सूक्ष्म मात्रा में पसीना निकलता रहता है। इसके साथ ही कपड़ों के रेशों में छिपने वाले बैक्टीरिया और ठीक से साफ न होने पर डिटर्जेंट के कण भी बदबू पैदा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी वजह से कपड़े बाहर से एकदम साफ और चमकदार दिखते हैं, लेकिन जैसे ही उन्हें दोबारा पहना जाता है, उनमें से दुर्गंध आने लगती है।
गलत तरीकों से बढ़ सकती है परेशानी
इस अप्रिय गंध से निजात पाने के लिए कई लोग बाजार में मिलने वाले महंगे परफ्यूम, खुशबूदार डिटर्जेंट या फैब्रिक सॉफ्टनर का अंधाधुंध इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं। हालांकि, इन चीजों का जरूरत से ज्यादा उपयोग समस्या को सुलझाने के बजाय और ज्यादा जटिल बना सकता है। अच्छी बात यह है कि कुछ बेहद किफायती और आसान घरेलू उपायों की मदद से कपड़ों में बैठी इस जिद्दी बदबू से सफलतापूर्वक मुक्ति पाई जा सकती है। कपड़ों से दुर्गंध आने के मूल कारणों को समझकर कुछ आसान सी सावधानियां और नुस्खे आजमाए जाएं तो कपड़े हमेशा तरोताजा बने रहते हैं।
बेकिंग सोडा का असरदार इस्तेमाल
कपड़ों से पसीने की बदबू को दूर करने के लिए बेकिंग सोडा एक बेहद कारगर विकल्प साबित होता है। इसका उपयोग करने के लिए बेकिंग सोडा में थोड़ा-सा पानी मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें। अब इस पेस्ट को कपड़े के उन खास हिस्सों पर अच्छी तरह लगाएं जहां पसीना सबसे ज्यादा आता है और दुर्गंध की समस्या अधिक होती है, जैसे कि कॉलर या अंडरआर्म्स का हिस्सा। इस लेप को कपड़ों पर लगभग 30 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें और उसके बाद कपड़ों को अपने सामान्य तरीके से पानी से धो लें।
सफेद सिरके का घोल
कपड़ों की दुर्गंध दूर करने के लिए सफेद सिरके का उपयोग भी बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसके लिए एक भाग सफेद सिरके में चार भाग पानी मिलाकर एक घोल तैयार कर लें। अब अपने गंध वाले कपड़ों को इस मिश्रण में लगभग 30 मिनट के लिए भिगोकर छोड़ दें। तय समय के बाद कपड़ों को सामान्य डिटर्जेंट का उपयोग करके पानी से साफ कर लें। सिरके का यह तरीका कपड़ों के रेशों में छिपे उन अवशेषों और बैक्टीरिया को हटाने में मदद करता है जो बदबू की असली वजह बनते हैं।
पसीने से भीगे हुए कपड़ों को कभी भी लंबे समय तक बिना धोए इकट्ठा करके न रखें। कपड़ों को जितनी जल्दी पानी और साबुन से धोया जाएगा, उनमें बैक्टीरिया के पनपने की संभावना उतनी ही कम हो जाएगी। इसके अलावा कपड़ों के फैब्रिक के प्रकार को ध्यान में रखते हुए पानी के तापमान का चुनाव करना भी बहुत जरूरी होता है। सिंथेटिक कपड़ों को हमेशा ठंडे पानी से धोना ज्यादा बेहतर माना जाता है, जबकि सूती और लिनेन के कपड़ों की सफाई के लिए गुनगुना पानी अधिक असरदार साबित हो सकता है। यदि कपड़ों से दुर्गंध बहुत ज्यादा आ रही है, तो वॉशिंग मशीन में हेवी-ड्यूटी वॉश साइकिल का चयन करना भी काफी फायदेमंद रहता है।



















