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जितिया व्रत 2026: जानिए पारण का शुभ समय, संपूर्ण पूजा विधि और जरूरी नियमत्योहार
3 अक्तू॰ 2026, 10:26 am (59 मिनट पहले)· 0

जितिया व्रत 2026: जानिए पारण का शुभ समय, संपूर्ण पूजा विधि और जरूरी नियम

संतान की लंबी उम्र के लिए रखे जाने वाले जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026 को सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद किया जाएगा। व्रत खोलने की सही विधि और पारंपरिक नियमों को विस्तार से समझें।

संतान के निरोगी जीवन, सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना के साथ रखा जाने वाला जितिया व्रत माताओं की कठिन तपस्या और अटूट वात्सल्य का अनूठा पर्व है। इस पावन अवसर पर महिलाएं 24 घंटे से भी अधिक समय तक निर्जला उपवास रखती हैं और भगवान जीमूतवाहन की विधिपूर्वक आराधना करती हैं। मुख्य तौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और इनके सीमावर्ती अंचलों में यह लोकपर्व बेहद श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विधि-विधान से यह अनुष्ठान करने पर संतानों को तेजस्वी व्यक्तित्व और संकटों से रक्षा का वरदान मिलता है। इस साधना में पारण के समय का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है, क्योंकि शास्त्रों के अनुरूप शुभ वेला में ही उपवास समाप्त करने का विधान है।

जितिया पारण का शुभ मुहूर्त

पंचांग के नियमों के अनुसार जितिया व्रत का समापन अष्टमी तिथि की समाप्ति के बाद नवमी तिथि में करने की परंपरा है। वर्ष 2026 में जितिया का निर्जला व्रत 3 अक्टूबर को रखा गया है, जबकि इसका पारण अगले दिन 4 अक्टूबर 2026, दिन रविवार को संपन्न होगा। पारण के लिए निर्धारित समय 4 अक्टूबर की सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद का है। नवमी तिथि का आगमन होने पर ही पारण को सर्वश्रेष्ठ और फलदायी माना गया है। तय समय सीमा बीतने के उपरांत ही व्रती महिलाएं जल ग्रहण कर सकती हैं और उसके पश्चात पारंपरिक अन्न ग्रहण करके अपने अनुष्ठान को पूर्णता प्रदान करती हैं।

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पारण की संपूर्ण पूजा विधि

पारण के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त अथवा सूर्योदय से पहले जागना चाहिए। नित्यकर्म और स्नान आदि से निवृत्त होकर पूर्ण रूप से स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके उपरांत एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल लेकर उसमें अक्षत और लाल पुष्प मिलाएं, फिर उगते हुए भगवान सूर्य को श्रद्धापूर्वक अर्घ्य अर्पित करें। सूर्य पूजन के बाद घर के पूजा स्थल पर धूप और दीप प्रज्वलित करें।

पूजा वेदी पर भगवान जीमूतवाहन के साथ-साथ कथा से जुड़ी चील और सियारिन का मानसिक ध्यान करते हुए उन्हें पवित्र जल, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें। पूजा संपन्न हो जाने पर सबसे पहले प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में वितरित करें। इसके बाद भगवान के चरणों में अर्पित किए गए जल और प्रसाद के एक अंश से व्रती महिलाएं स्वयं अपना उपवास खोलें। प्रसाद ग्रहण करने के उपरांत पारंपरिक सात्विक भोजन तैयार करके ग्रहण किया जाता है। जितिया के पारण में पारंपरिक रूप से नोनी का साग और झिंगनी यानी तोरी की सब्जी खाने का विशेष महत्व है, जिसे अनिवार्य रूप से थाली में शामिल किया जाता है।

पारण के दिन ध्यान रखने योग्य मुख्य नियम

जितिया व्रत के पारण के समय कुछ पारंपरिक नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है। पारण के दिन बनने वाला भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिए, जिसमें प्याज और लहसुन का प्रयोग बिल्कुल न किया जाए। स्वयं भोजन करने से पूर्व किसी जरूरतमंद व्यक्ति अथवा ब्राह्मण को अन्न, भोजन या धन का दान अवश्य करना चाहिए। यदि तत्काल दान करना संभव न हो, तो उनके निमित्त भोजन व अनाज अलग निकालकर रख दें।

एक बेहद कड़ा नियम यह है कि जितिया व्रत का पारण कभी भी अष्टमी तिथि के रहते नहीं किया जाता। इसी कारण 4 अक्टूबर को सुबह 07:28 बजे के बाद ही जल और अन्न ग्रहण करें, ताकि व्रत का पूर्ण पुण्य फल प्राप्त हो सके। नियमों की अनदेखी से व्रत खंडित माना जाता है, इसलिए समय और सात्विकता का विशेष ध्यान रखें।

सवाल-जवाब

जितिया व्रत 2026 में कब रखा जाएगा?
जितिया का निर्जला उपवास 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा।
जितिया व्रत का पारण किस दिन और किस समय होगा?
जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026, रविवार को सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद किया जाएगा।
पारण के दिन किन सब्जियों का सेवन जरूरी माना जाता है?
पारण के दिन भोजन में पारंपरिक रूप से नोनी का साग और झिंगनी यानी तोरी की सब्जी खाना आवश्यक माना गया है।
क्या जितिया व्रत का पारण अष्टमी तिथि में किया जा सकता है?
नहीं, धार्मिक नियमों के अनुसार जितिया व्रत का पारण अष्टमी तिथि में नहीं किया जाता, इसे नवमी तिथि में ही खोलना चाहिए।
पारण करने से पहले क्या दान करना चाहिए?
पारण के दिन स्वयं भोजन करने से पूर्व किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, धन या भोजन का दान करना चाहिए।
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