आंध्र प्रदेश के पार्वतीपुरम मान्यम जिले से सांप्रदायिक सद्भाव और आपसी विश्वास की एक अनूठी मिसाल सामने आई है। सालूर शहर के वड्डी स्ट्रीट इलाके में रहने वाले एक मुस्लिम परिवार ने सामाजिक और धार्मिक बंधनों से परे जाकर भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना कराई। मोहम्मद अब्दुल हक और उनकी पत्नी मोहम्मद सलमा ने अपने आवास के निकट गणेश उत्सव के अवसर पर भव्य पंडाल का निर्माण कराया और पारंपरिक तौर-तरीकों से अनुष्ठान पूरे किए। परिवार के इस फैसले के पीछे उनके बेटे के सेना में चयन को लेकर रखी गई एक खास मन्नत थी, जिसके पूरा होने पर उन्होंने इस धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया।
चार बार की नाकामी के बाद टूटा नहीं हौसला
मोहम्मद अब्दुल हक के बेटे का बचपन से ही भारतीय सेना का हिस्सा बनकर राष्ट्र की रक्षा करने का गहरा सपना था। अपने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उसने लगातार चार बार सेना भर्ती प्रक्रियाओं में हिस्सा लिया और कड़े शारीरिक परीक्षणों के साथ-साथ लिखित परीक्षाएं भी दीं। हर बार वह बेहतरीन प्रदर्शन करता, लेकिन अंतिम मेरिट सूची जारी होने पर किसी न किसी वजह से उसका नाम चयन सूची में दर्ज होने से रह जाता था। लगातार चार बार मिली असफलता ने युवक का मनोबल तोड़ दिया था और वह गहरे तनाव व निराशा के दौर से गुजर रहा था।
दोस्त बने संबल और मांगी गई विशेष मन्नत
जब पांचवीं बार सेना भर्ती की अधिसूचना जारी हुई, तो मोहल्ले के हमउम्र साथियों और दोस्तों ने युवक को फिर से प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। दोस्तों के सुझाव पर भरोसा जताते हुए युवक ने भगवान गणेश के समक्ष प्रार्थना की और मन्नत मांगी कि यदि उसका चयन इस बार सेना में हो गया, तो वह पूरे विधि-विधान और धूमधाम से गणपति उत्सव आयोजित कराएगा। इसके बाद युवक ने दिन-रात कड़ी मेहनत की और अपनी तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी।
पांचवें प्रयास में चयन और प्रशिक्षण के लिए रवानगी
युवक का कड़ा अभ्यास रंग लाया और पांचवें प्रयास में उसका अंतिम चयन भारतीय सेना के लिए हो गया। चयन प्रक्रिया पूरी होने के तत्काल बाद उसे अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण के लिए रवाना कर दिया गया। प्रशिक्षण केंद्र जाने से पहले उसने अपने पिता मोहम्मद अब्दुल हक से आग्रह किया कि उसने ईश्वर के समक्ष जो मन्नत रखी थी, उसे परिवार की ओर से पूरा किया जाए ताकि उसका संकल्प अधूरा न रहे।
पंडाल में खुद बैठकर माता-पिता ने संपन्न कराए अनुष्ठान
बेटे के संकल्प और इच्छा का सम्मान करते हुए मोहम्मद अब्दुल हक और मोहम्मद सलमा ने बिना किसी संकोच के वड्डी स्ट्रीट में भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमा स्थापित करवाई। मुस्लिम दंपति ने पूजा मंडप में स्वयं बैठकर प्रथम पूजा के सभी जरूरी धार्मिक विधान संपन्न किए। इसके साथ ही उन्होंने उत्सव के दौरान आयोजित होने वाले वसंत पूजा के पारंपरिक अनुष्ठानों को भी पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ निभाया।
सामाजिक सीमाओं से परे आस्था और भाईचारे का संदेश
मोहम्मद अब्दुल हक का कहना है कि सच्ची आस्था, निष्ठा और समर्पण के मार्ग में जाति अथवा मजहब की दीवारें कभी बाधक नहीं बन सकतीं। वे लंबे समय से सामाजिक सौहार्द से जुड़े रहे हैं और इससे पूर्व स्थानीय कनक महालक्ष्मी मंदिर में आयोजित होने वाले विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में भी सक्रिय रूप से भाग लेते रहे हैं। उनका मानना है कि मानवीय संबंध, आपसी आदर और ईश्वर के प्रति निष्ठा किसी भी औपचारिक पहचान से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। इस आयोजन की पूरे इलाके में व्यापक सराहना की जा रही है।





















