बरसात की फुहारें शुरू होते ही निमाड़ अंचल के घरों में खानपान का मिजाज पूरी तरह बदल जाता है। ठंडे और सुहाने मौसम में हर किसी की ख्वाहिश कुछ गर्मागर्म और जायकेदार खाने की होती है। ऐसे खुशनुमा माहौल में स्थानीय बाशिंदों की सबसे पसंदीदा पारंपरिक थाली कढ़ी पकौड़ा बन जाती है। अपने खास खट्टे-मीठे स्वाद और लुभावनी खुशबू के चलते यह पारंपरिक व्यंजन बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है। इसी वजह से बादलों के बरसते ही निमाड़ की लगभग हर रसोई में कढ़ी पकौड़ा खास तौर पर पकने लगता है।
सीमित सामग्री और आसान तरीके से बनती है कढ़ी
इस पारंपरिक व्यंजन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे तैयार करने के लिए किसी तामझाम या दुर्लभ सामग्री की आवश्यकता नहीं पड़ती। रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाली बेहद बुनियादी चीजों से यह झटपट बनकर तैयार हो जाती है। फुला बाई के अनुसार, कढ़ी पकौड़ा बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती है। घर की रसोई में सहजता से उपलब्ध दही, बेसन, जीरा, तेल, नमक और मिर्च की मदद से इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसे पकाने की प्रक्रिया भी काफी सीधी और पारंपरिक है।
कढ़ी की शुरुआत दही और बेसन के सही अनुपात से होती है। सबसे पहले दही और बेसन को एक साथ अच्छी तरह फेंटकर एकसार घोल बनाया जाता है। इसके उपरांत आवश्यकता और पसंद के अनुसार तय मसाले डालकर धीमी आंच पर इसे पकाया जाता है। कढ़ी के पूरे स्वाद की जान उसके खट्टेपन और मसालों के सटीक संतुलन में छिपी होती है, जो इसे दूसरी सामान्य कढ़ियों से बिल्कुल जुदा बनाती है।
नरम पकौड़े और परोसने का पारंपरिक तरीका
बेसन से तले गए कुरकुरे और अंदर से बेहद नरम पकौड़े जैसे ही उबलती कढ़ी में डाले जाते हैं, इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। गर्मागर्म कढ़ी में पड़ते ही ये पकौड़े कढ़ी के रस को अपने भीतर सोख लेते हैं और मुंह में जाते ही घुलने वाले बन जाते हैं। भोजन की मेज पर इसे सादे उबले चावल या गर्मागर्म फुल्का रोटी के साथ परोसा जाता है। अनेक परिवारों में दोपहर के भोजन में कढ़ी पकौड़ा पकाने का चलन है, वहीं कई जगह बरसात के सुहावने वक्त में पूरे परिवार के सदस्य इकट्ठा होकर एक साथ बैठकर इसका लुत्फ उठाते हैं।
निमाड़ की पाक संस्कृति का अहम हिस्सा
निमाड़ की खानपान परंपरा में ऋतुओं के बदलाव का बड़ा गहरा असर दिखता है। यहां का खानपान मौसम के मिजाज से सीधे जुड़ा है और मौसमी पकवान लोगों की रोजमर्रा की दिनचर्या में रचे-बसे रहते हैं। कढ़ी पकौड़ा भी एक ऐसा ही लोकप्रिय व्यंजन है, जो अपनी सुगम विधि और बेजोड़ स्वाद के कारण सदियों से लोगों के दिलों पर राज कर रहा है। बारिश के दिनों में घर के चूल्हे पर बनी ताजा कढ़ी पकौड़ा का स्वाद लोगों को तृप्त कर देता है। अपने अनोखे खट्टे-मीठे स्वाद, सहज तैयारी और ठेठ देसी अंदाज के चलते यह निमाड़ के पसंदीदा खानपान में शुमार है, जिसकी याद मानसून आते ही हर जुबान पर ताजा हो जाती है।


















