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रसोई में हरी सब्जियां न हों तो तैयार करें स्वादिष्ट पकौड़ा कढ़ी, आसान विधि से मिलेगा लाजवाब स्वादखानपान
19 सित॰ 2026, 10:18 pm (1 घंटे पहले)· 0

रसोई में हरी सब्जियां न हों तो तैयार करें स्वादिष्ट पकौड़ा कढ़ी, आसान विधि से मिलेगा लाजवाब स्वाद

घर में हरी सब्जियां खत्म होने पर बेसन और दही के मेल से तैयार होने वाली पारंपरिक कढ़ी एक बेहतरीन और जायकेदार विकल्प साबित होती है। सही विधि से बना घोल और संतुलित तड़का इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है।

दैनिक जीवन की भागदौड़ में कई बार ऐसा मौका आता है जब रसोई में हरी सब्जियां खत्म हो जाती हैं और बाजार जाकर खरीदारी करने का समय बिल्कुल नहीं होता। ऐसे समय में परिवार के लिए एक तृप्त करने वाला, स्वादिष्ट और संपूर्ण भोजन तैयार करना अक्सर गृहिणियों के लिए एक बड़ा सवाल बन जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए भारतीय रसोई की बुनियादी सामग्री सबसे ज्यादा मददगार साबित होती है। यदि घर में बेसन, दही और रोजमर्रा के कुछ मसाले उपलब्ध हैं, तो किसी भी अतिरिक्त परेशानी के बिना पारंपरिक स्वाद से भरपूर पकौड़ा कढ़ी बनाई जा सकती है। यह व्यंजन न केवल बनाने में बेहद सरल है, बल्कि स्वाद के मामले में भी हर किसी को खूब पसंद आता है।

साधारण सामग्री से बनने वाला खास पारंपरिक भोजन

भारतीय खानपान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें कम से कम चीजों के साथ भी उत्कृष्ट स्वाद तैयार किया जा सकता है। बेसन और दही के तालमेल से पकने वाली कढ़ी इसका एक सटीक उदाहरण है। उत्तर भारत के विशाल भूभाग में कढ़ी को दोपहर या रात के भोजन में बेहद चाव से खाया जाता है। जब इसे खिले-खिले उबले चावल या ताजी गर्मागर्म रोटियों के साथ थाली में परोसा जाता है, तो यह साधारण भोजन को भी खास बना देती है। इसकी लोकप्रियता की सबसे मुख्य वजह इसका खट्टा-नमकीन स्वाद और आसानी से पचने की खूबी है, जो हर उम्र के लोगों को लुभाती है।

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घोल की सही तैयारी है बेहतरीन स्वाद का पहला रहस्य

एक लाजवाब कढ़ी बनाने की बुनियाद उसके घोल पर टिकी होती है। अगर घोल ठीक से नहीं बनेगा, तो पकने के बाद कढ़ी का स्वाद और बनावट दोनों बिगड़ सकते हैं। घोल तैयार करने के लिए सबसे पहले एक खुले और गहरे बर्तन में ताजा या हल्का खट्टा दही निकालें। इस दही को मथनी या कांटे की मदद से तब तक फेंटें जब तक कि वह पूरी तरह एकसार और चिकना न हो जाए। इसके बाद इसमें नाप के अनुसार बेसन मिलाएं और धीरे-धीरे सामान्य पानी डालते हुए मिलाते जाएं। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा सावधानी इस बात की रखनी होती है कि मिश्रण में बेसन की एक भी गांठ न बचने पाए। अगर घोल में बेसन की गुठलियां रह जाती हैं, तो कढ़ी पकाते समय वे कठोर हो जाती हैं और खाते वक्त मुंह में आकर पूरा स्वाद खराब कर देती हैं।

मुलायम और करारी पकौड़ियां तैयार करने का तरीका

कढ़ी को अधिक समृद्ध और स्वादिष्ट बनाने के लिए उसमें पकौड़ियां शामिल की जाती हैं। पकौड़ी का मिश्रण तैयार करने के लिए एक अलग कटोरे में बेसन लें। अब इसमें स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए बारीक कटा हुआ प्याज, कटी हुई हरी मिर्च, ताजा हरा धनिया, स्वादानुसार नमक, लाल मिर्च पाउडर और थोड़ा सा अजवाइन हाथ से मसलकर डालें। इसके बाद थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाते हुए मध्यम गाढ़ा घोल तैयार करें। ध्यान रखें कि पकौड़ी का घोल न तो बहुत ज्यादा पतला होना चाहिए और न ही अत्यधिक सख्त। एक कड़ाही में पर्याप्त तेल गर्म करें और तेल के सही तापमान पर आते ही चम्मच या हाथ से छोटी-छोटी पकौड़ियां कड़ाही में छोड़ें। इन पकौड़ियों को हमेशा मध्यम आंच पर ही सुनहरा होने तक तलना चाहिए। यदि आंच बहुत तेज होगी तो पकौड़ियां बाहर से तो तुरंत लाल हो जाएंगी, लेकिन भीतर से बेसन कच्चा रह जाएगा।

धीमी आंच पर कढ़ी पकाने और तड़का लगाने की प्रक्रिया

कढ़ी को छौंकने के लिए एक भारी तले वाले बड़े बर्तन में थोड़ा सा तेल या देसी घी गर्म करें। जब घी अच्छी तरह गर्म हो जाए, तो इसमें जीरा और राई के दाने चटकाएं। इसके तुरंत बाद एक चुटकी हींग, कटी हरी मिर्च और बारीक घिसा अदरक डालकर हल्का सा भून लें। अपनी पसंद के अनुसार इसमें खुशबूदार करी पत्ता भी मिलाया जा सकता है। मसालों की महक उठते ही पहले से तैयार दही और बेसन का पतला घोल बर्तन में धीरे-धीरे डालें। घोल डालते समय करछुल को लगातार चलाते रहना सबसे अनिवार्य नियम है। शुरुआत में बिना रुके चलाने से दही के फटने का डर नहीं रहता और बेसन भी बर्तन के तले में चिपकने से बच जाता है। इसके बाद जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त पानी डालकर आंच को मध्यम कर दें और कढ़ी को उबलने दें।

कच्चेपन की महक दूर करना और अंतिम बघार

कढ़ी का असली जायका तभी निखरता है जब उसे धीमी और मध्यम आंच पर काफी देर तक पकाया जाए। जैसे-जैसे कढ़ी उबलती है, इसका गाढ़ापन और रंग दोनों बदलने लगते हैं। बेसन के कच्चेपन की गंध पूरी तरह खत्म होने तक इसे बीच-बीच में चलाते रहना जरूरी है। जब कढ़ी अच्छी तरह पक जाए, तब इसमें पहले से तली हुई पकौड़ियां डाल दें। पकौड़ियां डालने के बाद मिश्रण को कुछ मिनट तक धीमी आंच पर और पकने दें ताकि पकौड़ियां कढ़ी के रस और खटास को अपने भीतर पूरी तरह सोखकर बेहद नरम हो जाएं। इसके बाद कढ़ी के अंतिम स्वाद को चरम पर पहुंचाने के लिए ऊपर से एक विशेष तड़का लगाया जाता है। इसके लिए एक छोटे पैन में शुद्ध घी या तेल गर्म करके उसमें जीरा, राई, साबुत सूखी लाल मिर्च और चुटकी भर हींग चटकाकर कढ़ी के ऊपर डालें। हिमांशी तिवारी के अनुसार, कढ़ी की सबसे बड़ी खूबी इसका लचीलापन है, जिसे परिवार की पसंद के मुताबिक आसानी से ढाला जा सकता है, चाहे किसी को अधिक खट्टापन पसंद हो या फिर हल्का खट्टा स्वाद।

सवाल-जवाब

कढ़ी बनाने के लिए किस तरह का दही सबसे अच्छा माना जाता है?
कढ़ी के लिए हल्का खट्टा दही सबसे उपयुक्त होता है, क्योंकि इससे कढ़ी में पारंपरिक चटपटा और संतुलित स्वाद आता है।
दही और बेसन का घोल बनाते समय गांठों से कैसे बचें?
पहले दही को अच्छी तरह फेंटें और फिर बेसन मिलाकर धीरे-धीरे पानी डालते हुए लगातार चलाएं ताकि कोई गुठली न बने।
कढ़ी पकाते समय दही फटने से रोकने के लिए क्या करना चाहिए?
घोल को गर्म बर्तन में डालने के बाद जब तक उसमें पहला उबाल न आ जाए, तब तक उसे बिना रुके लगातार चलाते रहें।
पकौड़ियों को अंदर तक अच्छी तरह पकाने की सही विधि क्या है?
पकौड़ियों को हमेशा मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक तलें, क्योंकि तेज आंच पर वे बाहर से पक जाती हैं लेकिन अंदर से कच्ची रह जाती हैं।
कढ़ी में अंतिम तड़के के लिए कौन से मसालों का उपयोग किया जाता है?
अंतिम तड़के के लिए गर्म घी या तेल में जीरा, राई, सूखी लाल मिर्च और हींग का इस्तेमाल किया जाता है।
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