भारतीय रसोई में कटहल को अक्सर एक लजीज सब्जी के रूप में पकाया जाता है, परंतु इसका बना मसालेदार अचार भोजन के हर निवाले का जायका दोगुना कर देता है. अमूमन लोग इसे घर पर तैयार करने से कतराते हैं, क्योंकि काटते वक्त इसका गाढ़ा चिपचिपा रस हाथों और बर्तनों में बुरी तरह चिपक जाता है. पचास वर्षों से अचार तैयार करने का गहन अनुभव रखने वाली मोना चावला का मानना है कि यदि कुछ बुनियादी सावधानियों और सही अनुपात का पालन किया जाए, तो यह पारंपरिक व्यंजन सरलता से तैयार हो सकता है और पूरे साल खराब हुए बिना अपनी ताजगी बनाए रखता है.
सही कटहल का चुनाव और काटने की तैयारी
एक बेहतरीन अचार की बुनियाद फल की गुणवत्ता पर निर्भर करती है. मोना चावला का सुझाव है कि इस काम के लिए केवल कच्चा और बिल्कुल ताजा कटहल ही चुना जाना चाहिए. यदि फल थोड़ा भी पक गया हो या उसमें मिठास आ गई हो, तो वह अचार के लायक नहीं रहता. तैयारी के दौरान सबसे पहले एक तेज धार वाले चाकू की मदद से कटहल के बाहरी नुकीले और सख्त कांटेदार छिलके को पूरी तरह छीलकर अलग कर देना चाहिए. इसके उपरांत भीतरी कड़े मध्य भाग यानी कोर को काटकर बाहर फेंक दें और गूदे वाले हिस्से को मध्यम आकार के चौकोर टुकड़ों में काट लें.
दूध के चिपचिपेपन से छुटकारा और नमी सुखाने की तकनीक
सब्जी या अचार के लिए कटहल काटते समय सबसे बड़ी उलझन उससे निकलने वाला सफेद चिपचिपा दूध होता है. यह हाथों की त्वचा और चाकू के फलक पर जम जाता है, जिसे साधारण पानी से छुड़ाना बेहद कठिन होता है. इस झंझट से बचने का सबसे सरल उपाय यह है कि काम शुरू करने से ठीक पहले अपनी हथेलियों और चाकू पर थोड़ा सा शुद्ध सरसों का तेल अच्छी तरह मल लें. तेल की यह चिकनी परत रस को चिपकने नहीं देती और कटाई का काम बहुत आसान हो जाता है. इसके साथ ही मोना चावला चेतावनी देती हैं कि कटे हुए टुकड़ों को पानी से कतई नहीं धोना चाहिए. इसके स्थान पर टुकड़ों को कुछ समय के लिए खुली तेज धूप में फैलाकर सुखा लें ताकि प्राकृतिक नमी उड़ जाए. यदि अचार में तनिक भी अतिरिक्त पानी या सीलन रह जाए, तो उसमें फफूंद लगने और सड़ने का खतरा बना रहता है.
कच्चे आम का जादू और मसालों का सही नाप
इस पूरी रेसिपी का सबसे अहम और गुप्त नुस्खा कच्चे आम का इस्तेमाल है. उदाहरण के तौर पर, यदि पांच किलोग्राम कटहल का प्रबंध किया जा रहा है, तो उसमें करीब ढाई किलोग्राम कच्चा आम कद्दूकस करके मिलाया जाना चाहिए. छोटे पैमाने पर, एक किलो कच्चे कटहल के लिए लगभग 500 ग्राम कद्दूकस किया हुआ कच्चा आम पर्याप्त होता है. आम की स्वाभाविक खटास न केवल तीखेपन को संतुलित करती है, बल्कि इसके रेशों को शीघ्रता से गलाने का प्राकृतिक काम भी करती है.
एक किलो कटहल के अनुपात के अनुसार जरूरी सामग्रियों का ब्योरा इस प्रकार है
- करीब 250 ग्राम शुद्ध सरसों का तेल
- 4 बड़े चम्मच पीली या काली राई
- 3 बड़े चम्मच मोटी सौंफ
- 2 बड़े चम्मच साबुत मेथी दाना
- 1 बड़ा चम्मच कलौंजी
- 2 बड़े चम्मच पिसी हल्दी पाउडर
- 2 बड़े चम्मच तीखी लाल मिर्च पाउडर
- स्वादानुसार सादा नमक
- 3 से 4 बड़े चम्मच सिरका, जो खटास और टिकाऊपन दोनों को बढ़ाता है
मसाले तैयार करने का तरीका और जार में भरने की विधि
मोना चावला अचार के लिए खड़े मसालों को घर में ही पीसकर मिश्रण बनाना पसंद करती हैं, यद्यपि व्यस्तता होने पर बाजार का तैयार अचार मसाला भी काम में लाया जा सकता है. यदि घर पर मसाला बना रहे हैं, तो राई, सौंफ, मेथी दाना और कलौंजी को दरदरा तैयार करके उसमें हल्दी और लाल मिर्च पाउडर मिला लें. इसके बाद धूप में सूखे कटहल के टुकड़ों पर कद्दूकस किया आम, नमक और तैयार पिसे मसाले डालकर अच्छी तरह मिलाएं ताकि प्रत्येक टुकड़े पर मसाले की परत चढ़ जाए. इसके पश्चात ऊपर से सरसों का तेल डालें और पूरी सामग्री को उलट-पुलट कर एकसार कर लें. सबसे अंत में तीन से चार चम्मच सिरका मिलाएं और पूरे मिश्रण को एकदम साफ तथा सूखे कांच या चीनी मिट्टी के जार में सुरक्षित रख दें. कच्चे आम के इस योग से कटहल बहुत जल्दी गलकर खाने योग्य बन जाता है और महीनों तक अपनी लज्जत बनाए रखता है.



















