भारत चौथी बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए तैयार है। यह 18वां ब्रिक्स सम्मेलन कई मायनों में बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि लगभग 10 वर्षों के अंतराल के बाद भारत की धरती पर दुनिया की तीन प्रमुख महाशक्तियां भारत, रूस और चीन एक साथ मंच साझा करती दिखेंगी। इससे पहले वर्ष 2016 में गोवा में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान इन तीनों देशों के शीर्ष नेता एक साथ उपस्थित हुए थे। एक दशक पहले जहां इस समूह में केवल 5 सदस्य देश शामिल थे, वहीं अब इसका विस्तार हो चुका है और इसमें इंडोनेशिया, इथियोपिया, मिस्र, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात तथा सऊदी अरब भी जुड़ चुके हैं। इन तमाम वैश्विक प्रतिनिधियों और राष्ट्राध्यक्षों के शानदार स्वागत के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं, जिसमें भारतीय खानपान की समृद्ध परंपरा को प्रदर्शित करने की विशेष योजना बनाई गई है।
फूड मेन्यू तय करने की विशेष प्रोटोकॉल व्यवस्था
एक अंतरराष्ट्रीय मेजबान के रूप में भारत का पूरा प्रयास है कि विदेशी प्रतिनिधियों को उनकी व्यक्तिगत पसंद के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पारंपरिक भारतीय व्यंजनों का अनूठा स्वाद भी चखाया जाए। विदेशी अतिथियों के लिए तैयार किए जाने वाले पूरे मेन्यू में उनकी पसंद, शुद्धता, खाद्य एलर्जी और आहार संबंधी प्राथमिकताओं का बारीकी से ध्यान रखा जाता है। इतने विशाल स्तर के कूटनीतिक आयोजन में भोजन की सूची तय करने का दायित्व प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय और विशेष रूप से गठित प्रोटोकॉल समितियों के पास होता है।
यह विशेष प्रोटोकॉल समितियां पिछले 2 से 3 महीनों से लगातार मेन्यू की योजना पर काम कर रही हैं ताकि किसी भी स्तर पर कोई कमी न रहे। इस बार का संपूर्ण फूड प्लान 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, को-ऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' की थीम और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें राष्ट्राध्यक्षों के साथ-साथ उनके पूरे प्रतिनिधिमंडल के हर सदस्य की व्यक्तिगत पसंद और स्वास्थ्यगत जरूरतों का पूरा ब्योरा शामिल किया गया है।
नाश्ते में मोटे अनाज और पारंपरिक पेय
इस सम्मेलन की भोजन सूची में उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक के चुनिंदा प्रांतीय व्यंजनों को शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में जिन मोटे अनाजों यानी 'श्रीअन्न' का उल्लेख किया था, वे इस बार वैश्विक नेताओं की थाली का प्रमुख आकर्षण बनेंगे। विदेशी मेहमानों के भोजन में रागी, ज्वार और बाजरे से बने कई पौष्टिक व्यंजन शामिल किए गए हैं।
सुबह के नाश्ते में प्रतिनिधियों को रागी डोसा, बाजरा उपमा और मिलेट पोंगल जैसे पारंपरिक पौष्टिक विकल्प परोसे जाएंगे। इसके साथ ही प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में पारंपरिक देसी छाछ और नारियल पानी की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा थाली में राजस्थानी, गुजराती और दक्षिण भारतीय क्षेत्रीय खानपान के प्रामाणिक स्वाद को भी शामिल किया जाएगा।
शाही दस्तरखान और प्रमुख क्षेत्रीय व्यंजन
व्यंजनों में विविधता बनाए रखने के लिए उत्तर और दक्षिण भारत के कई प्रसिद्ध पकवानों को शामिल किया गया है। इनमें उत्तर भारत का लोकप्रिय कश्मीरी पुलाव, दक्कनी तड़का, हैदराबादी वेज और नॉन-वेज बिरयानी तथा पारंपरिक दक्षिण भारतीय स्ट्यू शामिल हैं।
मेन्यू का निर्धारण करते समय नेताओं की धार्मिक मान्यताओं और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं का भी पूरी तरह सम्मान किया गया है, जिसके तहत शाकाहारी और मांसाहारी दोनों वर्गों के लिए सख्त मानकों के अनुसार भोजन पकाया जाएगा। विदेशी प्रतिनिधियों के लिए अवधी कबाब, तंदूरी व्यंजन और धीमी आंच पर तैयार की जाने वाली खास भारतीय तरीदार ग्रेवी डिशेज का प्रबंध किया गया है।
भारत मंडपम में भव्य गाला डिनर
इस तीन दिवसीय सम्मेलन के व्यस्त कार्यक्रम और गहन बैठकों के बाद शनिवार शाम 7:00 बजे भारत मंडपम में एक विशेष गाला डिनर का आयोजन तय किया गया है। इस भव्य रात्रिभोज की मेजबानी विदेश मंत्री एस. जयशंकर करेंगे। इस विशेष डिनर में ब्रिक्स सदस्य देशों के विदेश मंत्री और वरिष्ठ राजनयिक अधिकारी शामिल होंगे, जहां वे एक अनौपचारिक और आत्मीय माहौल में भारतीय व्यंजनों का लुत्फ उठाते हुए महत्वपूर्ण कूटनीतिक चर्चाओं को आगे बढ़ाएंगे।



















