जापान का केंद्रीय बैंक अगले सप्ताह अपनी प्रमुख उधारी दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इस संभावित नीतिगत बदलाव के बीच मुद्रा विनिमय बाजार में जापानी येन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 154.40 के स्तर के करीब लगभग स्थिर कारोबार करता नजर आया। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक दायित्व देश में बैंक नोट जारी करना और कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मुद्रा व मौद्रिक नियंत्रण का संचालन करना है। जापान में मौद्रिक प्राधिकरण का आधिकारिक मुद्रास्फीति लक्ष्य लगभग 2 प्रतिशत निर्धारित है, जिसे साधने के लिए अब दरों में नए सिरे से समायोजन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
अल्ट्रा-लूज मौद्रिक नीति का ऐतिहासिक सफर और बदलाव
जापान की अर्थव्यवस्था को मंदी के दौर से निकालने और सुस्त मुद्रास्फीति वाले माहौल में महंगाई को गति देने के मकसद से बैंक ऑफ जापान ने वर्ष 2013 में अत्यधिक उदार यानी अल्ट्रा-लूज मौद्रिक नीति की शुरुआत की थी। इस नीतिगत ढांचे का मुख्य आधार मात्रात्मक और गुणात्मक सुगमता (क्यूक्यूई) था, जिसके तहत बाजार में नकदी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए नए नोट जारी कर सरकारी प्रतिभूतियों और कॉरपोरेट बॉन्ड जैसी संपत्तियों की व्यापक खरीद की जाती थी। इस नीति का उद्देश्य वित्तीय प्रणाली में सस्ती पूंजी का प्रवाह निरंतर बनाए रखना था ताकि व्यावसायिक गतिविधियों और घरेलू मांग को बढ़ावा मिल सके।
साल 2016 में केंद्रीय बैंक ने अपनी इस रणनीति को और अधिक आक्रामक बनाते हुए मौद्रिक ढील को विस्तार दिया। इसके तहत सबसे पहले नकारात्मक ब्याज दरें लागू की गईं और इसके बाद 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड के यील्ड को सीधे तौर पर नियंत्रित करने की व्यवस्था शुरू की गई। कई वर्षों तक चले इस अभूतपूर्व प्रयोग के बाद, मार्च 2024 में बैंक ऑफ जापान ने आखिरकार अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी। इस ऐतिहासिक कदम के जरिए बैंक ने वर्षों पुरानी अल्ट्रा-लूज मौद्रिक नीति से अपने कदम पूरी तरह पीछे खींचने का स्पष्ट संकेत दिया था।
येन की चाल और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के बीच नीतिगत अंतर
केंद्रीय बैंक के व्यापक प्रोत्साहन पैकेजों का सीधा असर जापानी मुद्रा पर पड़ा और येन अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में लगातार कमजोर होता चला गया। वर्ष 2022 और 2023 के दौरान यह स्थिति और अधिक गंभीर रूप ले चुकी थी, क्योंकि दुनिया भर के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंक दशकों की सबसे भीषण महंगाई से निपटने के लिए आक्रामक रूप से ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी कर रहे थे। जबकि बैंक ऑफ जापान अपनी शून्य से नीचे या बेहद ढीली दरों पर टिका रहा।
बैंक ऑफ जापान और दुनिया के अन्य प्रमुख नीति निर्धारकों के बीच पैदा हुए इस नीतिगत अंतर के चलते जापानी परिसंपत्तियों और विदेशी परिसंपत्तियों के यील्ड में बड़ा अंतर आ गया। इस अंतर ने येन के मूल्य को भारी दबाव में धकेल दिया। हालांकि, वर्ष 2024 में यह गिरावट का दौर आंशिक रूप से पलट गया, जब बैंक ऑफ जापान ने औपचारिक तौर पर अपनी अत्यधिक उदार नीतिगत स्थिति को त्यागने और ब्याज दरों को सकारात्मक दायरे में लाने का कड़ा निर्णय लिया।
जापान में मुद्रास्फीति के कारक और हालिया आंकड़े
जापान में घरेलू मुद्रास्फीति के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकलने के पीछे कई प्रमुख वजहें रहीं। कमजोर येन के कारण आयातित वस्तुओं, विशेष रूप से ऊर्जा और कच्चे माल की लागत में भारी उछाल आया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में आए तेज झटके ने भी स्थानीय स्तर पर मूल्य वृद्धि को हवा दी। देश में वेतन वृद्धि की मजबूत होती संभावनाएं मुद्रास्फीति को गति देने वाला दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कारक बनकर उभरी हैं, जिसके चलते केंद्रीय बैंक को दरों को और सामान्य करने के लिए अनुकूल माहौल मिला।
हालिया कारोबारी सत्र में निर्माता मूल्य सूचकांक (पीपीआई) के तेज आंकड़ों ने बैंक ऑफ जापान द्वारा सख्त मौद्रिक रुख अपनाने की संभावनाओं को और पुख्ता कर दिया है। इन मजबूत आंकड़ों के बाद जापानी येन को नया समर्थन मिला, जिससे शुक्रवार को एशियाई कारोबारी सत्र में डॉलर के मुकाबले येन 154.00 के निचले स्तरों की ओर खिसकते हुए मजबूत स्थिति में दिखा। हालांकि, अमेरिकी डॉलर द्वारा अपनी बढ़त को बनाए रखने के कारण येन की मजबूती पर एक सीमा भी देखने को मिली।
अन्य वैश्विक मुद्राओं पर असर और आगामी अमेरिकी डेटा का इंतजार
मुद्रा बाजार के अन्य क्षेत्रों में, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7100 के मध्य स्तर के करीब टिकता दिखा। इससे पहले पिछले कारोबारी दिन इसमें एक सप्ताह से अधिक के निचले स्तर तक तेज गिरावट दर्ज की गई थी। गुरुवार को आए अगस्त पीपीआई के आंकड़ों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को नया बल दिया था, जिससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ और अन्य मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया था।
रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) की ओर से सख्त नीतिगत कदमों की अपेक्षाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की इस गिरावट को सीमित करने में मदद की। अब वैश्विक मुद्रा बाजार के निवेशक कोई भी नया दांव लगाने से पहले आने वाले अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। इन आंकड़ों से ही यह स्पष्ट होगा कि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों की दिशा आने वाले महीनों में क्या रुख अख्तियार करने जा रही है।



















