झारखंड के देवघर में नॉन-वेज के शौकीनों के लिए एक नया और बेहद लोकप्रिय ठिकाना उभरकर सामने आया है। देवघर जिला मुख्यालय से तकरीबन 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने कुछ छोटे-छोटे ढाबे और दुकानें सजती हैं। दिखने में बेहद सामान्य लगने वाले ये ढाबे आज अपने लाजवाब स्वाद के कारण दूर-दूर से लोगों को अपनी तरफ खींच रहे हैं। इन दुकानों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां ग्राहकों को पूरी तरह से ताजा और उनकी पसंद के अनुसार बना हुआ चिकन और मटन परोसा जाता है। अगर आप यहां पहुंचने से पहले फोन पर अपना ऑर्डर दे देते हैं, तो महज आधे घंटे के भीतर आपके लिए गरमा-गरम भोजन तैयार कर दिया जाता है।
ऑर्डर पर तैयार होता है ताजा भोजन
TrendKia से बातचीत के दौरान इन दुकानों में से एक के संचालक शुभम मंडल ने बताया कि उनके यहां केवल देवघर शहर के ही नहीं, बल्कि जिले के सुदूर ब्लॉकों और गांवों से भी लोग स्वाद का आनंद लेने आते हैं। कई ग्राहक तो ऐसे हैं जो हर हफ्ते यहां आना पसंद करते हैं। शुभम मंडल के मुताबिक, यहां चिकन बनाने के लिए प्रति किलो लगभग 150 रुपये का शुल्क लिया जाता है। कम दाम में बेहतरीन स्वाद और विश्वसनीयता मिलने के कारण इन ढाबों पर ग्राहकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। बड़े होटलों और रेस्टोरेंट के मुकाबले बेहद कम बजट में भरपेट और स्वादिष्ट भोजन मिलना इस जगह की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण है।
देसी मसालों और खुली हवा का अनूठा अनुभव
सड़क किनारे बने इन ढाबों पर मिलने वाले नॉन-वेज का असली राज इसके देसी मसालों के संतुलन में छिपा है। यहां मसालों को इस तरह तैयार किया जाता है कि खाने वाले उंगलियां चाटते रह जाते हैं। कई ग्राहक खुद अपनी पसंद का कच्चा चिकन बाजार से खरीदकर लाते हैं और उसे अपनी पसंद के मसालों, शुद्ध घी या फिर तीखे सरसों के तेल में पकवाते हैं। खुले आसमान के नीचे, ग्रामीण परिवेश और बहती हवा के बीच दोस्तों के साथ बैठकर ताजे बने भोजन का लुत्फ उठाना लोगों को एक अलग ही तरह का सुकून देता है।
वीकेंड पर उमड़ती है सबसे ज्यादा भीड़
दोपहर ढलते ही इस पूरे इलाके का नजारा बदलने लगता है और शाम होते-होते दुकानों पर ग्राहकों का तांता लग जाता है। कभी-कभी तो ऑर्डर पाने के लिए लोगों को लंबी कतारों में भी इंतजार करना पड़ता है। वैसे तो यहां पूरे हफ्ते ही लोग आते हैं, लेकिन शनिवार और रविवार को यहां जबरदस्त भीड़ देखने को मिलती है। इसका मुख्य कारण यह है कि छुट्टी के दिनों में लोग पुनासी डैम और आसपास के अन्य खूबसूरत पर्यटन स्थलों की सैर करने निकलते हैं। घूमकर वापस लौटते समय वे इन ढाबों पर रुककर स्वादिष्ट चिकन और मटन का स्वाद लेना नहीं भूलते। कई लोग तो बकायदा पूरे परिवार के साथ यहां आने का प्लान बनाते हैं।
सोशल मीडिया से मिली नई पहचान
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कुछ साल पहले तक इस जगह के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी थी। लेकिन समय के साथ इसकी लोकप्रियता देवघर से निकलकर जसीडीह, मधुपुर, सारठ और आसपास के तमाम इलाकों में फैल गई। इसमें सोशल मीडिया और लोगों के आपसी सुझावों ने बेहद अहम भूमिका निभाई है। अगर आप भी देवघर में हैं और कम खर्च में असली देसी स्वाद का अनुभव करना चाहते हैं, तो कृषि विज्ञान केंद्र के सामने बने ये ढाबे आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं।













