नवरात्रि के नौ दिनों के उपवास के दौरान अक्सर लोग हर दिन एक ही तरह का फलाहार खाकर ऊब जाते हैं और किसी नए स्वाद की तलाश में रहते हैं। ऐसे में लौकी और कुट्टू के आटे से तैयार किया गया चीला एक बेहतरीन, हल्का और जायकेदार विकल्प साबित होता है। यह व्यंजन न केवल बहुत कम समय में सरलता से बन जाता है, बल्कि इसे सुबह के नाश्ते या शाम के हल्के भोजन के रूप में भी चाव से खाया जा सकता है। इसे पकाने के लिए किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाली सभी चीजें रसोई में पहले से मौजूद होती हैं। इसके अलावा, यदि उपवास के दिनों में घर पर कोई मेहमान आ जाए, तो उन्हें भी यह गरमा-गरम चीला परोसना एक शानदार विचार है।
रसोई में मौजूद सामान्य सामग्री से तैयार होता है यह व्यंजन
धौलपुर की गृहिणी प्रभा शर्मा के अनुसार, लौकी और कुट्टू के आटे का चीला तैयार करने की विधि बेहद सरल है और इसके लिए बहुत सीमित सामग्री की आवश्यकता होती है। इसे बनाने के लिए मुख्य रूप से ताजी लौकी, कुट्टू का आटा, सेंधा नमक, पिसी हुई काली मिर्च और थोड़ा सा शुद्ध घी चाहिए होता है। तैयारी शुरू करते समय सबसे पहले ताजी लौकी का छिलका उतार लें। छीलने के बाद लौकी को चार टुकड़ों में काटें और फिर उसे साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके उपरांत, इन टुकड़ों को कद्दूकस करके एक साफ कटोरे में अलग रख लें।
घोल तैयार करने का सही तरीका
चीले के लिए चिकना घोल तैयार करने के लिए एक दूसरे गहरे बर्तन में चार चम्मच कुट्टू का आटा निकालें। इस आटे में थोड़ा-थोड़ा करके पानी मिलाएं और इसे लगातार चलाते रहें, ताकि आटे की सारी गुठलियां पूरी तरह खत्म हो जाएं और एक समान घोल बन सके। इसके बाद, इसी कुट्टू के आटे वाले बर्तन में पहले से कद्दूकस करके रखी गई लौकी मिला दें। मिश्रण की बनावट संतुलित रखने के लिए आवश्यकतानुसार थोड़ा सा पानी और जोड़ें। इस दौरान यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि यह बैटर न तो बहुत अधिक गाढ़ा बने और न ही बहुत ज्यादा पतला बहे। अंत में इस घोल में अपने स्वादानुसार सेंधा नमक और काली मिर्च पाउडर डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह फेंट लें।
तवे पर सेंकने की विधि और जरूरी सावधानियां
घोल तैयार हो जाने के बाद गैस का चूल्हा जलाएं और उस पर तवा गर्म होने के लिए रख दें। जब तवा ठीक से गर्म हो जाए, तब उसकी सतह पर थोड़ा सा घी चारों तरफ फैलाएं। इसके बाद एक बड़े चम्मच की मदद से तैयार मिश्रण को तवे के बीच में डालें और हल्के हाथों से गोल आकार देते हुए फैलाएं। चीले को हमेशा धीमी या मध्यम आंच पर ही पकाना चाहिए, ताकि वह अंदर तक अच्छी तरह सिक जाए और कच्चा न रहे। जब निचली सतह सुनहरी होकर तवा छोड़ने लगे, तब सावधानी से चीले को पलट दें और दूसरी तरफ भी हल्का घी लगाकर अच्छी तरह सेंक लें।
स्वाद के साथ सेहत के लिए भी है गुणकारी
जब चीला दोनों तरफ से पूरी तरह सिक कर सुनहरा और कुरकुरा हो जाए, तब उसे तवे से उतार लें। गृहिणी प्रभा शर्मा बताती हैं कि लौकी और कुट्टू का यह चीला जितना खाने में स्वादिष्ट लगता है, सेहत के लिहाज से उतना ही पौष्टिक भी होता है। इसे घर पर कोई भी बड़ी आसानी से बना सकता है। व्रत रखने वाले परिवार के लोग इसे सुबह की शुरुआत में या फिर शाम के फलाहार के रूप में खा सकते हैं। इसके साथ ही, उपवास के दौरान अचानक घर पधारे व्रतधारी मेहमानों का आदर-सत्कार करने के लिए भी यह एक झटपट बनने वाला लाजवाब फलाहार है।



















