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बिहार के राजकीय पक्षी को समर्पित पटना का अनूठा पंडाल, 1000 कृत्रिम गौरैया और घोंसलों के बीच होगा मां दुर्गा का पूजनभारत
15 अक्तू॰ 2026, 8:46 am (1 घंटे पहले)· 1

बिहार के राजकीय पक्षी को समर्पित पटना का अनूठा पंडाल, 1000 कृत्रिम गौरैया और घोंसलों के बीच होगा मां दुर्गा का पूजन

पटना के भीखना पहाड़ी में कचहरी गली के पूजा पंडाल को विशाल घोंसले का रूप दिया गया है, जहां पर्यावरण और गौरैया संरक्षण का संदेश देने के लिए 1000 कृत्रिम चिड़िया और घोंसले लगाए गए हैं।

बिहार की राजधानी पटना में इस बार दुर्गा पूजा के मौके पर श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ पर्यावरण चेतना का एक अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। शहर के भीखना पहाड़ी इलाके की कचहरी गली में एक ऐसा पूजा पंडाल तैयार किया गया है, जो पहली नजर में किसी विशाल प्राकृतिक घोंसले की तरह दिखाई देता है। संकरी गली में स्थित होने के बावजूद अपनी अद्भुत सजावट और कल्पनाशीलता के कारण यह पंडाल राजधानी के बड़े और भव्य पंडालों को कड़ी टक्कर दे रहा है। इस वर्ष समिति ने अपनी पूरी सजावट बिहार के राजकीय पक्षी गौरैया के संरक्षण पर केंद्रित रखी है, ताकि दर्शन करने आने वाले लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक हो सकें।

1000 घोंसले और कृत्रिम गौरैया से संवारी गई प्राकृतिक छटा

इस पंडाल का मुख्य आकर्षण इसकी प्राकृतिक और जीवंत बनावट है। कारीगरों ने बाहरी आवरण से लेकर गर्भगृह के अंदरूनी हिस्से तक ऐसी नक्काशी और संरचना तैयार की है कि पूरा परिसर एक विशाल प्राकृतिक घोंसले जैसा प्रतीत होता है। इस विशेष माहौल को बनाने के लिए लगभग 1000 कृत्रिम घोंसले और 1000 कृत्रिम गौरैया तैयार कर पूरे परिसर में स्थापित की गई हैं। हरी पत्तियों, टहनियों और शाखाओं के सुंदर संयोजन से पंडाल को एक घने बगीचे का स्वरूप दिया गया है। लटके हुए घोंसलों और गौरैया की मूर्तियों में की गई आकर्षक लाइटिंग रात के समय इस पूरे दृश्य को बेहद मनमोहक बना देती है।

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घरों के आंगन से गायब होती गौरैया को बचाने का संकल्प

पूजा आयोजकों के अनुसार, गौरैया थीम चुनने के पीछे एक गहरा सामाजिक और पर्यावरणीय मकसद छिपा है। एक समय था जब यह नन्हीं चिड़िया हर घर, आंगन, बरामदे और छत पर आम तौर पर फुदकती नजर आती थी। बदलते पर्यावरण, शहरीकरण और विभिन्न मानवीय कारणों से अब कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में गौरैया की तादाद काफी कम हो गई है। लोगों का ध्यान इस लुप्तप्राय स्थिति की तरफ खींचने के लिए समिति ने इसे मुख्य विषय बनाया, ताकि श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन के साथ प्रकृति और पक्षी संरक्षण का संकल्प लेकर लौटें।

1985 से जारी है बच्चों की समिति का यह रचनात्मक सफर

भीखना पहाड़ी की इस जगह पर दुर्गा पूजा का आयोजन कोई नया नहीं है, बल्कि यहां वर्ष 1985 से लगातार पूजनोत्सव हो रहा है। करीब चार दशकों से यह स्थान स्थानीय निवासियों की आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है। इस पूरे आयोजन की सबसे रोचक बात यह है कि इसका प्रबंधन श्री श्री भारत माता पूजा समिति की बाल मंडली संस्था करती है, जिसमें मुख्य रूप से बच्चे और किशोर जुड़े हुए हैं। बाल मंडली के सदस्य आरव राज ने इस अनूठे प्रयास की जानकारी देते हुए बताया कि उनकी समिति हर साल एक नई और अलग थीम के जरिए श्रद्धालुओं के सामने कुछ नया पेश करने की कोशिश करती है।

रिंग लाइट से लेकर पत्तों और जंगल की पुरानी थीम

इस पूजा स्थल की परंपरा हमेशा से लीक से हटकर सोचने की रही है। पिछले वर्षों के आयोजनों पर नजर डालें तो बीते साल यहां आधुनिक रिंग लाइट पर आधारित भव्य थीम रखी गई थी। उससे पिछले साल प्राकृतिक पत्तों की कलाकारी से पंडाल को सजाया गया था, जबकि उससे पूर्व जंगल की थीम पर आधारित संरचना तैयार की गई थी। इस बार गौरैया को केंद्र में रखकर बनाई गई यह कलाकृति श्रद्धालुओं को अपनी पुरानी यादों से जोड़ने के साथ साथ प्रकृति के प्रति संवेदनशील भी बना रही है। जो भी श्रद्धालु इस अनूठे पंडाल को देखना चाहते हैं, वे भीखना पहाड़ी की कचहरी गली पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन और इस पर्यावरण संदेश के साक्षी बन सकते हैं।

सवाल-जवाब

पटना में यह घोंसला नुमा अनोखा पंडाल कहां स्थित है?
यह पंडाल पटना के भीखना पहाड़ी स्थित कचहरी गली में तैयार किया गया है।
इस पंडाल को सजाने के लिए किन चीजों का इस्तेमाल किया गया है?
पंडाल को सजाने के लिए लगभग 1000 कृत्रिम घोंसले, 1000 कृत्रिम गौरैया, पत्तियां और टहनियां लगाई गई हैं।
इस वर्ष पंडाल की थीम किस पक्षी पर आधारित है?
इस वर्ष पंडाल की थीम बिहार के राजकीय पक्षी गौरैया के संरक्षण पर आधारित है।
इस पूजा पंडाल का आयोजन कौन सी समिति करती है?
इसका आयोजन श्री श्री भारत माता पूजा समिति की बाल मंडली संस्था द्वारा किया जाता है।
भीखना पहाड़ी में इस दुर्गा पूजा का आयोजन किस वर्ष से हो रहा है?
यहां वर्ष 1985 से लगातार दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है।
पिछले वर्षों में इस पंडाल की कौन-कौन सी थीम रही हैं?
पिछले वर्ष रिंग लाइट थीम थी, जबकि उससे पहले पत्तों से और उससे भी पहले जंगल की थीम पर पंडाल सजाया गया था।
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टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·19 मिनट पहले

गौरैया बचाने का आइडिया तो गजब है, बच्चों ने दिल जीत लिया! पर क्या ये सारे कृत्रिम घोंसले और चिड़िया पूजा खत्म होने के बाद संभाल कर रखे जाएंगे या कचरा बन जाएंगे?

Ravikash Gupta@ravikash·37 मिनट पहले

पंडाल सुंदर है पर सच में गौरैया बचेंगी क्या इससे? आजकल की भीड़भाड़ में ऐसी सजावट से पक्षी कहां लौटेंगे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·36 मिनट पहले

रविकेश जी, सही बात है। बाल मंडली के इन बच्चों ने सोच अच्छी रखी है, कम से कम किसी ने गौरैया की याद तो दिलाई।

Rohan Verma@rohan-verma·57 मिनट पहले

भीखना पहाड़ी के बच्चों की यह सोच बहुत प्यारी है। गौरैया अब हमारे मोहल्लों से गायब हो रही है, ऐसे में पूजा के बहाने ही सही, पर्यावरण बचाने का यह संदेश दूर तक जाएगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·56 मिनट पहले

रोहन भाई, सोच अच्छी है पर मुझे शक है कि पूजा के बाद सच में कोई गौरैया बचाने आगे आएगा।

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