गणेश चतुर्थी का पावन अवसर देश भर में बड़े ही भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस पावन पर्व पर भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के पारंपरिक पकवानों का भोग लगाया जाता है। अमूमन बप्पा के नैवेद्य के लिए उकडीचे मोदक बनाए जाते हैं, लेकिन मोदक को हाथ से परफेक्ट आकार देना या सांचे का इस्तेमाल करना कई लोगों के लिए थोड़ा मुश्किल काम हो सकता है। यदि आप मोदक के आकार की झंझट से दूर रहना चाहते हैं और वही पारंपरिक स्वाद पाना चाहते हैं, तो कोंकण और दक्षिण भारत की प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाई पातोली एक बेहतरीन विकल्प है। ताजे हल्दी के पत्तों में भाप देकर बनाई जाने वाली यह डिश स्वाद, पौष्टिकता और मनमोहक सुंगध से भरपूर होती है। आइए जानते हैं इसे आसानी से तैयार करने का तरीका।
पातोली बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
स्वादिष्ट और खुशबूदार पातोली तैयार करने के लिए बहुत अधिक जटिल सामग्रियों की आवश्यकता नहीं होती। यह घर में आसानी से उपलब्ध साधारण चीजों से बन जाती है। मुख्य रूप से इसे दो भागों में तैयार किया जाता है, जिसमें बाहरी आवरण के लिए चावल के आटे की लोई और अंदर भरने के लिए नारियल-गुड़ का मीठा मिश्रण शामिल है। इसके अलावा हल्दी के ताजे पत्ते इसकी मुख्य विशेषता हैं।
- चावल का आटा: 1 कप
- पानी: 1 कप
- देसी घी: 1 से 2 चम्मच
- नमक: 1 चुटकी (स्वाद संतुलन के लिए)
- ताजा नारियल: 1 कप (कद्दूकस किया हुआ)
- गुड़: 1 कप या स्वादानुसार (बारीक कटा या कद्दूकस किया हुआ)
- इलायची पाउडर: आधा छोटा चम्मच
- हल्दी के पत्ते: आवश्यकतानुसार (ताजे और स्वच्छ)
चावल का आटा गूंथने की सही विधि
पातोली का बाहरी हिस्सा नरम और मुलायम बने, इसके लिए चावल का आटा सही तरीके से पकाना बेहद जरूरी है। इसके लिए सबसे पहले एक गहरे बर्तन में 1 कप पानी निकालें और उसमें थोड़ा सा देसी घी तथा 1 चुटकी नमक डालकर उबलने के लिए गैस पर रखें। जब पानी में अच्छी तरह उबाल आ जाए, तो गैस की आंच को एकदम धीमा कर दें। अब उबलते पानी में 1 कप चावल का आटा डालें और चम्मच या कछुल से अच्छी तरह मिला लें ताकि कोई गांठ न पड़े। इसके बाद बर्तन को ढक्कन से ढक दें और धीमी भाप में इसे लगभग 2 से 3 मिनट तक पकने दें।
निश्चित समय के बाद गैस बंद कर दें और इस मिश्रण को बर्तन में ही थोड़ी देर रहने दें ताकि यह हल्का ठंडा हो जाए। जब मिश्रण इतना ठंडा हो जाए कि उसे हाथों से छुआ जा सके, तब इसे एक बड़ी परात में निकालें। हाथों में हल्का सा घी लगाकर इस पके हुए आटे को अच्छी तरह मसलकर एकदम चिकना और नरम गूंथ लें। ध्यान रखें कि आटा बहुत ज्यादा सूखा या गीला नहीं होना चाहिए, वरना पत्तों पर इसे फैलाते समय दरारें आ सकती हैं।
नारियल और गुड़ की मीठी स्टफिंग तैयार करें
पातोली के अंदर भरा जाने वाला स्वादिष्ट नैवेद्य मिश्रण तैयार करने के लिए एक पैन में थोड़ा सा देसी घी गर्म करें। जब घी पिघल जाए, तो इसमें 1 कप कद्दूकस किया हुआ ताजा नारियल और कद्दूकस किया हुआ गुड़ डालें। इस मिश्रण को मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए पकाएं। जैसे-जैसे गुड़ गर्म होगा, वह पिघलकर नारियल के साथ अच्छी तरह मिलना शुरू हो जाएगा।
इस बात का विशेष ध्यान रखें कि मिश्रण को बहुत अधिक देर तक न पकाएं, वरना गुड़ सख्त और चिपचिपा हो सकता है। जैसे ही गुड़ और नारियल एकसार हो जाएं, इसमें आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं। इलायची पाउडर से स्टफिंग में बेहतरीन महक आती है। अब गैस बंद कर दें और इस तैयार स्टफिंग को पूरी तरह से ठंडा होने के लिए रख दें, क्योंकि गर्म स्टफिंग से चावल का आटा खराब हो सकता है।
हल्दी के पत्तों में पातोली को शेप देने का तरीका
अब इस डिश के सबसे खास चरण की शुरुआत होती है। इसके लिए हल्दी के ताजे पत्तों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और किसी सूती कपड़े से पोंछकर सुखा लें। पत्तों का आकार यदि बहुत बड़ा है, तो उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से टुकड़ों में काट लें। अब हल्दी के पत्ते के चिकने वाले हिस्से पर हल्का सा देसी घी लगाएं ताकि आटा पत्ते पर चिपके नहीं।
इसके बाद तैयार चावल के आटे की एक छोटी लोई बनाएं और उसे पत्ते के ऊपर रखें। अपनी उंगलियों की मदद से लोई को दबाते हुए पत्ते पर पतला फैला लें। अब फैलाए गए आटे के ठीक बीचों-बीच तैयार की गई नारियल-गुड़ की स्टफिंग रखें। इसके बाद हल्दी के पत्ते को बीच से आधा मोड़ लें और दोनों किनारों को उंगलियों से हल्के हाथों से दबाकर अच्छी तरह सील कर दें ताकि भाप में पकाते समय स्टफिंग बाहर न निकले।
भाप में पकाने और परोसने का तरीका
पातोली को भाप में पकाने के लिए सबसे पहले एक स्टीमर या मोदक बनाने वाले बर्तन में पर्याप्त पानी डालकर गर्म करें। स्टीमर की जाली वाली प्लेट पर तैयार की गई पातोली रखें। अब स्टीमर को ढक्कन से बंद करें और मध्यम आंच पर इसे लगभग 10 से 12 मिनट तक भाप में पकने दें। भाप में पकने के दौरान हल्दी के पत्तों की मनमोहक खुशबू पूरी पातोली में समा जाती है।
लगभग 10 से 12 मिनट बाद गैस बंद कर दें और स्टीमर का ढक्कन खोलकर पातोली को थोड़ा ठंडा होने दें। हल्दी के पत्तों की सोंधी महक और नारियल-गुड़ के बेमिसाल स्वाद से भरपूर गरमा-गरम पातोली भगवान श्री गणेश को भोग लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसे परोसते समय ऊपर से थोड़ा सा शुद्ध देसी घी जरूर डालें। यह डिश न केवल देखने में सुंदर लगती है, बल्कि खाने में भी बेहद लाजवाब होती है।



















