हरितालिका तीज का पावन पर्व सुहागिन महिलाओं के जीवन में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस अवसर पर जहां महिलाएं विधि-विधान से पूजा-पाठ करती हैं, वहीं पर्व के जश्न को दोगुना करने के लिए पारंपरिक मिठाइयों की खरीदारी भी जोर-शोर से की जाती है। झारखंड के पलामू जिले में इस दौरान एक खास पारंपरिक मिठाई 'अनरसा' की मांग सबसे अधिक देखी जा रही है। वैसे तो अनरसा बिहार के गया शहर की विश्व प्रसिद्ध मिठाई मानी जाती है, लेकिन पलामू के स्थानीय बाजारों में भी गया के असली स्वाद वाला अनरसा लोगों को खूब आकर्षित कर रहा है।
गया से आए स्वाद ने पलामू के बाजार में जमाई अपनी धाक
पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर के मुख्य शहर बाजार में इन दिनों त्यौहार की वजह से खासी चहल-पहल है। बाजार में पूजा सामग्री के साथ-साथ मिठाई की दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। विशेषकर शिवा अनरसा भंडार पर सुबह से लेकर रात तक खरीदारों का तांता लगा हुआ है। इस प्रतिष्ठान के संचालक पिंटू कुमार बताते हैं कि उनका परिवार मूल रूप से बिहार के गया का रहने वाला है। गया में उनके परिवार का पारंपरिक अनरसा बनाने का खानदानी कारोबार था। लगभग 20 साल पहले वह पलामू आए और यहां उन्होंने इसी पारंपरिक मिठास को पेश करने का निर्णय लिया।
पिंटू कुमार के अनुसार, जब उन्होंने दो दशक पहले मेदिनीनगर में अपना काम शुरू किया था, तब यहां गया के स्वाद वाला प्रामाणिक अनरसा बनाने वाली कोई खास दुकान मौजूद नहीं थी। स्थानीय लोगों को शुद्ध और पारंपरिक स्वाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्होंने शिवा अनरसा भंडार की नींव रखी थी। समय के साथ लोगों को यहां के अनरसे का स्वाद बेहद पसंद आया, जिससे दुकान की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल गई। आज तीज के मौके पर न केवल मेदिनीनगर, बल्कि आसपास के तमाम ग्रामीण और शहरी इलाकों से लोग अनरसा खरीदने के लिए यहां पहुंच रहे हैं।
जानिए कैसे तैयार होता है यह स्वादिष्ट अनरसा
पारंपरिक अनरसा बनाने की पूरी प्रक्रिया काफी बारीक और समय लेने वाली होती है। पिंटू कुमार बताते हैं कि बेहतरीन अनरसा तैयार करने के लिए सबसे पहले चावल को पीसकर पाउडर बनाया जाता है और उसमें सही मात्रा में चीनी मिलाई जाती है। इस तैयार मिश्रण को लगभग दो से तीन घंटे तक ढककर रखा जाता है ताकि चावल और चीनी आपस में अच्छी तरह एकसार हो जाएं। इसके बाद इस मिश्रण को हाथों से बहुत अच्छी तरह गूंथा जाता है।
गूंथे हुए मिश्रण से छोटे-छोटे हिस्से तैयार किए जाते हैं। फिर प्रत्येक हिस्से के बीच में उत्तम गुणवत्ता वाला खोआ भरकर उसे गोल आकार दिया जाता है। गोल आकार देने के बाद इसके ऊपर सफेद तिल की एक समान परत चढ़ाई जाती है, जो इसे सुंदर रूप देने के साथ-साथ एक खास सुगंध और कुरकुरापन प्रदान करती है। अंत में इन गोलियों को गर्म तेल में धीमी आंच पर तब तक तला जाता है जब तक कि वे सुनहरी न हो जाएं। पिंटू कुमार का कहना है कि वे स्वाद और ताजगी से कोई समझौता नहीं करते, इसलिए हमेशा उच्च गुणवत्ता वाले खोआ का ही प्रयोग करते हैं।
कीमत और दुकान का समय
मेदिनीनगर के शिवा अनरसा भंडार में ग्राहकों के लिए यह प्रसिद्ध मिठाई काफी किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है। वर्तमान में अनरसा 15 रुपये प्रति पीस के हिसाब से बेचा जा रहा है, जबकि वजन के हिसाब से इसकी कीमत लगभग 200 रुपये प्रति किलोग्राम है। त्यौहार के इस सीजन को ध्यान में रखते हुए यह दुकान रोजाना सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक खुली रहती है। हरितालिका तीज की वजह से अनरसे की रिकॉर्ड बिक्री हो रही है, जिससे व्यापारी और कारीगर बेहद उत्साहित नजर आ रहे हैं। पलामू की यात्रा पर आने वाले लोग अगर बिना गया जाए गया के प्रामाणिक स्वाद का आनंद लेना चाहते हैं, तो वे यहां के अनरसे का स्वाद जरूर ले सकते हैं।



















