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मधुबनी की पारंपरिक नेरहा सब्जी बारिश के मौसम में बना रही अपनी खास पहचान, जानें बनाने की पूरी विधिखानपान
7 अग॰ 2026, 7:26 pm (83 दिन पहले)· 0

मधुबनी की पारंपरिक नेरहा सब्जी बारिश के मौसम में बना रही अपनी खास पहचान, जानें बनाने की पूरी विधि

बिहार के मधुबनी में बारिश के दिनों में पके कटहल के डंठल से तैयार होने वाली नेरहा की मसालेदार सब्जी काफी पसंद की जा रही है। जानिए इस पारंपरिक देसी व्यंजन को बनाने का तरीका और इसके जरूरी टिप्स।

मानसून के दौरान मिथिलांचल की रसोई में कई तरह के अनोखे देसी स्वाद तैयार किए जाते हैं। मधुबनी और आसपास के क्षेत्रों में पके हुए कटहल के मौसम में एक खास पारंपरिक व्यंजन बड़े चाव से बनाया जाता है, जिसे स्थानीय लोग नेरहा की सब्जी कहते हैं। आमतौर पर लोग पके कटहल के फल वाले हिस्से को खाने के बाद उसके अंदरूनी डंठल को बेकार समझकर फेंक देते हैं। हालांकि मिथिला की गृहिणियां इसी बचे हुए हिस्से से बेहद तीखा और जायकेदार व्यंजन तैयार कर लेती हैं, जिसकी बनावट और स्वाद मांसाहारी पकवानों जैसा महसूस होता है।

नेरहा क्या है और इसे पकाने की शुरुआती तैयारी

पके कटहल से मिठास वाले हिस्से को अलग करने के बाद जो बीच की मजबूत संरचना या डंठल बचता है, उसे स्थानीय बोली में नेरहा नाम से जाना जाता है। स्थानीय गृहिणी पूनम के अनुसार इस सब्जी को बेहतरीन स्वाद देने के लिए सही तरीके से साफ करना सबसे अहम कदम है। नेरहा को कटहल से निकालने के बाद सबसे पहले साफ पानी से कई बार अच्छी तरह धोया जाता है, ताकि उसमें बची हुई मिठास पूरी तरह निकल जाए। मिठास हटने के बाद इसके छोटे-छोटे टुकड़े काट लिए जाते हैं, जिससे मसाले इसमें अच्छी तरह समा सकें।

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कढ़ाई में तड़का और सिलबट्टे के मसालों का जादू

इस व्यंजन को तैयार करने के लिए सबसे पहले कढ़ाई में सरसों का तेल गर्म किया जाता है। तेल गर्म होने पर उसमें जीरा, तेजपत्ता और सूखी लाल मिर्च डालकर तड़का लगाया जाता है। इसके बाद कटे हुए नेरहा के टुकड़ों को कढ़ाई में डालकर अच्छी तरह फ्राई किया जाता है। सब्जी के स्वाद और उसकी बनावट को और बेहतर बनाने के लिए इसमें कटे हुए आलू और प्याज मिलाए जाते हैं। मसालों के लिए सिलबट्टे पर पिसे खड़े मसालों का उपयोग किया जाता है, या फिर धनिया पाउडर, लाल मिर्च, हल्दी और गरम मसाला डालकर धीमी आंच पर भुना जाता है। मसाले अच्छी तरह भुन जाने पर जरूरत के हिसाब से हल्की ग्रेवी के लिए पानी डालकर इसे पकाया जाता है।

मटन जैसा चटपटा जायका और परोसने का सही तरीका

पूरी तरह पक जाने के बाद नेरहा की सब्जी का रंग और गाढ़ापन मटन की ग्रेवी जैसा नजर आता है। खाने में भी यह बहुत ही तीखा और चटपटा स्वाद देती है। इसे गरमागरम रोटी या सादे चावल के साथ परोसा जाता है। मिथिलांचल के इलाकों में लोग इस मसालेदार सब्जी को भुने हुए चूड़े यानी पोहा के साथ खाना खास तौर पर पसंद करते हैं। गृहिणी पूनम बताती हैं कि इसे बनाते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि नेरहा बिल्कुल ताजा हो। अगर यह 2 से 3 दिन पुराना हो जाए तो इसमें प्राकृतिक मिठास आ जाती है, जिससे इसका पारंपरिक मसालेदार स्वाद प्रभावित होता है। स्वाद बदलने के साथ-साथ यह मौसमी सब्जी सेहत के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है।

सवाल-जवाब

नेरहा क्या होता है?
पके कटहल के अंदरूनी हिस्से यानी कोया निकालने के बाद बचे डंठल को नेरहा कहा जाता है।
नेरहा की सब्जी बनाने से पहले इसे धोना क्यों जरूरी है?
नेरहा को पानी से अच्छी तरह धोया जाता है ताकि उसमें बची हुई प्राकृतिक मिठास पूरी तरह निकल जाए।
नेरहा की सब्जी में तड़के के लिए किन चीजों का इस्तेमाल होता है?
तड़के के लिए सरसों के तेल में जीरा, तेजपत्ता और सूखी लाल मिर्च का उपयोग किया जाता है।
इस सब्जी को किसके साथ परोसा जाता है?
इसे गर्मागर्म रोटी, चावल या फिर मिथिलांचल के पारंपरिक अंदाज में भुने हुए चूड़े (पोहा) के साथ खाया जाता है।
पुराना नेरहा इस्तेमाल करने पर स्वाद में क्या फर्क आता है?
दो से तीन दिन पुराना होने पर इसमें प्राकृतिक मिठास आ जाती है जिससे इसका असली मसालेदार स्वाद खत्म हो जाता है।
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