मानसून के मौसम में झारखंड के जंगलों से एक खास देसी मशरूम निकलता है, जिसे रुगड़ा कहा जाता है, और जिसका स्वाद चखने वाले अगली बारिश का बेसब्री से इंतजार करते हैं। बारिश का मौसम सिर्फ हरियाली और ठंडी हवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मिलने वाली मौसमी खास चीजों के लिए भी जाना जाता है, और झारखंड में रुगड़ा इसी परंपरा का सबसे दिलचस्प उदाहरण है। पहली बार यह नाम सुनने वाले अक्सर चौंक जाते हैं कि आखिर यह चीज है क्या, लेकिन जिसने एक बार इसे चखा है, वह इसकी खुशबू, बनावट और स्वाद का कायल हो जाता है। कई लोग तो इसकी तुलना सीधे चिकन और मटन जैसे मांसाहारी व्यंजनों से करते हैं। मानसून शुरू होते ही झारखंड के स्थानीय बाजारों में इसकी मांग अचानक बढ़ जाती है। यह सिर्फ एक सब्जी नहीं, बल्कि मानसून में झारखंड के गांव गांव में एक तरह के त्योहार जैसा अनुभव बन जाता है, जब परिवार मिलकर इसे जंगल से लाते हैं और घर पर करी बनाकर साथ बैठकर खाते हैं।
रुगड़ा आखिर है क्या
रुगड़ा असल में एक जंगली देसी मशरूम है, जिसे झारखंड के कई इलाकों में पुटू के नाम से भी पुकारा जाता है। यह किसी खेत में उगाई जाने वाली फसल नहीं है, बल्कि मानसून के दौरान साल के जंगलों की मिट्टी के भीतर अपने आप विकसित होता है। इसे ढूंढने के लिए गांव के लोग जंगलों में जाकर मिट्टी सावधानी से हटाते हैं और तब कहीं जाकर यह हाथ लगता है। इसी मेहनत भरी खोज की वजह से इसकी उपलब्धता हमेशा सीमित रहती है। बाजार में पहुंचते ही यह हाथोंहाथ बिक जाता है और अक्सर सामान्य मशरूम के मुकाबले इसकी कीमत भी काफी ज्यादा होती है। झारखंड के गांवों में इसे बरसात के मौसम की सबसे खास और प्रतीक्षित खाने की चीज माना जाता है। बरसात के मौसम के अलावा साल के बाकी दिनों में यह मशरूम कहीं नजर नहीं आता, इसी वजह से लोग इसका इंतजार पूरे साल करते हैं।
चिकन-मटन को टक्कर देने वाला स्वाद
रुगड़ा की सबसे बड़ी पहचान इसका अनोखा स्वाद और बनावट है। जब इसे अच्छी तरह पकाया जाता है, तो इसकी बाहरी परत हल्की कुरकुरी रहती है, जबकि अंदर का हिस्सा बेहद मुलायम और रसीला हो जाता है। यही वजह है कि बहुत से लोग इसके स्वाद को चिकन और मटन जैसे व्यंजनों के बराबर मानते हैं। सावन के महीने में जब बड़ी संख्या में लोग मांसाहार से परहेज करते हैं, तब रुगड़ा उनके लिए एक शानदार शाकाहारी विकल्प बनकर सामने आता है। इसे चावल, रोटी या बाजरे की रोटी के साथ भी बड़े चाव से खाया जाता है, और इसी वजह से यह शाकाहारी लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
खरीदते समय बरतें ये सावधानी
चूंकि रुगड़ा मिट्टी के भीतर उगता है, इसलिए इसकी सतह पर मिट्टी के कण काफी मात्रा में चिपके रहते हैं, और इसे खरीदने के बाद अच्छी तरह साफ करना बेहद जरूरी होता है। बाजार में मिलने वाला हर रुगड़ा एक जैसी गुणवत्ता का नहीं होता, इसलिए खरीदारी में थोड़ी सी सतर्कता बरतना जरूरी है। खरीदते वक्त एक-दो रुगड़ा को बीच से काटकर जरूर जांच लेना चाहिए। अगर अंदर का हिस्सा पूरी तरह सफेद, साफ और ताजा नजर आए, तभी उसे खरीदें। वहीं अगर रंग बदला हुआ दिखे या उसमें से किसी तरह की बदबू आ रही हो, तो उसे लेने से बचना चाहिए। ताजा रुगड़ा न सिर्फ स्वाद में बेहतर होता है, बल्कि सेहत के नजरिए से भी ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
घर पर ऐसे बनाएं स्वादिष्ट रुगड़ा करी
रुगड़ा करी बनाने के लिए रुगड़ा, तेल, जीरा, प्याज, टमाटर, अदरक-लहसुन का पेस्ट, हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, नमक, गरम मसाला और हरा धनिया चाहिए होता है।
सबसे पहले रुगड़ा को कई बार साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए, ताकि उसमें चिपकी हुई मिट्टी पूरी तरह निकल जाए। इसके बाद इसे बीच से काटकर हल्का सा भून लिया जाता है। इसके बाद कड़ाही में तेल गर्म करके उसमें जीरा डाला जाता है, और फिर प्याज डालकर उसे सुनहरा होने तक भूना जाता है। इसके बाद टमाटर और अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर मसाले को अच्छी तरह पकाया जाता है। अब इसमें हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और नमक मिलाकर मसाला तैयार किया जाता है। जब यह मसाला अच्छी तरह पक जाता है, तब उसमें पहले से भुना हुआ रुगड़ा डाल दिया जाता है। इसके बाद कुछ मिनट तक इसे धीमी आंच पर पकने दिया जाता है, ताकि मसालों का पूरा स्वाद रुगड़ा के भीतर तक समा जाए। आखिर में गरम मसाला और हरा धनिया डालकर गैस बंद कर दी जाती है। गर्मागर्म रुगड़ा करी को सादे चावल, रोटी या पराठे के साथ परोसा जाता है, और इसका देसी स्वाद खाने का मजा कई गुना बढ़ा देता है।
स्वाद ही नहीं, सेहत का भी खजाना
रुगड़ा सिर्फ अपने जायके के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि इसमें प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, इसी वजह से इसे पौष्टिक भोजन का एक अच्छा हिस्सा माना जाता है। इस मौसम में शरीर को हल्का और पौष्टिक भोजन देने के लिहाज से भी रुगड़ा करी एक अच्छा विकल्प मानी जाती है। हालांकि, किसी भी जंगली मशरूम की तरह इसे भी केवल भरोसेमंद जगह से ही खरीदना चाहिए और पकाने से पहले अच्छी तरह साफ करना जरूरी है।
झारखंड से निकलकर देशभर में बढ़ रही पहचान
आज झारखंड के अलावा दूसरे राज्यों के लोग भी रुगड़ा के बारे में जानने लगे हैं। पहले यह मशरूम सिर्फ झारखंड के गांवों तक ही सीमित माना जाता था, लेकिन सोशल मीडिया और फूड ब्लॉग्स पर बढ़ती चर्चा ने अब इसे राज्य की सीमाओं से बाहर भी एक पहचान दिला दी है। अगर आपको पारंपरिक भारतीय व्यंजन और नए स्वाद आजमाना पसंद है, तो इस मानसून रुगड़ा करी जरूर ट्राई करनी चाहिए, क्योंकि हो सकता है कि आगे चलकर यही आपकी पसंदीदा शाकाहारी डिश बन जाए।













