शारीरिक मजबूती और सुगठित शरीर पाने के लिए केवल जिम में पसीना बहाना या घंटों कसरत करना ही पर्याप्त नहीं होता है। जब तक शरीर को भीतर से जरूरी पोषण नहीं मिलेगा, तब तक मनचाहा परिणाम हासिल करना बेहद मुश्किल होता है। मांसपेशियों के निर्माण, उनकी मजबूती और पूरे शरीर के ऊतकों की देखभाल के लिए प्रोटीन सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में गिना जाता है। यह त्वचा, मांसपेशियों और अंदरूनी टिशू को स्वस्थ रखने के साथ-साथ उनकी दैनिक टूट-फूट की मरम्मत में केंद्रीय भूमिका निभाता है। जब हम अपनी थाली में प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करते हैं, तो पाचन तंत्र उन्हें अमीनो एसिड के रूप में विभाजित करता है। यही अमीनो एसिड आगे चलकर नए और मजबूत मसल टिशू तैयार करने का प्राथमिक काम करते हैं।
मांसपेशियों के निर्माण में क्यों पड़ती है प्रोटीन की आवश्यकता
नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, वेट लिफ्टिंग या भारी वजन उठाने वाले फिटनेस उत्साही लोगों के लिए प्रोटीन का नियमित सेवन अनिवार्य माना जाता है। शरीर को जब तक सही मात्रा में जरूरी अमीनो एसिड नहीं मिलते, तब तक वर्कआउट के बाद मसल रिकवरी की प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाती। हर व्यक्ति के शरीर की शारीरिक बनावट, वजन, दिनभर की सक्रियता का स्तर और उसका व्यक्तिगत फिटनेस लक्ष्य अलग होता है, इसलिए प्रोटीन की दैनिक जरूरत भी हर किसी के लिए एक समान नहीं हो सकती। यदि आपका मुख्य उद्देश्य वजन और मसल्स को बढ़ाना है, तो प्रोटीन युक्त भोजन के साथ-साथ सही तकनीक से रेजिस्टेंस ट्रेनिंग करना अनिवार्य शर्त है।
सामान्य जरूरत बनाम मसल्स बढ़ाने का प्रोटीन पैमाना
किसी भी सामान्य वयस्क के लिए केवल सामान्य शारीरिक गतिविधियों और बुनियादी पोषण संतुलन को बनाए रखने के लिए न्यूनतम 0.8 ग्राम प्रोटीन प्रति किलोग्राम शारीरिक वजन के आधार पर पर्याप्त माना जाता है। हालांकि, यह सामान्य पैमाना उन लोगों की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता जो अपने शरीर पर नई मांसपेशियां जोड़ना चाहते हैं। नियमित तौर पर सक्रिय रहने वाले और सामान्य व्यायाम करने वाले व्यक्तियों के लिए 1.2 से 2 ग्राम प्रति किलो वजन का अनुपात बेहतर परिणाम देता है। वहीं दूसरी ओर, जो लोग गंभीर रूप से रेजिस्टेंस ट्रेनिंग या बॉडीबिल्डिंग के जरिए मसल्स गेन करने में जुटे हैं, उनके लिए यह मात्रा 1.6 से 2.2 ग्राम प्रति किलोग्राम शारीरिक वजन प्रतिदिन तक उपयोगी साबित होती है।
इसे एक सीधे और व्यावहारिक गणित के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति का कुल वजन 60 किलोग्राम है और वह नियमित व्यायाम के जरिए मसल्स गेन करना चाहता है। ऐसी स्थिति में 1.6 से 2.2 ग्राम के तय फार्मूले के अनुसार उसे रोजाना लगभग 96 से 132 ग्राम प्रोटीन का सेवन अपने आहार में सुनिश्चित करना चाहिए। यह मात्रा पूरे दिन के अलग-अलग खानपान के जरिए पूरी की जानी चाहिए ताकि शरीर को लगातार ऊर्जा और पोषण मिलता रहे।
फैट घटाते समय मसल लॉस रोकने का सही तरीका
बहुत से फिटनेस प्रेमी शरीर से अतिरिक्त चर्बी कम करने के साथ-साथ अपनी पहले से बनी मांसपेशियों को सुरक्षित रखना चाहते हैं। जब शरीर कैलोरी डेफिसिट में होता है यानी कम कैलोरी ले रहा होता है, तब मांसपेशियों के टूटने का जोखिम सबसे अधिक बढ़ जाता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण दौर में विशेषज्ञों द्वारा प्रोटीन की मात्रा को बढ़ाकर 2.3 से 3.1 ग्राम प्रति किलोग्राम वजन तक रखने की सिफारिश की जाती है। यह बढ़ी हुई मात्रा फैट बर्न होने के बावजूद मांसपेशियों को सुरक्षित रखने में मदद करती है, हालांकि व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार योग्य पोषण विशेषज्ञ की सलाह से मात्रा तय करना हमेशा सबसे सुरक्षित तरीका है।
शाकाहारी और मांसाहारी आहार के प्रमुख प्रोटीन स्रोत
अपनी दैनिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए आहार में विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का संतुलित संयोजन किया जा सकता है। मांसाहारी या डेयरी उत्पादों का सेवन करने वाले लोगों के लिए चिकन, अंडे, मछली, पनीर, कॉटेज चीज, ग्रीक योगर्ट और व्हे प्रोटीन बेहतरीन और आसानी से पचने वाले विकल्प हैं। वहीं पूरी तरह शाकाहारी या वीगन डाइट का पालन करने वाले लोग दालों, सोयाबीन, टोफू, टेम्पेह, एडामेमे, हेम्प सीड्स और मटर से बने प्रोटीन सप्लीमेंट्स को अपनी नियमित थाली का हिस्सा बना सकते हैं। पूरे दिन की जरूरत को एक ही समय खाने के बजाय तीन से चार बार के भोजन में बांटकर लेना शरीर के लिए अधिक गुणकारी होता है। खासकर कसरत पूरी करने के तुरंत बाद लगभग 20 ग्राम प्रोटीन युक्त स्नैक या शेक लेने से मांसपेशियों की रिकवरी और नई कोशिकाओं के विकास को त्वरित गति मिलती है।
स्वास्थ्य सावधानियां और सही आदतें
सामान्य और स्वस्थ किडनी कार्यप्रणाली वाले अधिकांश लोगों के लिए संतुलित हाई प्रोटीन डाइट का पालन करना पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। इसके विपरीत, जिन व्यक्तियों को पहले से गुर्दे या किडनी से जुड़ी कोई भी पुरानी समस्या है, उन्हें अधिक मात्रा में प्रोटीन लेने से पहले अपने डॉक्टर या प्रमाणित डाइटिशियन से परामर्श अवश्य लेना चाहिए। इसके अलावा, प्रोटीन की आपूर्ति के लिए अत्यधिक रेड मीट या प्रोसेस्ड मीट पर अत्यधिक निर्भर रहने से बचना चाहिए। इसके स्थान पर प्राकृतिक, विविधतापूर्ण और सुपाच्य प्रोटीन स्रोतों को प्राथमिकता देना संपूर्ण सेहत के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।


















