शाम के नाश्ते या छुट्टी के दिन कुछ बेहद कुरकुरा और चटपटा खाने का मन हो तो मुंह में पानी ला देने वाली कोलकाता स्टाइल फिश फ्राई एक बेहतरीन विकल्प साबित होती है। ऊपर से सुनहरी, कुरकुरी परत और भीतर से नर्म, रसीला मछली का टुकड़ा हर किसी का दिल जीत लेता है। लेकिन कई बार घर की रसोई में तमाम कोशिशों के बाद भी वह खास बाज़ार जैसा स्वाद और बनावट नहीं मिल पाती। इसका मुख्य कारण पकाने का तरीका नहीं, बल्कि खरीदारी के वक्त की गई गलतियां होती हैं। सही किस्म और पूरी तरह ताज़ा मछली के बिना कोई भी रेसिपी मनमुताबिक परिणाम नहीं दे सकती। इसलिए बाज़ार जाने से पहले यह समझना आवश्यक है कि खरीदारी के दौरान किन मानकों पर ध्यान दें और किन आम गलतियों से पूरी तरह दूर रहें।
कोलकाता फिश फ्राई के लिए सबसे मुफीद मानी जाने वाली मछलियां
पारंपरिक बंगाली रसोई और कोलकाता की प्रसिद्ध दुकानों में इस खास डिश को तैयार करने के लिए सबसे पहली पसंद भेटकी मछली होती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे बारागुंडी नाम से भी जाना जाता है। इस मछली की खासियत यह है कि इसमें बेहद कम कांटे होते हैं और इसका मांस काफी ठोस, रसदार और स्वादिष्ट होता है। इसके बड़े और कांटे रहित टुकड़े तलने के बाद भी अपनी बनावट बनाए रखते हैं और बिखरते नहीं हैं। यदि आपके स्थानीय बाज़ार में ताज़ा भेटकी उपलब्ध न हो, तो इसके विकल्प के रूप में सुरमई या बासा का चुनाव किया जा सकता है। सुरमई और बासा दोनों के कांटे रहित टुकड़े भी बढ़िया कुरकुरी कोटिंग के साथ बेहतरीन स्वाद देने में सक्षम होते हैं।
मछली की खरीदारी करते समय इन 4 बड़ी गलतियों से बचें
बाज़ार में मछली खरीदते समय अक्सर लोग कुछ बुनियादी बातों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जिससे पूरा स्वाद बिगड़ जाता है। इन चार बड़ी चूकों से हमेशा बचना चाहिए
- बासी मछली की पहचान न कर पाना: खरीदारी करते वक्त सबसे बड़ी भूल बासी स्टॉक उठा लेना है। पुरानी मछली से तेज़ और अप्रिय दुर्गंध आती है, जो तलने के बाद भी नहीं जाती। ताज़ा मछली की सबसे बड़ी पहचान उसकी आंखें होती हैं, जो पूरी तरह चमकदार, साफ और बाहर की ओर उभरी हुई दिखती हैं। इसके अलावा मछली के शरीर को उंगली से दबाने पर उसका मांस तुरंत वापस अपने मूल आकार में आ जाना चाहिए। यदि दबाने पर गड्ढा बना रह जाए, तो वह बासी होने का स्पष्ट संकेत है।
- गलत साइज या हड्डी वाले टुकड़ों का चयन: फिश फ्राई के लिए हमेशा फिलेट यानी बिना कांटे वाले लंबे और चपटे टुकड़ों की ज़रूरत होती है। यदि आप गलती से कांटे वाले या छोटे, गोल टुकड़े चुन लेते हैं, तो गर्म तेल में डालते ही वे टूटने लगते हैं। इसके अलावा खाते समय बार-बार कांटे निकलना पूरे ज़ायके का मज़ा खराब कर देता है।
- दुकानदार पर अंधा भरोसा करना और खुद जांच न करना: पहले से कटी हुई और पैक की गई मछली को बिना जांचे सीधे खरीद लेना एक बड़ी भूल है। हमेशा दुकानदार से कहें कि वह आपके सामने ही पूरी मछली से फिलेट काटे। इस दौरान ध्यान से देखें कि मांस का रंग हल्का गुलाबी या साफ सफेद हो और वह छूने में पूरी तरह सख्त महसूस हो। यदि मांस ढीला, चिपचिपा या पीलापन लिए हुए दिखे, तो उसे बिल्कुल न खरीदें।
- तापमान और सही स्टोरेज की अनदेखी: बाज़ार से ताज़ा मछली लाने के बाद उसे सामान्य कमरे के तापमान पर खुला छोड़ देना बहुत नुकसानदेह होता है। गर्मी और नमी के संपर्क में आते ही मछली बहुत तेज़ी से खराब होने लगती है। यदि आप उसे तुरंत नहीं पका रहे हैं, तो सबसे पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोएं और बिना देर किए तुरंत फ्रिज में ठंडे तापमान पर सुरक्षित रख दें।
रेस्तरां जैसा कुरकुरापन पाने के खास तरीके
मछली का सही चुनाव करने के बाद उसे तलने की तैयारी भी खास तरीके से करनी चाहिए। मैरीनेशन के दौरान ताज़े नींबू का रस और अदरक-लहसुन का पेस्ट लगाना कभी न भूलें। नींबू का रस मछली की प्राकृतिक महक को दूर करता है, जबकि अदरक और लहसुन भीतर तक मसालों को समाने में मदद करते हैं। इसके बाद जब कोटिंग की बारी आए, तो मैदे के पतले घोल में डुबोने के बाद ब्रेडक्रम्ब्स या बारीक सूजी की एक समान परत चढ़ाएं। ब्रेडक्रम्ब्स या सूजी गर्म तेल में जाकर ऊपर एक लाजवाब गोल्डन और क्रिस्पी परत तैयार कर देते हैं, जिससे आपकी घर पर बनी फिश फ्राई बिल्कुल किसी बड़े बावर्ची के हुनर जैसी दिखती और लगती है।

















