उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान होना है, लेकिन चुनावी सरगर्मियों के जोर पकड़ने से ठीक पहले राजनीतिक समीकरणों में एक नया मोड़ आ गया है। आगरा जिले की फतेहाबाद विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक छोटे लाल वर्मा के आकस्मिक निधन से राज्य विधानसभा में सत्ता पक्ष की एक सीट कम हो गई है। राज्यसभा के इस मुकाबले में हर एक मत का विशेष महत्व होता है, क्योंकि राजनीतिक दल महीनों पहले से वरीयता क्रम और संख्या बल का बारीकी से गुणा-गणित तैयार करते हैं। ऐसे नाजुक वक्त में एक विधायक की कमी दोनों प्रमुख खेमों की रणनीतियों पर असर डालती है।
फतेहाबाद विधायक का निधन और विधानसभा में सीटों की स्थिति
फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे 73 वर्षीय विधायक छोटे लाल वर्मा लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें नोएडा स्थित यथार्थ अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था, जहां 24 सितंबर को इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद फतेहाबाद निर्वाचन क्षेत्र रिक्त घोषित हो गया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल 403 सीटों में से उनके निधन से पहले छह सीटें खाली चल रही थीं, लेकिन अब रिक्त स्थानों की कुल संख्या बढ़कर सात हो गई है। इसका सीधा अर्थ यह है कि आगामी राज्यसभा चुनाव में 396 सदस्य ही मतदान करने के योग्य हैं। इस बदलाव के बाद विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की संख्या 256 से घटकर 255 रह गई है।
जीत के लिए 37 प्रथम वरीयता वोटों का गणित
विधानसभा में कुल प्रभावी सदस्यों की संख्या कम होने के बावजूद एक सीट जीतने के लिए आवश्यक प्रथम वरीयता वोटों के फार्मूले में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मौजूदा 396 सदस्यों की संख्या के आधार पर भी किसी भी प्रत्याशी को उच्च सदन तक पहुंचने के लिए कम से कम 37 प्रथम वरीयता वोटों की दरकार होगी। इसका मतलब यह है कि छोटे लाल वर्मा के निधन से सदन में कुल मतों की संख्या तो घटी है, लेकिन जीत के लिए निर्धारित जादुई कोटा 37 पर ही टिका हुआ है।
सत्तारूढ़ गठबंधन और आठ सीटों की चुनौती
वर्तमान सदन संरचना के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी के अपने 255 विधायक हैं, जबकि गठबंधन में शामिल सहयोगी दलों के पास 33 विधायकों की ताकत मौजूद है। इसके अलावा कुछ अन्य विधायकों का समर्थन भी सत्ता पक्ष के साथ बताया जा रहा है। इस आंकड़े के सहारे सत्तारूढ़ गठबंधन आठ राज्यसभा सीटों को जीतने के लिए पर्याप्त संख्या जुटाने की उम्मीद लगाए बैठा है। हालांकि, एक सीट कम होने की वजह से फ्लोर मैनेजरों को अपने पूर्व निर्धारित आंकड़ों की दोबारा समीक्षा करनी होगी ताकि किसी भी तरह के अप्रत्याशित उलटफेर से बचा जा सके।
समाजवादी पार्टी और विपक्ष की रणनीति
विपक्षी खेमे में समाजवादी पार्टी के पास सदन में 101 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के दो सदस्य उनके साथ हैं। दोनों दलों के संयुक्त विधायकों की संख्या 103 बैठती है। 37 वोटों के तय कोटे के मुताबिक, दो सीटों को सुरक्षित करने के लिए 74 वोटों की जरूरत होती है। सपा और कांग्रेस गठबंधन के पास दो सीटें आसानी से जीतने के लिए आवश्यक संख्या से 29 अतिरिक्त वोट उपलब्ध हैं। हालांकि, यदि विपक्ष तीसरी सीट पर भी अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला करता है, तो उसे अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए अन्य अतिरिक्त वोटों की व्यवस्था करनी होगी।
निर्वाचन आयोग का चुनावी कार्यक्रम
चुनाव आयोग की ओर से जारी आधिकारिक कार्यक्रम के तहत राज्यसभा चुनाव की औपचारिक अधिसूचना 29 सितंबर को जारी की जाएगी। प्रत्याशियों द्वारा नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर निर्धारित की गई है। इसके अगले दिन यानी 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि 9 अक्टूबर शुक्रवार तक प्रत्याशी अपनी उम्मीदवारी वापस ले सकेंगे। 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान कराया जाएगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतों की गिनती शुरू होगी। चुनाव आयोग के अनुसार पूरी चुनावी प्रक्रिया 19 अक्टूबर तक संपन्न करा ली जाएगी।



















