उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक शहर मिर्जापुर अपनी खास सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ अद्भुत खानपान के लिए भी जाना जाता है। यदि आप मिर्जापुर की यात्रा कर रहे हैं और वहां के स्थानीय व्यंजनों का आनंद नहीं लिया, तो आपकी यात्रा अधूरी मानी जाएगी। यहां की गलियों और कस्बों में तैयार होने वाली मिठाइयां और नमकीन पकवान अपने पारंपरिक स्वाद और बनाने के खास तरीकों के लिए जाने जाते हैं। शुद्ध देसी खोए से बनी मिठाइयों से लेकर सुबह के चटपटे नाश्ते तक, मिर्जापुर का हर व्यंजन यहां की मिठास और आत्मीयता को दर्शाता है। यदि आप भी इस खूबसूरत जिले में आने का प्लान बना रहे हैं, तो यहां के 5 सबसे प्रसिद्ध स्वादों का अनुभव लेना बिल्कुल न भूलें।
1. विश्व प्रसिद्ध शिवपुर का पेड़ा
मिर्जापुर जिले के शिवपुर इलाके में मिलने वाला पेड़ा देश-विदेश में अपनी खास पहचान बना चुका है। इस पेड़े की बढ़ती लोकप्रियता और गुणवत्ता को देखते हुए इसे सरकार की 'एक जिला एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना के तहत भी चयनित किया गया है। शिवपुर का पेड़ा पूरी तरह से शुद्ध खोए से तैयार किया जाता है। इसे बनाने में पारंपरिक देसी तरीकों का इस्तेमाल होता है, जिससे इसकी प्राकृतिक मिठास और खुशबू कई गुना बढ़ जाती है। दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग विशेष रूप से शिवपुर पहुंचकर इस पारंपरिक पेड़े को खरीदते हैं और अपने साथ ले जाते हैं।
2. बरकछा कलां का अनोखा गुलाब जामुन
मिर्जापुर के बरकछा कलां क्षेत्र का गुलाब जामुन अपने अनूठे स्वाद और निर्माण शैली के लिए प्रसिद्ध है। यहां गुलाब जामुन को पकाने के लिए आधुनिक भट्टियों की बजाय उपली (कंडे) और सूखी लकड़ी की आग का उपयोग किया जाता है। शुद्ध खोए से तैयार होने और धीमी आंच पर पकने के कारण इसमें एक सोंधापन और बेमिसाल स्वाद आ जाता है। इस मार्ग से गुजरने वाले आम यात्रियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारी और जन प्रतिनिधि तक यहां रुककर गुलाब जामुन का स्वाद लेना कभी नहीं भूलते। इसकी एक बड़ी खासियत यह भी है कि यह गुलाब जामुन कई दिनों तक बिना खराब हुए एकदम ताजा बना रहता है।
3. रमईपट्टी की खोए की जलेबी
साधारण मैदे की जलेबी तो आपने कई जगह खाई होगी, लेकिन मिर्जापुर शहर के रमईपट्टी इलाके में मिलने वाली खोए की जलेबी का स्वाद बिल्कुल अलग होता है। इसे बेहद संजीदगी, धैर्य और कारीगरी के साथ तैयार किया जाता है। शुद्ध मावे का उपयोग करके बनाई जाने वाली इस जलेबी की सबसे बड़ी खासियत इसका संतुलित और हल्का मीठा होना है। अत्यधिक चाशनी न होने के कारण यह खाने में भारी नहीं लगती और हर उम्र के लोगों को खूब पसंद आती है। इसका लाजवाब स्वाद शहर में आने वाले हर पर्यटक को आकर्षित करता है।
4. अहरौरा की गाढ़ी मलाई लस्सी
गर्मी और सफर की थकान मिटाने के लिए मिर्जापुर के अहरौरा क्षेत्र में मिलने वाली मलाई लस्सी सबसे बेहतरीन विकल्प है। यहां लस्सी तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह से देसी और पारंपरिक है। सबसे पहले शुद्ध दूध से मोटी और ताजा मलाई निकाली जाती है। इसके बाद उस मलाई का भरपूर उपयोग करते हुए बेहद गाढ़ी और स्वादिष्ट लस्सी तैयार की जाती है। इस लस्सी का लुत्फ उठाने के लिए दूर-दूर से लोग अहरौरा पहुंचते हैं। कई लोग इसे विशेष पैकिंग में करवाकर अपने घर और रिश्तेदारों के लिए भी ले जाते हैं।
5. शिव इंटर कॉलेज के पास की हींग कचौड़ी
मीठे के बाद अगर आप चटपटे स्वाद के शौकीन हैं, तो मिर्जापुर शहर में मिलने वाली हींग की कचौड़ी आपके लिए सबसे उत्तम नाश्ता है। शहर के प्रसिद्ध शिव इंटर कॉलेज के समीप मिलने वाली यह हींग कचौड़ी स्थानीय लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुकी है। कचौड़ी में मिलाई जाने वाली शुद्ध हींग की मनमोहक खुशबू और चटपटा स्वाद हर किसी को इसका दीवाना बना देता है। सुबह होते ही इस दुकान पर कचौड़ी खाने वालों की भारी भीड़ जुट जाती है। दूर-दूर से आने वाले लोग इस गर्मागर्म हींग कचौड़ी को मिर्जापुर का सबसे लोकप्रिय नाश्ता मानते हैं।
ये मिर्जापुर के वे 5 खास स्वाद हैं जो इस जिले की खानपान परंपरा की रीढ़ माने जाते हैं। यहां के खानपान में स्वाद के साथ-साथ अपनों का प्यार और आत्मीयता भी महसूस होती है। ऐसे में जब भी आप अपने दोस्तों या परिवार के साथ मिर्जापुर की यात्रा करें, तो इन लाजवाब पकवानों का आनंद अवश्य उठाएं।



















