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मानसून में छत्तीसगढ़ के इस खास पारंपरिक व्यंजन की उठती है महक, स्वाद ऐसा कि उंगलियां चाटते रह जाएंगेखानपान
23 जुल॰ 2026, 9:26 am (98 दिन पहले)· 1

मानसून में छत्तीसगढ़ के इस खास पारंपरिक व्यंजन की उठती है महक, स्वाद ऐसा कि उंगलियां चाटते रह जाएंगे

छत्तीसगढ़ में बरसात के मौसम के दौरान अरबी के पत्तों और उड़द दाल से पारंपरिक 'ईढर' डिश बड़े चाव से बनाई जाती है। यह स्वादिष्ट और चटपटी सब्जी अपने अनोखे स्वाद की वजह से स्थानीय युवा पीढ़ी के बीच भी काफी लोकप्रिय हो रही है।

बरसात का मौसम आते ही छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और शहरी इलाकों में एक खास तरह की प्राकृतिक छटा बिखर जाती है। इस सुहावने मौसम के साथ ही राज्य की रसोई में एक बेहद खास और पारंपरिक व्यंजन की महक उठने लगती है। बालोद जिले से लेकर पूरे प्रदेश में कोचई के पत्तों यानी अरबी के पत्तों से एक लाजवाब डिश तैयार की जाती है जिसे स्थानीय भाषा में ईढर कहा जाता है। यह स्वादिष्ट व्यंजन अरबी के पत्तों और उड़द दाल के बेहतरीन तालमेल से बनता है जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध खानपान संस्कृति का एक शानदार और बेहद लोकप्रिय उदाहरण है।

संस्कृति और स्वाद का अनोखा संगम

स्थानीय गृहिणी अन्नू नायक बताती हैं कि यह व्यंजन छत्तीसगढ़ की जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ है। त्योहारों और खास आयोजनों में इस डिश को बनाना लगभग अनिवार्य माना जाता है, लेकिन बारिश के सुहावने और सामान्य दिनों में भी लोग इसे अपने घरों में बड़े चाव से पकाते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अगर इसे पारंपरिक विधि का पालन करते हुए सही तरीके से बनाया जाए, तो इसका बेमिसाल स्वाद हर उम्र के लोगों को अपना दीवाना बना देता है। मानसून के महीनों में इस व्यंजन की लोकप्रियता अपने चरम पर होती है क्योंकि इसके मुख्य घटक यानी अरबी के ताजे और हरे पत्ते इस मौसम में आसानी से और भरपूर मात्रा में उपलब्ध होते हैं।

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दाल को तैयार करने की अहम प्रक्रिया

इस शानदार सब्जी की नींव उड़द दाल से तैयार होती है। ईढर को पकाने की शुरुआत उड़द दाल को साफ पानी में करीब 4 से 6 घंटे तक भिगोने के साथ होती है। जब दाल अच्छी तरह फूल जाती है, तो इसका सारा पानी निकालकर इसे सिलबट्टे या मिक्सर में एकदम बारीक पीस लिया जाता है। दाल का एक गाढ़ा पेस्ट तैयार करना इस प्रक्रिया का सबसे अहम हिस्सा है। पीसने के बाद इस गाढ़े पेस्ट को हाथों से या चम्मच की मदद से बहुत अच्छी तरह फेंटा जाता है। लगातार फेंटने से पेस्ट के अंदर हवा भर जाती है और वह एकदम हल्का और मुलायम हो जाता है। इसी फेंटने की प्रक्रिया से डिश की असली बनावट और बेहतरीन स्वाद उभरकर सामने आता है।

पत्तों पर लेप और सेंकने का तरीका

दाल का मिश्रण तैयार होने के बाद कोचई के बड़े और साफ पत्तों को पानी से अच्छी तरह धोकर सुखा लिया जाता है। इसके बाद पत्ते के पिछले हिस्से पर उड़द दाल का तैयार और फेंटा हुआ गाढ़ा पेस्ट बिल्कुल एक समान रूप से फैलाकर लगाया जाता है ताकि कोई भी हिस्सा खाली न रहे। लेप लगाने के बाद पत्ते को बहुत सावधानी से गोल आकार में लपेट कर एक कड़ा रोल तैयार किया जाता है जिससे दाल अंदर सुरक्षित रहे। अब गैस पर तवा गरम करके उस पर थोड़ा सा तेल डाला जाता है। इस गरम तवे पर पत्ते वाले रोल को रखकर चारों तरफ से हल्का सुनहरा रंग आने तक बहुत ही धीमी आंच पर फ्राई किया जाता है या सेंका जाता है। जब यह रोल अच्छी तरह सिंक कर ठंडा हो जाता है, तो चाकू की मदद से इसे छोटे और गोल टुकड़ों में काट कर अलग रख लिया जाता है।

चटपटी और खट्टी ग्रेवी का जादू

ईढर का असली स्वाद इसकी मसालेदार ग्रेवी में छिपा होता है। ग्रेवी तैयार करने के लिए एक भारी तले वाली कड़ाही में तेल गरम किया जाता है। तेल गरम होते ही सबसे पहले सरसों का तेज तड़का लगाया जाता है। सरसों के चटकने के बाद इसमें बारीक कटा हुआ लहसुन, ताजी हरी मिर्च और मूंगफली का चिकना पेस्ट डालकर थोड़ी देर तक अच्छी तरह भूना जाता है। इसके बाद कड़ाही में हल्दी, स्वाद के अनुसार नमक और घर के अन्य नियमित मसाले मिलाए जाते हैं। ग्रेवी को गाढ़ा करने के लिए इसमें 3 से 4 बारीक कटे हुए टमाटर डाले जाते हैं। सब्जी में एक हल्का और बहुत ही स्वादिष्ट खट्टापन लाने के लिए सूखे आम का एक टुकड़ा भी मसाले में मिला दिया जाता है।

धीमी आंच पर पकने की प्रक्रिया

टमाटर और मसालों के इस मिश्रण को तब तक पकाया जाता है जब तक कि टमाटर पूरी तरह से गल कर मसाले के साथ एकसार न हो जाएं। जब मसाला तेल छोड़ने लगता है, तब ग्रेवी की जरूरत के हिसाब से कड़ाही में गरम पानी डाला जाता है। पानी में उबाल आने के बाद, पहले से काट कर रखे गए ईढर के गोल टुकड़ों को आहिस्ता से ग्रेवी में छोड़ दिया जाता है। इसके बाद कड़ाही को ढक कर करीब 10 मिनट तक बहुत ही धीमी आंच पर पकने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस धीमी आंच पर पकने के कारण मसालों का तीखा और खट्टा स्वाद पत्तों और दाल के टुकड़ों के भीतर तक पूरी तरह समा जाता है।

नई पीढ़ी भी हुई स्वाद की दीवानी

इस पूरी प्रक्रिया के बाद छत्तीसगढ़ की पारंपरिक और बेहद स्वादिष्ट ईढर की डिश परोसने के लिए बिल्कुल तैयार हो जाती है। इसे थाली में गरमागरम चावल के साथ परोसा जाता है। इसके अलावा यह गेहूं की रोटी या फिर स्थानीय ज्वार और बाजरे की रोटी के साथ भी बेहद स्वादिष्ट लगती है। बालोद और आसपास के इलाकों में यह डिश आज भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। सबसे अच्छी बात यह है कि घर के बड़े बुजुर्गों के साथ साथ आज की युवा और नई पीढ़ी भी बाहर के खाने के बजाय इस पारंपरिक स्वाद को बहुत पसंद कर रही है। बरसात के इस ठंडे मौसम में पारंपरिक भोजन का आनंद लेने के लिए ईढर एक बेहतरीन विकल्प साबित होता है।

सवाल-जवाब

ईढर मुख्य रूप से किन चीजों से बनाया जाता है?
यह छत्तीसगढ़ का एक पारंपरिक व्यंजन है जिसे मुख्य रूप से अरबी के पत्तों (कोचई पान) और उड़द दाल के फेंटे हुए पेस्ट से तैयार किया जाता है।
उड़द दाल को ईढर बनाने के लिए कितनी देर भिगोना चाहिए?
दाल को बारीक पीसने से पहले साफ पानी में करीब 4 से 6 घंटे तक भिगोकर रखना बहुत जरूरी होता है ताकि वह नरम हो जाए।
ग्रेवी में चटपटा और खट्टा स्वाद लाने के लिए क्या इस्तेमाल किया जाता है?
ग्रेवी में एक स्वादिष्ट खट्टापन जोड़ने के लिए 3 से 4 कटे हुए टमाटरों के साथ सूखे आम का एक टुकड़ा भी डाला जाता है।
ईढर के टुकड़ों को ग्रेवी में डालने के बाद कितनी देर तक पकाया जाता है?
ग्रेवी में ईढर के गोल टुकड़े डालने के बाद, उन्हें मसालों का स्वाद सोखने के लिए लगभग 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाया जाता है।
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