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मिर्जापुर में सोनभद्र की जनजातीय परंपरा से तैयार हो रहा खास आयुर्वेदिक गुड़, सौंठ और मुलेठी के मिश्रण से बढ़ता है मेटाबॉलिज्मखानपान
20 अग॰ 2026, 2:17 pm (70 दिन पहले)· 3

मिर्जापुर में सोनभद्र की जनजातीय परंपरा से तैयार हो रहा खास आयुर्वेदिक गुड़, सौंठ और मुलेठी के मिश्रण से बढ़ता है मेटाबॉलिज्म

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में सोनभद्र की आदिवासी पद्धति से निर्मित विशेष आयुर्वेदिक गुड़ लोगों को खूब पसंद आ रहा है। सौंठ, मुलेठी, सौंफ और मरीच के मिश्रण से बना यह गुड़ स्वाद के साथ मेटाबॉलिज्म और इम्युनिटी भी बढ़ाता है।

भारतीय घरों में गुड़ का सेवन आमतौर पर पानी पीने के साथ या भोजन के बाद मीठे के रूप में किया जाता है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में गुड़ को एक बेहद खास और आयुर्वेदिक तरीके से तैयार किया जा रहा है, जिसकी पौष्टिकता और स्वाद की चर्चा दूर-दूर तक हो रही है। चॉकलेट के छोटे टुकड़ों के आकार में तैयार किया जाने वाला यह गुड़ न केवल खाने में अत्यधिक स्वादिष्ट है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी औषधीय गुणों का खजाना माना जाता है।

औषधीय सामग्रियों का अनूठा मिश्रण और स्वास्थ्य लाभ

सामान्य गुड़ की तुलना में मिर्जापुर का यह विशेष आयुर्वेदिक गुड़ कई प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और मसालों के मेल से तैयार किया जाता है। इसे बनाने में मुख्य रूप से सौंठ, सौंफ, मरीच (काली मिर्च) और मुलेठी का प्रयोग किया जाता है। ये सभी सामग्रियां मिलकर शरीर के मेटाबॉलिज्म को मजबूत बनाती हैं और इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करती हैं। सौंठ और मरीच पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं, जबकि मुलेठी गले की खराश और पेट की समस्याओं में राहत पहुंचाती है। सौंफ का समावेश गुड़ को एक बेहतरीन सुगंध और ताजगी प्रदान करता है।

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सोनभद्र की जनजातीय संस्कृति से मिली प्रेरणा

इस आयुर्वेदिक गुड़ को तैयार करने की अनोखी विधि का मूल स्रोत पड़ोसी जिले सोनभद्र के आदिवासी अंचलों से जुड़ा है। मिर्जापुर के नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी ने बताया कि उन्हें इस गुड़ को बनाने की प्रेरणा सोनभद्र से मिली थी। कई वर्ष पहले वे सांसद रामचंद्र के साथ सोनभद्र के जनजातीय इलाकों के भ्रमण पर जाते थे। वहां आदिवासी समाज के लोगों द्वारा तैयार किए गए इस विशेष गुड़ का उन्होंने कई बार सेवन किया। इसके औषधीय गुणों और लाजवाब स्वाद से प्रभावित होकर उन्होंने आदिवासियों से इसकी पारंपरिक निर्माण पद्धति और सामग्रियों के अनुपात की जानकारी ली और उसी प्रामाणिक तरीके से इसे मिर्जापुर में बनवाना शुरू किया।

मधुमेह रोगियों के लिए अनुकूल और निर्माण का भावनात्मक पहलू

यह हर्बल गुड़ उन लोगों के लिए भी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो रहा है जो आमतौर पर मीठा खाने से परहेज करते हैं। शुगर या डायबिटीज से पीड़ित लोग भी इसका सीमित मात्रा में सेवन कर सकते हैं, क्योंकि यह नुकसान पहुँचाए बिना शरीर को ऊर्जा और संतुष्टि का अहसास कराता है। श्याम सुंदर केसरी का मानना है कि इस गुड़ के उत्कृष्ट स्वाद का एक बड़ा कारण इसे तैयार करने में निहित सेवा और समर्पण का भाव है। उनका कहना है कि जिस प्रकार मां के हाथों से बने भोजन में स्वाभाविक मिठास और स्वाद आ जाता है, उसी तरह जब मातृ शक्ति के भाव और शुद्ध मन से इसे तैयार किया जाता है, तो इसका स्वाद अद्वितीय हो जाता है।

सवाल-जवाब

मिर्जापुर का यह आयुर्वेदिक गुड़ सामान्य गुड़ से कैसे अलग है?
यह गुड़ सौंठ, सौंफ, मरीच (काली मिर्च) और मुलेठी जैसी आयुर्वेदिक सामग्रियों के मिश्रण से तैयार किया जाता है, जो इसे केवल मीठा ही नहीं बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी बनाता है।
इस खास गुड़ को तैयार करने का विचार कहां से आया?
नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी को यह विचार सोनभद्र के जनजातीय इलाकों में भ्रमण के दौरान आदिवासी समाज द्वारा अपनाई जाने वाली पारंपरिक निर्माण पद्धति को देखकर मिला।
इस आयुर्वेदिक गुड़ के सेवन से क्या-क्या स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं?
इसके सेवन से शरीर का मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है, इम्युनिटी बढ़ती है और यह पाचन क्रिया तथा गले के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
क्या मधुमेह (शुगर) के मरीज भी इस गुड़ का सेवन कर सकते हैं?
हां, प्राकृतिक हर्बल सामग्रियों के कारण यह साधारण चीनी या मिठाइयों की तुलना में शुगर के मरीजों के लिए भी सीमित मात्रा में एक सुरक्षित और संतोषजनक विकल्प माना जाता है।
मिर्जापुर में इस गुड़ को बनाने की शुरुआत किसने की?
सोनभद्र की आदिवासी परंपरा से प्रेरित होकर मिर्जापुर के नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी ने इस खास आयुर्वेदिक गुड़ को बनवाना शुरू किया।
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