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भरतपुर के बंद बरेठा में मानसून आते ही मच जाती है इस खास जायके की धूमखानपान
29 अग॰ 2026, 9:49 am (62 दिन पहले)· 2

भरतपुर के बंद बरेठा में मानसून आते ही मच जाती है इस खास जायके की धूम

राजस्थान के भरतपुर स्थित बंद बरेठा में मानसून के दौरान मिलने वाले आलू चिप्स वाले पकोड़े अपनी खास कुरकुरी बनावट और तीखी चटनी के चलते लोगों के बीच खासे लोकप्रिय हैं।

राजस्थान का भरतपुर जिला अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के साथ-साथ अपने अनूठे खान-पान के लिए भी जाना जाता है। यहाँ का बंद बरेठा क्षेत्र अपने प्राकृतिक सौंदर्य और मनमोहक बांध के दृश्यों के लिए तो प्रसिद्ध है ही, साथ ही यहाँ का एक खास स्थानीय स्वाद भी सैलानियों को अपनी ओर खींचता है। जैसे ही आसमान में बादल छाते हैं और बारिश की फुहारें गिरना शुरू होती हैं, यहाँ के स्थानीय बाजारों में एक खास तरह के व्यंजन की मांग अचानक आसमान छूने लगती है। इन खास पकोड़ों का स्वाद चखने के लिए लोग केवल आस-पास के गाँवों से ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के शहरों से भी विशेष रूप से सफर तय करके पहुँचते हैं।

साल के चुनिंदा महीनों में ही मिलता है यह अनूठा स्वाद

इस लजीज व्यंजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह साल भर आसानी से उपलब्ध नहीं होता है। दुकानदारों और स्थानीय लोगों के अनुसार, इन विशेष पकोड़ों को तैयार करने का सिलसिला मुख्य रूप से केवल मानसून के दिनों में ही देखने को मिलता है। यही वजह है कि जैसे ही बारिश का मौसम दस्तक देता है, बंद बरेठा के बाजारों में खाने के शौकीनों का तांता लग जाता है। स्थानीय निवासियों के अलावा बाहर से घूमने आने वाले पर्यटक भी इस सीमित समय मिलने वाले स्वाद का आनंद लेने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं।

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बनाने की अनूठी विधि और बेहतरीन संयोजन

आम तौर पर घरों में बनने वाले सामान्य आलू के पकोड़ों की तुलना में इनका तरीका और जायका काफी अलग होता है। इन्हें बनाने के लिए सबसे पहले ताजे आलू को गोल और बेहद पतली स्लाइस में काटा जाता है ताकि वे तलते समय अंदर तक अच्छी तरह पक सकें। इसके बाद इन आलू की चिप्स को विशेष मसालों और अजवाइन युक्त गाढ़े बेसन के घोल में अच्छी तरह लपेटा जाता है। बेसन के घोल में अजवाइन मिलने से न केवल इसका स्वाद बढ़ता है बल्कि यह पाचन के लिए भी बेहतरीन रहता है। इसके बाद कड़ाही में खौलते हुए तेल में इन्हें सुनहरे और करारे होने तक तला जाता है। बाहर से बेहद कुरकुरे और अंदर से नरम आलू का यह मेल खाने वालों को मंत्रमुग्ध कर देता है.

तीखी लाल मिर्च की चटनी और बाजार मूल्य

इन पकोड़ों के स्वाद को कई गुना बढ़ाने का काम इसके साथ परोसी जाने वाली खास लाल मिर्च की तीखी और चटपटी चटनी करती है। जब बरसात के सुहाने मौसम में गरमा-गरम पकोड़ों के साथ यह मसालेदार चटनी मिलती है, तो अनुभव बेहद खास हो जाता है। यही कारण है कि लोग बार-बार इस जगह की तरफ खिंचे चले आते हैं। बात अगर कीमत की करें, तो बंद बरेठा के बाजारों में इन खास आलू चिप्स वाले पकोड़ों का भाव लगभग ₹200 प्रति किलोग्राम है। बरसात का यह मौसम जैसे-जैसे विदा होता है, इनकी उपलब्धता भी धीरे-धीरे कम होकर बंद हो जाती है।

सवाल-जवाब

बंद बरेठा के आलू चिप्स वाले पकोड़े कहाँ प्रसिद्ध हैं?
यह विशेष व्यंजन राजस्थान के भरतपुर जिले के बंद बरेठा क्षेत्र में प्रसिद्ध है।
ये पकोड़े साल भर क्यों नहीं मिलते?
ये पकोड़े मुख्य रूप से केवल मानसून और बारिश के मौसम में ही तैयार किए जाते हैं।
इन पकोड़ों की क्या खासियत है?
इन्हें बनाने के लिए बहुत पतली आलू चिप्स का उपयोग किया जाता है और इन्हें अजवाइन युक्त बेसन के घोल में तलकर कुरकुरा बनाया जाता है।
इनके साथ कौन सी चटनी परोसी जाती है?
इन पकोड़ों के साथ तीखी और मसालेदार लाल मिर्च की चटनी परोसी जाती है।
बाजार में इन पकोड़ों की कीमत क्या है?
बंद बरेठा के बाजार में इन खास पकोड़ों की कीमत लगभग ₹200 प्रति किलोग्राम है।
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