पवित्र श्रावण और भाद्रपद मास के दौरान बिहार के बाजारों में पारंपारिक अनरसा मिठाई की सौंधी खुशबू बिखरने लगी है। धार्मिक अनुष्ठानों और व्रत-त्योहारों का सिलसिला शुरू होते ही हर घर में इस खास पकवान की माँग तेजी से बढ़ जाती है। भगवान भोले की आराधना से जुड़े इस पावन समय में श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे रहते हैं, वहीं बाजारों में हलवाइयों की दुकानें इस दो महीने चलने वाले मिष्ठान कारोबार के लिए पूरी तरह तैयार हो चुकी हैं।
सावन और भादो के पर्वों में अनरसा का धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व
मानसून के आगमन के साथ ही महिलाओं के प्रमुख व्रत और पर्व आरंभ हो जाते हैं। सावन सोमवारी, तीज, करमा और जितिया जैसे महत्वपूर्ण पर्वों के दौरान पूजा-पाठ का विशेष विधान होता है। इन त्योहारों की मुख्य विशेषता यह है कि इनमें उपयोग होने वाले फल, फूल और सामग्रियां इसी मौसम में प्राकृतिक रूप से प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होती हैं। इसी कड़ी में अनरसा भी एक ऐसी पारंपरिक मिठाई है, जिसकी खपत श्रावण और भाद्रपद के पूरे दो महीनों में चरम पर रहती है। हर धार्मिक अवसर पर इस मिठाई की मौजूदगी को बेहद शुभ और अनिवार्य माना जाता है।
बिहार के प्रमुख शहरों में सजा बाजार और कीमतें
बिहार के विभिन्न जिलों में अनरसा की जबरदस्त माँग देखी जा रही है। पटना, गयाजी, नालंदा और नवादा जैसे बड़े शहरों की मिठाई दुकानों में यह पकवान प्रमुखता से दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से जहानाबाद जिले के अंबेडकर चौक पर हर बदलते मौसम के साथ खान-पान का एक अलग ही स्वरूप देखने को मिलता है। ठंड के दिनों में जहाँ यहाँ तिलकुट की सोंधी महक फैली रहती है, वहीं सावन और भादो के महीनों में अनरसा की मनभावन खुशबू से पूरा बाजार सराबोर रहता है।
बाजार में अनरसा मुख्य रूप से दो अलग-अलग प्रकारों में तैयार कर बेचा जाता है। पहला साधारण अनरसा होता है, जिसे चावल के आटे, चीनी, पानी, सफेद तिल और घी या तेल के मिश्रण से बनाया जाता है। इसकी शुरुआती कीमत ₹5 प्रति पीस रखी जाती है। वहीं दूसरी वैरायटी खोया और काजू-किशमिश जैसे मेवों से भरपूर स्पेशल अनरसा की होती है, जिसकी कीमत साधारण अनरसा से दोगुनी यानी ₹10 होती है।
अंबेडकर चौक पर दुकान लगाने वाले स्थानीय कारोबारी रौनक केशरी का कहना है कि वे मकर संक्रांति पर तिलकुट का निर्माण करते हैं और श्रावण आते ही अनरसा का काम शुरू कर देते हैं। उन्होंने बताया कि दो महीनों तक इस मिठाई की भारी मांग रहने के कारण वे व्यापक स्तर पर तैयारियां करते हैं, क्योंकि हर घर में पूजा और त्योहारों के दौरान अनरसा को विशेष पकवान के रूप में परोसा जाता है।
घर पर स्वादिष्ट और खस्ता अनरसा बनाने की पूरी विधि
यदि आप त्योहारों के इस मौसम में बाजार जैसा अनरसा घर पर ही तैयार करना चाहते हैं, तो इसकी निर्माण प्रक्रिया बेहद सरल है। सबसे पहले अरवा चावल को पानी में अच्छी तरह भिगोकर कुछ घंटों के लिए छोड़ दें। इसके बाद चावल को पानी से छानकर बाहर निकालें और एक साफ सफेद मारकीन के कपड़े पर फैलाकर हवा में सुखाएं ताकि उसकी अतिरिक्त नमी खत्म हो सके।
जब चावल हल्का सूख जाए, तब उसे मिक्सी या ग्राइंडर में डालकर एकदम बारीक और मुलायम होने तक पीस लें। पिसे हुए चावल के आटे को छलनी से अच्छी तरह छान लें ताकि उसमें कोई मोटा दाना न रहे। अब इस आटे में आवश्यकतानुसार पिसी हुई चीनी मिलाएं और थोड़ा-थोड़ा दूध छिड़कते हुए इसे नर्म आटे की तरह गूँथ लें।
गूँथे हुए आटे के छोटे-छोटे गोले बनाकर कुछ समय के लिए सेट होने के लिए रख दें। अनरसा को आकार देने के लिए प्लास्टिक शीट का उपयोग करें। यदि आप स्पेशल खोया अनरसा बना रहे हैं, तो गोलों के बीच में खोया और ड्राई फ्रूट्स का मिश्रण भरें और ऊपर से सफेद तिल की कोटिंग करें। अंत में एक फ्राइंग पैन में शुद्ध घी या तेल गर्म करके इन गोलों को धीमी और मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक तल लें। इस प्रकार घर पर ही क्रिस्पी और स्वादिष्ट अनरसा बनकर तैयार हो जाता है। आप अपनी आवश्यकता के अनुसार सामग्रियों की मात्रा तय कर सकते हैं।



















