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निमाड़ का जायका: बुरहानपुर की फूलाबाई से सीखें बारिश के मौसम में कुरकुरी गिलकी के पकौड़े बनाने का तरीकाखानपान
19 सित॰ 2026, 9:55 pm (40 दिन पहले)· 1

निमाड़ का जायका: बुरहानपुर की फूलाबाई से सीखें बारिश के मौसम में कुरकुरी गिलकी के पकौड़े बनाने का तरीका

मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में मानसून के दौरान गिलकी यानी तुरई के पकौड़े खूब पसंद किए जाते हैं। बुरहानपुर की फूलाबाई ने रसोई की बुनियादी चीजों से महज 15 से 20 मिनट में यह कुरकुरा नाश्ता तैयार करने की आसान विधि साझा की है।

मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल में बारिश की फुहारें गिरते ही खानपान की आदतों में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है। सुहावने मौसम और ठंडी हवाओं के बीच अधिकांश लोगों की चाहत गरमा-गरम तथा चटपटा नाश्ता करने की होती है। बुरहानपुर के घरों में इस मौसम में कई प्रकार के पारंपरिक पकौड़े तले जाते हैं, जिनमें गिलकी यानी तुरई के पकौड़े बेहद लोकप्रिय हैं। बरसात के दिनों में परिवार के साथ बैठकर चाय की चुस्कियों के बीच इन पकौड़ों का आनंद लेना यहां की जीवनशैली का खास हिस्सा बन चुका है।

सस्ती सामग्री और झटपट तैयारी की खासियत

गिलकी के पकौड़ों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें बनाने के लिए किसी दुर्लभ या महंगे सामान की आवश्यकता नहीं होती। घर की सामान्य रसोई में नियमित रूप से मिलने वाली सामग्रियों से ही इन्हें बेहद कम समय में पकाया जा सकता है। यह पूरा नाश्ता 15 से 20 मिनट के भीतर बनकर तैयार हो जाता है। स्वाद में कुरकुरे और हल्के होने की वजह से घर के छोटे बच्चे और बुजुर्ग, दोनों ही इसे चाव से खाते हैं। कम लागत में झटपट बनने वाला यह व्यंजन शाम की चाय का बेहतरीन साथी साबित होता है।

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बुरहानपुर की फूलाबाई से समझें बनाने की विधि

बुरहानपुर की गृहणी फूलाबाई के अनुसार, इन स्वादिष्ट पकौड़ों को तैयार करने की शुरुआत गिलकी की सफाई से होती है। सबसे पहले ताजा गिलकी को पानी से अच्छी तरह धो लें और फिर उसके ऊपरी छिलके को साफ कर लें। इसके बाद गिलकी को गोल या अपनी पसंद के अनुसार पतले-पतले टुकड़ों में काट लें, ताकि तलते समय वे अंदर तक अच्छी तरह पक सकें।

इसके बाद बेसन का मिश्रण तैयार किया जाता है। एक गहरे बर्तन में बेसन निकालें और उसमें स्वादानुसार नमक, हल्दी पाउडर तथा बारीक कटी हुई हरी मिर्च मिला लें। अब इसमें आवश्यकतानुसार धीरे-धीरे पानी डालते हुए एक गाढ़ा घोल बना लें। ध्यान रहे कि घोल न तो बहुत अधिक पतला हो और न ही बहुत सख्त, ताकि वह गिलकी के टुकड़ों पर अच्छी तरह लिपट सके।

तलने का सही तरीका और परोसने का अंदाज

मिश्रण तैयार होने के बाद एक कड़ाही में पर्याप्त तेल डालकर उसे अच्छी तरह गर्म करें। कटे हुए गिलकी के टुकड़ों को बेसन के गाढ़े घोल में पूरी तरह डुबोकर लपेटें और सावधानी से गर्म तेल में छोड़ते जाएं। पकौड़ों को मध्यम आंच पर तब तक तलें जब तक कि वे बाहर से सुनहरे और कुरकुरे न हो जाएं। तेज आंच पर तलने से बेसन जल सकता है और अंदर से तुरई कच्ची रह सकती है, इसलिए मध्यम आंच पर पकाना आवश्यक है।

जब पकौड़े अच्छी तरह सिक जाएं, तो उन्हें कड़ाही से बाहर निकाल लें और किसी जालीदार बर्तन या प्लेट पर रख दें ताकि उनका अतिरिक्त तेल निकल जाए। तैयार गिलकी के पकौड़ों को तीखी हरी चटनी, खट्टी-मीठी टमाटर की चटनी या कड़क चाय के साथ गरमा-गरम परोसें। निमाड़ की यह घरेलू रेसिपी बरसात के सुहावने मौसम में पूरे परिवार को एक साथ बैठकर खाने का अलग ही आनंद देती है।

सवाल-जवाब

गिलकी के पकौड़े बनाने में कितना समय लगता है?
गिलकी के पकौड़े तैयार करने में कुल 15 से 20 मिनट का समय लगता है।
गिलकी के पकौड़े किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं?
मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल और बुरहानपुर जिले में बारिश के मौसम में यह पकौड़े विशेष रूप से बनाए और खाए जाते हैं।
बेसन के घोल में कौन-कौन से बुनियादी मसाले मिलाए जाते हैं?
बेसन में स्वादानुसार नमक, हल्दी पाउडर और बारीक कटी हरी मिर्च डालकर पानी के साथ गाढ़ा घोल बनाया जाता है।
पकौड़ों को कुरकुरा बनाने के लिए आंच कैसी रखनी चाहिए?
गिलकी के पकौड़ों को मध्यम आंच पर सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलना चाहिए।
इन पकौड़ों को किस चीज के साथ परोसा जा सकता है?
गरमा-गरम पकौड़ों को हरी चटनी, टमाटर की चटनी या चाय के साथ परोसा जा सकता है।
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