मानसून के मौसम में चाय के साथ गरमागरम नाश्ते का आनंद हर किसी को पसंद आता है। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में साधारण सी दिखने वाली गिलकी से बेहद स्वादिष्ट और कुरकुरे पकौड़े बनाए जाते हैं। फूलाबाई के अनुसार, गिलकी भले ही एक आम हरी सब्जी हो, लेकिन इसके पकौड़ों का अनोखा स्वाद इसे बेहद खास बना देता है। बरसात के दिनों में स्थानीय घरों में सुबह और शाम के नाश्ते के तौर पर इसे बड़े चाव से तैयार किया जाता है।
तैयारी और आवश्यक सामग्री
इस पारंपरिक व्यंजन को तैयार करने की विधि बेहद सरल है और इसके लिए रसोई में आसानी से मिलने वाली चीजों की ही जरूरत होती है। सबसे पहले ताजी गिलकी को पानी से अच्छी तरह धोकर साफ कर लिया जाता है। इसके बाद गिलकी के छोटे अथवा पतले-पतले गोल टुकड़े काट लिए जाते हैं, ताकि वे तलते समय अंदर तक अच्छी तरह पक सकें।
घोल बनाने और तलने का तरीका
पकौड़ों की बाहरी परत तैयार करने के लिए बेसन का इस्तेमाल किया जाता है। एक बर्तन में बेसन लेकर उसमें जीरा, लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। इसके बाद आवश्यकतानुसार थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर एक गाढ़ा घोल तैयार कर लिया जाता है। ध्यान रखा जाता है कि घोल न ज्यादा पतला हो और न ही बहुत सख्त।
घोल तैयार होने के बाद, कटे हुए गिलकी के टुकड़ों को बेसन के इस मिश्रण में अच्छी तरह लपेटा जाता है। फिर इन्हें पहले से गर्म किए गए तेल में तलने के लिए डाला जाता है। मध्यम आंच पर तलते हुए जब पकौड़े सुनहरे और कुरकुरे दिखने लगें, तब इन्हें तेल से बाहर निकाल लिया जाता है।
परोसने का अंदाज और शेल्फ लाइफ
तैयार गरमागरम पकौड़ों को चाय, तीखी हरी चटनी या अपनी पसंद की किसी भी चटनी के साथ परोसा जाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि गिलकी के इन पकौड़ों की एक बड़ी खूबी इनका टिकाऊपन है। यदि इन्हें सही विधि से बनाया जाए और उचित तरीके से सुरक्षित रखा जाए, तो ये करीब दो दिन तक खराब नहीं होते और खाने योग्य बने रहते हैं। हालांकि, ज्यादातर लोग इन्हें कड़ाही से उतरते ही गरमागरम खाना ही पसंद करते हैं।



















