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पारंपरिक जर्दे में संतरे के छिलके का नया तड़का, गाजीपुर की छात्राओं ने तैयार की आसान विधिखानपान
5 अक्तू॰ 2026, 2:26 pm (24 दिन पहले)· 2

पारंपरिक जर्दे में संतरे के छिलके का नया तड़का, गाजीपुर की छात्राओं ने तैयार की आसान विधि

गाजीपुर के राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय की छात्राओं ने पारंपरिक मीठे चावल को एक नए सिट्रस फ्लेवर के साथ बेहद आसान घरेलू विधि में पेश किया है।

शादी-समारोहों और खास जलसों की दावत में परोसे जाने वाले पारंपरिक मीठे चावल यानी जर्दे को अब एक बिल्कुल नए अंदाज़ में घर की रसोई में तैयार किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर स्थित राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं ने गृह विज्ञान की कक्षा में अपनी पाक कला का हुनर दिखाते हुए इस पारंपरिक मिष्ठान को आधुनिक स्वाद के साथ तैयार किया है। गृह विज्ञान विभाग में प्रोफेसर नेहा मौर्या की देखरेख में छात्राओं ने यह दिखाया कि किस तरह रोजमर्रा की रसोई में मिलने वाली चीजों से उत्सव जैसा लजीज पकवान बिना किसी झंझट के बनाया जा सकता है।

चार से पांच लोगों के लिए जरूरी सामग्री और मात्रा

इस व्यंजन को घर पर तैयार करने के लिए छात्राओं ने बासमती चावल के साथ एक संतुलित माप तय किया है। चार से पांच लोगों के परिवार के लिए पर्याप्त इस रेसिपी में तीन-चौथाई से लेकर एक कप तक चीनी का उपयोग स्वाद की पसंद के अनुसार किया जाता है। इसके साथ ही चावल उबालने की प्रक्रिया के लिए तीन से चार कप स्वच्छ पानी की जरूरत पड़ती है। खुशबू और रंगत उभारने के लिए इसमें शुद्ध देसी घी, हरी इलायची, लौंग, दूध में भिगोया हुआ केसर या पीला खाद्य रंग और मेवों के रूप में काजू, बादाम तथा किशमिश शामिल किए जाते हैं।

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पोषण मूल्य का सटीक लेखा-जोखा

स्वाद के साथ-साथ छात्राओं ने इस मीठे व्यंजन के न्यूट्रिशनल प्रोफाइल का भी ब्योरा तैयार किया। उनके आकलन के मुताबिक, इस रेसिपी की प्रति सर्विंग से शरीर को लगभग 250 से 300 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके अलावा एक खुराक में करीब 5 से 7 ग्राम प्रोटीन, 8 से 10 ग्राम वसा तथा 45 से 50 ग्राम कार्बोहाइड्रेट मौजूद रहता है। पाचन को सहारा देने वाला फाइबर भी इसमें लगभग 1 से 2 ग्राम तक मिल जाता है। हालांकि, इस्तेमाल की गई सामग्रियों की शुद्ध मात्रा और परोसने के आकार के अनुसार इन पोषक तत्वों के स्तर में थोड़ा उतार-चढ़ाव संभव है।

चावल पकाने और दम देने का सही तरीका

जर्दा बनाते समय सबसे महत्वपूर्ण चरण चावल के दानों की बनावट बनाए रखना होता है। इसके लिए सबसे पहले लंबे दाने वाले बासमती चावल को साफ पानी से धोकर करीब बीस से तीस मिनट तक भिगोने के लिए रख दिया जाता है। इसके पश्चात चावल को पानी में केवल अस्सी प्रतिशत तक ही उबाला जाता है। चावल को पूरी तरह पकाने के बजाय थोड़ा सख्त रखना जरूरी है ताकि बाद में चाशनी और घी के साथ पकते समय दाने आपस में चिपकें नहीं और न ही टूटें। जब चावल इस स्तर तक पक जाए, तब उसका अतिरिक्त पानी पूरी तरह छानकर दानों को अलग रख लिया जाता है।

अगले चरण में आंच पर एक कड़ाही चढ़ाकर उसमें शुद्ध देसी घी गर्म किया जाता है। घी गर्म होते ही उसमें लौंग और इलायची डालकर तड़का तैयार किया जाता है। इसके बाद पहले से उबले हुए चावल को कड़ाही में डालकर बेहद हल्के हाथों से घी के साथ मिलाया जाता है ताकि खुशबू हर दाने में समा जाए। फिर ऊपर से चीनी डाली जाती है और दूध में घोला गया केसरिया या पीला रंग चारों तरफ फैला दिया जाता है। कटे हुए काजू, बादाम और किशमिश मिलाने के बाद आंच को धीमा कर दिया जाता है। कड़ाही पर ढक्कन लगाकर इसे मंद आंच पर करीब आठ से दस मिनट तक भाप में पकने दिया जाता है। तय समय के बाद ढक्कन हटाते ही गरमा-गरम जर्दा तैयार मिलता है, जिसे परोसते वक्त ऊपर से अतिरिक्त मेवों से सजाया जा सकता है।

संतरे के छिलके का अनोखा सिट्रस ट्विस्ट

छात्राओं द्वारा विकसित इस विधि की सबसे अनूठी विशेषता इसमें संतरे के छिलके का उपयोग है। छात्राओं का सुझाव है कि संतरे की बाहरी पतली रंगीन परत को बारीक काटकर बेहद कम मात्रा में शामिल करने से मीठे स्वाद के बीच एक सुखद खट्टा-मीठा तीखापन आ जाता है। इस दौरान उन्होंने एक अहम सावधानी भी साझा की है। संतरे के छिलके के ठीक नीचे मौजूद सफेद रेशेदार परत में कड़वाहट होती है, इसलिए व्यंजन में उसका इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए। केवल ऊपरी रंगीन जेस्ट ही इस रेसिपी के स्वाद को दोगुना करता है।

हर मौसम के अनुकूल और सुलभ मिष्ठान

विभाग की प्रोफेसर नेहा के अनुसार, छात्राओं को रसोई में ऐसे व्यावहारिक प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जो किसी एक ऋतु के मोहताज न हों। उनका उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसी विधियां सिखाना है जिन्हें साल के बारह महीने किसी भी अवसर पर आसानी से अमल में लाया जा सके। इस रेसिपी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए किसी दुर्लभ सामग्री की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि हर भारतीय घर में उपलब्ध सामान्य चीजों से ही शाही स्वाद हासिल किया जा सकता है। परंपरा और पोषण का यह अनूठा संगम खान-पान के शौकीनों को काफी आकर्षित कर रहा है।

सवाल-जवाब

जर्दा बनाने के लिए चावल को कितना पकाना चाहिए?
चावल को पानी में केवल 80 प्रतिशत तक ही पकाया जाता है ताकि आगे दम देते समय दाने टूटें नहीं।
संतरे के छिलके का कौन सा भाग इस्तेमाल करना चाहिए?
केवल संतरे के छिलके की बारीक कटी बाहरी रंगीन परत डालनी चाहिए और सफेद हिस्से से बचना चाहिए क्योंकि वह कड़वा होता है।
4 से 5 लोगों के लिए कितनी चीनी की आवश्यकता होती है?
इस रेसिपी के अनुसार चार से पांच लोगों के लिए तीन-चौथाई से लेकर एक कप चीनी पर्याप्त होती है।
जर्दा की प्रति सर्विंग से कितनी कैलोरी मिलती है?
छात्राओं के आकलन के मुताबिक प्रति सर्विंग लगभग 250 से 300 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।
चावल को कड़ाही में कितनी देर धीमी आंच पर पकाया जाता है?
सभी सामग्रियां मिलाने के बाद कड़ाही को ढककर धीमी आंच पर लगभग 8 से 10 मिनट तक पकाया जाता है।
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