सर्दियों के सुहावने मौसम में जब भोजन की थाली में गरमा-गरम खिचड़ी, नमकीन तहरी, कुरकुरे पराठे या मौसमी हरी सब्जियां परोसी जाती हैं, तो उनके साथ चटपटा अचार भोजन का आनंद कई गुना बढ़ा देता है। यही कारण है कि ठंड के महीनों में घरों में अचार की खपत और बाजार में इसकी मांग काफी तेज हो जाती है। रामपुर में लंबे समय से पारंपरिक तरीके से अचार तैयार करने का काम कर रहीं मोना चावला के अनुसार, ठंड के मौसम में आम, तीखी छोटी मिर्च और पौष्टिक आंवले के अचार की सर्वाधिक मांग देखी जाती है। जैसे-जैसे ऋतु बदलती है, वैसे-वैसे लोगों के खान-पान की आदतें और स्वाद की प्राथमिकताएं भी बदलती हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए यह अचार विशेष रूप से तैयार किए जाते हैं।
दक्षिण भारत से मंगाए गए कच्चे आम से बनता है सर्दियों का अचार
अक्सर लोगों के मन में यह धारणा रहती है कि आम का अचार केवल गर्मियों के दिनों में ही डाला जा सकता है, क्योंकि उत्तर भारत में उसी दौरान कच्चे आम पेड़ों पर आते हैं और बाजारों में सुलभ होते हैं। हालांकि, इस धारणा के विपरीत सर्दियों में भी आम का नया अचार उपलब्ध कराया जाता है। जब स्थानीय उत्तर भारतीय मंडियों में कच्चे आम की आवक समाप्त हो जाती है, तब विशेष रूप से मद्रास और केरल जैसे दक्षिणी राज्यों से ताजे कच्चे आम मंगवाए जाते हैं। इन दक्षिणी आमों से तैयार किए जाने वाले अचार की एक बड़ी विशेषता यह होती है कि यह अत्यधिक खट्टा नहीं होता। जो लोग हल्का और संतुलित खट्टापन पसंद करते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन विकल्प बन जाता है। इस व्यवस्था की बदौलत आम का मौसम बीत जाने के महीनों बाद भी भोजन प्रेमी ताजे बने आम के अचार का स्वाद आसानी से ले पाते हैं।
तीखी छोटी मिर्च और सेहतमंद आंवले का अनोखा स्वाद
सर्दियों की दोपहर और शाम के भोजन में छोटी मिर्च का अचार भी लोगों की पहली पसंद बना रहता है। जो लोग अपने भोजन में तीखेपन का तड़का लगाना चाहते हैं, उनके लिए यह छोटी मिर्च का अचार बहुत मुफीद साबित होता है। छोटी मिर्च के भीतर पारंपरिक साबुत और पिसे मसालों का सटीक संयोजन इसे एक अलग ही सुगंध और स्वाद प्रदान करता है। इन सभी अचारों की कीमतें गुणवत्ता और किस्म के आधार पर 200 रुपये से लेकर 240 रुपये प्रति किलो के बीच रखी गई हैं। अपनी पसंद और बजट के अनुसार ग्राहक इन्हें खरीदकर सर्दियों के व्यंजनों के साथ बड़े चाव से खाते हैं।
इसके साथ ही, ठंड के दिनों में आंवले के अचार की लोकप्रियता भी काफी अधिक रहती है। आंवला प्राकृतिक रूप से विटामिन-सी का समृद्ध स्रोत माना जाता है। विटामिन-सी मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सामान्य रूप से कार्य करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे मौसमी बीमारियों से बचाव में मदद मिलती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी सर्दियों के आहार में आंवले को शामिल करने का परामर्श देते हैं, जिससे यह स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी बढ़िया जरिया बन जाता है।
घरेलू मसालों और पारंपरिक विधि से तुरंत बिक जाता है स्टॉक
मोना चावला के मुताबिक, ठंड के मौसम में आम, हरी मिर्च और आंवले के अचार की लोकप्रियता कभी मंद नहीं पड़ती। कड़ाके की ठंड में जब लोग दोपहर को खिचड़ी या रात में पराठे खाते हैं, तो अचार के बिना थाली अधूरी लगती है। उनके यहां तैयार होने वाला अचार इतना लोकप्रिय है कि बनते ही हाथोंहाथ बिक जाता है और इसे लंबे समय तक गोदामों में स्टॉक करके रखने की नौबत नहीं आती। इसकी मुख्य वजह यह है कि अचार की पूरी प्रक्रिया में घर पर कूटे और तैयार किए गए शुद्ध मसालों का प्रयोग किया जाता है। मसालों का यह संतुलित अनुपात और पीढ़ियों पुराना पारंपरिक तरीका ही इन अचारों को बाजार के अन्य उत्पादों से अलग और स्वादिष्ट बनाता है।















