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रेगिस्तान से दूर भरतपुर में बिन बोए उग आए खजूर के पेड़, गुच्छों से लदी डालियां बनीं चर्चा का विषयखानपान
13 जून 2026, 2:22 pm (45 दिन पहले)· 0

रेगिस्तान से दूर भरतपुर में बिन बोए उग आए खजूर के पेड़, गुच्छों से लदी डालियां बनीं चर्चा का विषय

भरतपुर के गांवों में खेतों की मेड़ों पर अपने आप उगे खजूर के पेड़ इन दिनों मीठे फलों से लद गए हैं, जिन्हें न किसी ने बोया और न ही इनकी देखभाल की गई।

खजूर का जिक्र आते ही ज़्यादातर लोगों के मन में राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर जैसे रेतीले इलाके उभर आते हैं, जहां दूर तक फैले रेत के टीले और सूखी ज़मीन इस फल की पहचान मानी जाती है। लेकिन भरतपुर जिले से जो नज़ारा सामने आया है, उसने इस आम धारणा को पलट दिया है। यहां न रेत के टीले हैं और न ही बंजर ज़मीन, फिर भी खजूर के पेड़ फलों से लदे खड़े हैं। डालियों पर झूलते खजूर के गुच्छे देखकर लोग हैरान रह जाते हैं।

न किसी ने बोया, न देखभाल की

सबसे दिलचस्प बात यह है कि भरतपुर के ग्रामीण इलाकों में उगे ये पेड़ किसी किसान ने न तो लगाए और न ही इनकी कोई देखरेख की। ये पेड़ खेतों की डोर और मेड़ों पर अपने आप उग आए हैं। समय के साथ ये पूरी तरह विकसित हो गए और अब इन पर मीठे खजूर के गुच्छे साफ़ झलकने लगे हैं। बिना किसी मेहनत के तैयार हुआ यह फल इन दिनों गांवों में पककर तैयार हो चुका है।

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विशेषज्ञ क्या कहते हैं

कृषि से जुड़े जानकारों का मानना है कि खजूर की खेती सिर्फ़ रेगिस्तानी जलवायु तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक अगर मिट्टी की गुणवत्ता अच्छी हो, सिंचाई का सही इंतज़ाम हो और पौधों की नियमित देखभाल की जाए, तो दूसरे इलाकों में भी खजूर की खेती कामयाब हो सकती है। भरतपुर का यह उदाहरण इसी बात की पुष्टि करता दिख रहा है।

स्वाद और पोषण

यहां उगने वाला यह खजूर आम खजूर से बनावट में थोड़ा अलग है, लेकिन स्वाद वही मीठा है जो खजूर में होता है। कई जगहों पर लोग इसे जंगली खजूर के नाम से भी पहचानते हैं। पकने पर यह फल लाल और हल्के पीले रंग का हो जाता है, जो देखने में भी आकर्षक लगता है और खाने में भी स्वादिष्ट होता है। पोषण के लिहाज़ से भी इसे बेहद फ़ायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें आयरन, फाइबर, कैल्शियम और कई ज़रूरी विटामिन मौजूद होते हैं, जो शरीर के लिए लाभकारी हैं। भरतपुर के कुछ ग्रामीण इलाकों में ये खजूर बड़ी संख्या में देखने को मिलते हैं।

खेती के लिए नई राह

भरतपुर के ये खजूर के पेड़ खेती-किसानी को एक नई दिशा दिखा रहे हैं। बदलते दौर में खेती के तरीकों में नवाचार ज़रूरी हो गया है, और सही जानकारी, तकनीक तथा मेहनत के बल पर किसान किसी भी इलाके में नई संभावनाएं तलाश सकते हैं। बिन बोए उगे ये पेड़ इसी बदलाव की जीती-जागती मिसाल बनकर सामने आए हैं।

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