सावन में बाबा धाम आ रहे हैं तो जसीडीह की यह 40 रुपये वाली चाट जरूर चखेंखानपान
2 घंटे पहले· 2

सावन में बाबा धाम आ रहे हैं तो जसीडीह की यह 40 रुपये वाली चाट जरूर चखें

बाबा बैद्यनाथ मंदिर में दर्शन के बाद श्रद्धालु जसीडीह की मशहूर पापड़ी चाट का स्वाद लेना नहीं भूलते, जो 40 रुपये में मिलती है और वर्षों से इस इलाके की पहचान बन चुकी है.

सावन के महीने में बाबा बैद्यनाथ मंदिर में जलाभिषेक और पूजा करने वाले श्रद्धालु देवघर से लौटते वक्त एक और पड़ाव जरूर लेते हैं, जसीडीह की गलियों में सजी वे दुकानें जहां खट्टी मीठी पापड़ी चाट बिकती है. खासकर पश्चिम बंगाल के कोलकाता और आसपास के इलाकों से आने वाले श्रद्धालु हर साल यहां पहुंचकर इस चाट का स्वाद चखना नहीं भूलते. कई लोगों के लिए तो दर्शन के साथ इस चाट को खाना एक तरह की परंपरा ही बन गई है, और यही वजह है कि बरसों से यह पापड़ी चाट जसीडीह की पहचान बन चुकी है.

45 साल पुरानी दुकान की कहानी

जसीडीह के दुकानदार प्रकाश राउत बताते हैं कि उनकी दुकान पिछले 45 वर्षों से यहां लोगों को चाट परोस रही है. इस दुकान की नींव 1980-81 में उनके पिता ने रखी थी, और आज दूसरी पीढ़ी के तौर पर प्रकाश राउत इसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. उस दौर में एक प्लेट चाट की कीमत महज 5 रुपये हुआ करती थी. प्रकाश राउत का कहना है कि वक्त के साथ बहुत कुछ बदल गया, लेकिन दुकान का स्वाद वही पुराना बना हुआ है.

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40 रुपये में स्वाद और परंपरा दोनों

प्रकाश राउत की दुकान पर भेलपूरी, चाट और तरह तरह के स्नैक्स बिकते हैं, लेकिन ग्राहकों की सबसे ज्यादा मांग हमेशा पापड़ी चाट की ही रहती है. सिर्फ 40 रुपये में मिलने वाली यह चाट अपने स्वाद और क्वालिटी की वजह से लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. कई ग्राहक तो बरसों से लगातार इसी दुकान पर आ रहे हैं, और अब वे अपने बच्चों को भी यही पुराना स्वाद चखाने लाते हैं.

दूसरी दुकान, वही शोहरत

जसीडीह में ही एक और पुराने दुकानदार रमेश जी करीब 40 वर्षों से पापड़ी चाट बना रहे हैं. उनका कहना है कि उनकी दुकान की पूरी पहचान ही पापड़ी चाट से जुड़ी है. जिले के हर कोने से लोग उनकी दुकान तक पहुंचते हैं, और बाहर से आने वाले पर्यटक भी एक बार इसका स्वाद जरूर चखते हैं. रमेश जी के मुताबिक इस स्वाद का सबसे बड़ा राज ताजी सामग्री, संतुलित मसाले और बरसों का अनुभव है. यही वजह है कि एक बार यहां की चाट खा चुका ग्राहक दोबारा लौटकर जरूर आता है.

कैसे बनती है यह खास चाट

इस मशहूर पापड़ी चाट को बनाने का तरीका भी दिलचस्प है. सबसे पहले उबले हुए आलू को छोटे छोटे टुकड़ों में काटा जाता है. इसके साथ ताजे टमाटर को बारीक काटकर नमक, भुना जीरा पाउडर, नींबू का रस, भुजिया, दो तीन तरह का नमकीन मिक्सचर और कुछ खास मसालों के साथ अच्छी तरह मिलाया जाता है. इसके बाद एक प्लेट में कुरकुरी पापड़ी सजाई जाती है, उस पर मीठी चटनी डाली जाती है और फिर तैयार आलू टमाटर का मसालेदार मिश्रण ऊपर फैलाया जाता है. आखिर में इसके ऊपर भुजिया और मसाले डालकर इसे ग्राहकों को परोसा जाता है. खट्टा, मीठा और हल्का तीखा स्वाद ही इस पापड़ी चाट को बाकी चाट से अलग बनाता है.

सिर्फ चाट नहीं, यात्रा का हिस्सा

जसीडीह की यह पापड़ी चाट अब सिर्फ एक स्ट्रीट फूड नहीं रह गई है, बल्कि देवघर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह एक खास पहचान बन चुकी है. बाबा धाम के दर्शन के बाद लोग इस स्वाद को अपनी यात्रा का जरूरी हिस्सा मानते हैं. स्वाद, पुरानी परंपरा और बरसों का भरोसा ही इन दुकानों को आज भी लोगों की पहली पसंद बनाए हुए है.

सवाल-जवाब

जसीडीह की पापड़ी चाट की कीमत कितनी है?
यह चाट सिर्फ 40 रुपये में मिलती है.
प्रकाश राउत की दुकान कितने साल पुरानी है?
यह दुकान पिछले 45 वर्षों से चल रही है और 1980-81 में उनके पिता ने इसे शुरू किया था.
शुरुआत में इस चाट की कीमत क्या थी?
उस समय एक प्लेट चाट की कीमत मात्र 5 रुपये थी.
रमेश जी की दुकान कितनी पुरानी है?
रमेश जी करीब 40 वर्षों से पापड़ी चाट बना रहे हैं.
इस चाट के लिए सबसे ज्यादा श्रद्धालु कहां से आते हैं?
खासकर पश्चिम बंगाल के कोलकाता और आसपास के इलाकों से आने वाले श्रद्धालु हर साल यहां पहुंचते हैं.
पापड़ी चाट में क्या क्या सामग्री डाली जाती है?
उबले आलू, बारीक कटे टमाटर, नमक, भुना जीरा पाउडर, नींबू का रस, भुजिया, नमकीन मिक्सचर, कुरकुरी पापड़ी और मीठी चटनी डाली जाती है.
यह चाट कहां मिलती है?
यह बाबा बैद्यनाथ मंदिर के पास जसीडीह की पुरानी दुकानों पर मिलती है.
इस पापड़ी चाट का स्वाद खास क्यों है?
इसका खट्टा, मीठा और हल्का तीखा स्वाद, ताजी सामग्री और दुकानदारों का बरसों पुराना अनुभव इसे बाकी चाट से अलग बनाता है.

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