भारतीय खानपान की थाली बिना दाल के अधूरी मानी जाती है। चाहे रोजमर्रा का साधारण दोपहर का भोजन हो या फिर किसी उत्सव की दावत, दाल की मौजूदगी स्वाद के साथ सेहत को भी भरपूर पोषण देती है। कई बार घर में दाल बनाते वक्त लोगों को लगता है कि रेस्तरां या ढाबों जैसा गाढ़ापन, सोंधापन और चटपटा स्वाद घरेलू रसोई में हासिल करना मुमकिन नहीं है। हकीकत यह है कि बाहर मिलने वाली दाल के उम्दा स्वाद का पूरा राज दालों के सटीक अनुपात, मसालों की सधी हुई भुनाई और अंत में लगने वाले खास छौंक पर टिका होता है। यदि कुछ जरूरी बातों और सही प्रक्रिया का ध्यान रखा जाए, तो बिल्कुल बाजार जैसा जायका अपनी रसोई में बहुत सरलता से तैयार किया जा सकता है।
तीन खास दालों का संयोजन लाता है बेहतरीन बनावट
इस खास दाल तड़का की सबसे बड़ी खूबी तीन अलग-अलग दालों का मेल है। इसमें अरहर यानी तूर दाल के साथ मसूर और मूंग दाल को मिलाया जाता है। तूर दाल जहां व्यंजन को पारंपरिक खुशबू और आधार देती है, वहीं मसूर दाल उसके रंग को निखारती है और मूंग दाल पकने के बाद दाल को एक प्राकृतिक क्रीमी गाढ़ापन सौंपती है। जब इन तीनों को मिलाकर पकाया जाता है और अंत में देसी घी में भुने हुए लहसुन व साबुत सूखी लाल मिर्च का तड़का लगाया जाता है, तो इसकी महक पूरे घर में फैल जाती है।
दाल भिगोने और उबालने की तैयारी
इस रेसिपी को शुरू करने के लिए नाप का विशेष ध्यान रखें। इसके लिए आधा कप तूर दाल लें और उसमें चौथाई कप मसूर दाल तथा चौथाई कप मूंग दाल मिलाएं। तीनों दालों को मिलाकर साफ पानी से तीन से चार बार अच्छी तरह धो लें ताकि उन पर लगा सारा अतिरिक्त स्टार्च और पॉलिश निकल जाए। धोने के बाद इन्हें साफ पानी में 15 से 20 मिनट के लिए भिगोकर रख दें। दाल को भिगोने से दाने पानी सोख लेते हैं, जिससे वे प्रेशर कुकर में बहुत कम समय में एकसार और बेहद मुलायम पकते हैं।
भीगने के बाद दाल का अतिरिक्त पानी निकाल दें और उसे प्रेशर कुकर में पलट लें। अब कुकर में आधा चम्मच हल्दी पाउडर, थोड़ा सा नमक और करीब ढाई से तीन कप पानी डालें। कुकर का ढक्कन अच्छी तरह बंद करें और मध्यम आंच पर 3 से 4 सीटी आने तक इसे पकने दें। जब कुकर का दबाव अपने आप खत्म हो जाए, तब ढक्कन खोलें। अब एक मथानी या बड़े चमचे की मदद से पकी हुई दाल को अच्छी तरह फेंट लें ताकि तीनों दालें आपस में घुलकर एकदम मखमली और क्रीमी रूप ले लें। यदि दाल ज्यादा गाढ़ी दिखे, तो अपनी पसंद के अनुसार इसमें थोड़ा गर्म पानी मिलाकर घनत्व ठीक कर सकते हैं।
कड़ाही में तैयार करें बुनियादी मसालेदार ग्रेवी
दाल उबलने के बाद ग्रेवी का छौंक तैयार करने के लिए एक चौड़ी कड़ाही को गैस पर चढ़ाएं और उसमें आवश्यकतानुसार शुद्ध देसी घी या तेल डालकर गर्म करें। गर्म घी में जीरा डालें और उसे धीमी आंच पर चटकने दें। जीरे की खुशबू उठते ही कड़ाही में बारीक कटा हुआ प्याज, कद्दूकस किया हुआ ताजा अदरक, बारीक कटी हरी मिर्च और बारीक कटा लहसुन डालकर भूनना शुरू करें। इन सभी सामग्रियों को तब तक लगातार चलाते हुए भूनें जब तक कि प्याज का रंग हल्का सुनहरा न हो जाए।
प्याज के सही तरीके से भून जाने के बाद कड़ाही में बारीक कटे हुए टमाटर डालें। टमाटर को नरम होने तक पकाएं और फिर इसमें लाल मिर्च पाउडर तथा धनिया पाउडर डालें। मसाले को धीमी से मध्यम आंच पर तब तक भूनें जब तक कि किनारों से चिकनाई अलग न होने लगे और मसालों का कच्चापन पूरी तरह समाप्त न हो जाए।
दाल को मसालों के साथ धीमी आंच पर पकाना
जब कड़ाही का मसाला पूरी तरह पककर तैयार हो जाए, तब इसमें पहले से उबली और फेंटी हुई दाल डाल दें। चमचे से दाल और भुने हुए मसाले को एकसार मिला लें। अब आंच को धीमा कर दें और दाल को 5 से 7 मिनट तक कड़ाही में धीरे-धीरे उबलने दें। धीमी आंच पर पकने से प्याज, टमाटर, अदरक और पिसे मसालों का रस पूरी तरह दाल के रेशे-रेशे में समा जाता है। पकने के अंतिम चरण में इसमें थोड़ा गरम मसाला और जरूरत के हिसाब से स्वादानुसार नमक छिड़कें तथा अच्छी तरह मिला दें।
अंतिम लहसुनी घी का तड़का और परोसने का तरीका
दाल को असली ढाबा स्टाइल रूप देने के लिए दूसरा और अंतिम तड़का लगाना बेहद जरूरी कदम है। इसके लिए एक अलग छोटे तड़का पैन में एक बड़ा चम्मच देसी घी गर्म करें। जब घी अच्छी तरह पिघलकर गर्म हो जाए, तब इसमें बारीक कटा हुआ लहसुन और साबुत सूखी लाल मिर्च डालें। लहसुन को धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक कि वह सुनहरा और कुरकुरा न हो जाए तथा उसकी सौंधी खुशबू न आने लगे।
लहसुन के सुनहरा होते ही इस खौलते हुए तड़के को कड़ाही में रखी गरम दाल के ऊपर सीधे डाल दें। तड़का डालते ही दाल को तुरंत ढक्कन से कुछ पलों के लिए ढक दें ताकि घी और भुने लहसुन का धुआंधार सोंधापन दाल के भीतर ही कैद रहे। इसके बाद ऊपर से बारीक कटा हुआ ताजा हरा धनिया बुरकें। आपकी गरमागरम, स्वादिष्ट दाल तड़का पूरी तरह तैयार है। इसे तंदूरी रोटी, फूली हुई चपाती, बटर नान या फिर जीरा राइस के साथ गर्मागर्म परोसें।



















