दस साल पहले मेटलाइफ स्टेडियम में जो दर्द लियोनेल मेस्सी को मिला था, रविवार को वही मैदान अर्जेंटीना और स्पेन के बीच फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल की मेजबानी करेगा और मेस्सी के पास उस दर्द को मिटाने का मौका होगा।
2016 की वो रात, जब मेस्सी टूट गए थे
यह वही स्टेडियम है जहां 2016 के कोपा अमेरिका सेंटेनारियो फाइनल में अर्जेंटीना को चिली के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में हार मिली थी और खुद मेस्सी अपनी किक चूक गए थे। मैच के बाद मेस्सी सब्स्टिट्यूट बेंच पर रोते हुए नजर आए थे और उसी रात उन्होंने इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास लेने का चौंकाने वाला ऐलान कर दिया था। उस वक्त मेस्सी ने कहा था, "मेरे लिए नेशनल टीम के साथ यह खत्म है, मैंने बहुत कोशिश की।" इस बयान ने पूरे फुटबॉल जगत को हिला दिया और अर्जेंटीना में तब 29 साल के मेस्सी से फैसला बदलने की अपील करते हुए एक बड़ा अभियान शुरू हो गया था।
15 साल के फैन से टीम के भरोसेमंद खिलाड़ी तक
उस वक्त मेस्सी से गुजारिश करने वालों में 15 साल के एक फैन एंजो फर्नांडीज भी शामिल थे, जिन्होंने सोशल मीडिया पर मेस्सी से संन्यास का फैसला बदलने की अपील की थी। फर्नांडीज ने लिखा था कि मेस्सी को "मस्ती के लिए टीम में बने रहना चाहिए, जो इन लोगों ने आपसे छीन लिया है।" फाइनल से पहले फर्नांडीज का यह पुराना पोस्ट एक बार फिर सामने आया है। दस साल बाद अब फर्नांडीज सिर्फ एक फैन नहीं रहे, बल्कि अर्जेंटीना के सबसे अहम मिडफील्डरों में शुमार हो चुके हैं और लियोनेल स्कालोनी की टीम में मेस्सी के साथ लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप जीतने के इरादे से मैदान में उतरेंगे।
स्पेन की मजबूत रक्षापंक्ति
अर्जेंटीना और खिताब के बीच स्पेन की टीम खड़ी है, जो इस टूर्नामेंट की सबसे मजबूत डिफेंस साबित हुई है। कोच लुइस दे ला फुएंते की टीम ने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ एक गोल खाया है और किसी भी पुरुष वर्ल्ड कप में छह क्लीन शीट रखने वाली पहली टीम बन गई है। केप वर्ड के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ से शुरुआत करने के बाद स्पेन ने लगातार छह मैच जीते और ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल, बेल्जियम व फ्रांस को हराकर फाइनल में जगह बनाई। यूरोपियन चैंपियन स्पेन 37 मैचों से अजेय हैं और 2010 की जीत के बाद अपना दूसरा वर्ल्ड कप खिताब जीतने के इरादे से उतरेंगे।
नॉकआउट में अर्जेंटीना का जुझारूपन
डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना को नॉकआउट राउंड में बार बार मुश्किल हालात से जूझना पड़ा है। सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ मैच इसकी मिसाल है, जहां पीछे चल रही अर्जेंटीना के लिए एंजो फर्नांडीज ने बराबरी का गोल किया और फिर लौटारो मार्टिनेज ने आखिरी मिनटों में गोल दागकर टीम को 2-1 से जीत दिलाई। इस जीत के साथ स्कालोनी की टीम का लगातार जीत का सिलसिला 14 मैच तक पहुंच गया, जो किसी भी दक्षिण अमेरिकी टीम की सबसे लंबी जीत की लय के बराबर है। रविवार को जीत के साथ अर्जेंटीना 1962 में ब्राजील के बाद वर्ल्ड कप खिताब बचाने वाली दूसरी टीम बन सकती है।
दोनों टीमों का बराबरी का रिकॉर्ड
फाइनल में उतरने वाली दोनों टीमों का आपसी रिकॉर्ड लगभग बराबर है, दोनों ने छह छह मैच जीते हैं और दो मुकाबले ड्रॉ रहे हैं। वर्ल्ड कप में दोनों टीमों की इकलौती भिड़ंत 1966 में हुई थी, जिसमें अर्जेंटीना ने 2-1 से जीत दर्ज की थी। दोनों टीमों का सबसे हालिया मुकाबला 2018 में एक इंटरनेशनल फ्रेंडली मैच था, जिसमें स्पेन ने 6-1 से जीत हासिल की थी।
फाइनल जैसे जैसे नजदीक आ रहा है, सबकी निगाहें मेस्सी पर टिकी हैं। करीब दस साल पहले इसी मैदान से रोते हुए और अपने इंटरनेशनल करियर पर सवाल उठाते हुए निकले मेस्सी के पास अब मौका है कि वह अपने सबसे बड़े दर्द की जगह को अपने करियर की सबसे यादगार जीत के मंच में बदल दें।



















