घरेलू मनोरंजन के शौकीनों के लिए अल्ट्रा शॉर्ट थ्रो यानी UST प्रोजेक्टर एक खास विकल्प बनते जा रहे हैं, क्योंकि ये दीवार के बेहद पास रखकर भी 80 से 150 इंच का बड़ा डिस्प्ले तैयार कर देते हैं। नेक्सीगो ऑरोरा प्रो MKII ट्रिपल लेजर डीएलपी तकनीक पर आधारित एक ऐसा ही मॉडल है, जो पिक्सल शिफ्टेड 4K रेजोल्यूशन के साथ पेश किया गया है। इसका थ्रो रेशियो 0.21:1 है, जिसका सीधा अर्थ है कि छोटे कमरों में भी बिना ज्यादा दूरी बनाए एक विशाल सिनेमाई पर्दा तैयार किया जा सकता है। इसमें इनबिल्ट 60W का साउंड सिस्टम मौजूद है, जिसमें दो 15W वूफर्स और दो 15W ट्वीटर्स शामिल किए गए हैं। कनेक्टिविटी के मामले में यह तीन HDMI 2.1 पोर्ट्स से लैस है, जिनमें से एक पोर्ट eARC को सपोर्ट करता है। हालांकि, इतने आधुनिक हार्डवेयर के बावजूद यह डिवाइस कुछ अहम मोर्चों पर काफी बुनियादी नजर आती है, खासकर जब बात इंस्टॉलेशन और कलर ट्यूनिंग की हो।
सिनेमाई अनुभव और कमरे की लाइटिंग
होम थिएटर सेटअप में इस प्रोजेक्टर का प्रदर्शन मिलाजुला रहता है। इसका सबसे मजबूत पहलू इसका बेहतरीन कंट्रास्ट है, जो अंधेरे और उजाले दोनों तरह के दृश्यों में काले रंग की गहराई को बनाए रखता है। डीप ब्लैक्स की वजह से विजुअल्स में एक शानदार डेप्थ नजर आती है और दृश्य सपाट या फीके नहीं लगते। मोशन हैंडलिंग के मामले में भी यह काफी सक्षम है। यदि इसे एप्पल टीवी या एनवीडिया शील्ड जैसे ऐसे स्ट्रीमिंग डिवाइस के साथ इस्तेमाल किया जाए जो फ्रेम रेट मैचिंग सपोर्ट करते हैं, तो यह फिल्मों और वेब शोज से जडर को पूरी तरह हटाकर स्मूथ मोशन पेश करता है।
हालांकि रोशनी को लेकर इसकी सीमाएं साफ उजागर होती हैं। पूरी तरह अंधेरे कमरे में इसकी ब्राइटनेस पर्याप्त पंच पैदा करती है, लेकिन यदि कमरे में सामान्य एम्बिएंट लाइटिंग या खिड़की से धूप आ रही हो, तो तस्वीर धुल जाती है और चमक फीकी पड़ जाती है। इसके अलावा, फैक्ट्री सेटिंग्स पर इसकी कलर एक्यूरेसी काफी कमजोर है। आउट ऑफ द बॉक्स तस्वीर में एक ठंडा नीला टोन दिखाई देता है, जिससे रंग मूल फिल्ममेकर के विजन से भटक जाते हैं। कलर वॉल्यूम कम होने की वजह से विजुअल्स में जीवंतता की कमी खलती है और वे डल नजर आते हैं। जिन दर्शकों की आंखें रेनबो इफेक्ट के प्रति संवेदनशील हैं, उन्हें सिंगल चिप डीएलपी मैकेनिज्म की वजह से बीच-बीच में रंगों की चमक परेशान कर सकती है। पेशेवर कैलिब्रेशन करने पर इसके रंगों की सटीकता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया जा सकता है।
गेमिंग क्षमताएं और रिस्पॉन्सिवनेस
गेमर्स के लिए यह प्रोजेक्टर कई आधुनिक फीचर्स के साथ आता है। इसमें 60Hz पर 4K आउटपुट मिलता है, जिससे अधिकतम शार्पनेस हासिल होती है। यदि हाई फ्रेम रेट और तेज गति पहली पसंद हो, तो इसे 120Hz या 240Hz पर 1080p रेजोल्यूशन में चलाया जा सकता है। स्क्रीन टियरिंग रोकने के लिए इसमें वीआरआर सपोर्ट मौजूद है और लेटेंसी घटाने के लिए ऑटो लो लेटेंसी मोड यानी ALLM दिया गया है। इनपुट लैग इतना कम रहता है कि कैजुअल और स्टोरी-ड्रिवन गेमिंग में कंट्रोल काफी रिस्पॉन्सिव महसूस होते हैं। डीएलपी इमेजिंग की तेज स्विचिंग गति की वजह से मोशन ब्लर न के बराबर रहता है।
लेकिन गेमिंग के दौरान भी कुछ तकनीकी सीमाएं ध्यान देने योग्य हैं। जब प्रोजेक्टर को 240Hz रिफ्रेश रेट पर सेट किया जाता है, तब इसका वीआरआर फीचर काम नहीं करता। ई-स्पोर्ट्स और बेहद प्रतिस्पर्धी मल्टीप्लेयर टाइटल्स खेलने वालों के लिए इसका इनपुट लैग हल्का सा ज्यादा लग सकता है, जहां हर मिलीसेकंड मायने रखता है। इसके अलावा, रंगों की मद्धिम प्रकृति की वजह से जीवंत ग्राफ़िक्स वाले नए गेम्स उतने खिलकर सामने नहीं आते जितने आने चाहिए।
सेटअप की जटिलता और पोर्टेबिलिटी की चुनौतियां
डिवाइस का भौतिक आकार और इसकी इंस्टॉलेशन प्रक्रिया कुछ हद तक असुविधाजनक साबित हो सकती है। इसका वजन काफी ज्यादा है और इसका आकार बड़ा है, जिसके चलते इसे बेडरूम या किसी छोटे कमरे में स्थापित करना आसान नहीं रहता। इसमें लेंस शिफ्ट या ऑप्टिकल जूम लेंस जैसे आधुनिक फीचर्स नहीं दिए गए हैं, बल्कि यह पूरी तरह से मैनुअल फोकस और मैनुअल कीस्टोन करेक्शन पर निर्भर करता है। स्क्रीन के साथ फ्रेम को पूरी तरह संरेखित करने में काफी धैर्य और समय खर्च करना पड़ता है।
यही कारण है कि इसे आउटडोर उपयोग या बार-बार एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं माना जा सकता। इसमें न तो कोई कैरिंग केस मिलता है, न लेंस सुरक्षा ढक्कन और न ही उठाने के लिए कोई हैंडल। रात के समय खुले लॉन में कुछ हल्की लाइटों के साथ इसे चलाया तो जा सकता है, लेकिन शाम की रोशनी या दिन के उजाले में यह काम नहीं करता। इसका एक सकारात्मक पहलू इसका बेहद शांत कूलिंग फैन है, जिससे कम आवाज में फिल्म देखते समय भी पंखे का शोर ध्यान नहीं भटकाता।
ऑपरेटिंग सिस्टम और कनेक्टिविटी की स्थिति
सॉफ्टवेयर के स्तर पर नेक्सीगो का अपना अलग ऑपरेटिंग सिस्टम इसमें दिया गया है, जो फोन, टैबलेट या लैपटॉप से वायरलेस कंटेंट कास्टिंग की अनुमति तो देता है, लेकिन इसमें नेटिव ओटीटी ऐप्स मौजूद नहीं हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो या यूट्यूब देखने के लिए यूजर को अनिवार्य रूप से एक बाहरी स्ट्रीमिंग डोंगल या मीडिया प्लेयर लगाना होगा। इसमें इनबिल्ट बैटरी भी नहीं है, लिहाजा इसे लगातार मेन पावर सॉकेट से जोड़े रखना जरूरी है। तीन आधुनिक एचडीएमआई पोर्ट्स साउंडबार और मल्टीपल गेमिंग कंसोल को एक साथ जोड़ने के लिए पर्याप्त लचीलापन देते हैं।


















