एक घटना में जब गाड़ी के भीतर बंदूक नुमा चीज दिखाई दी, तो गनीमत रही कि उससे गोलियां नहीं बल्कि पानी वाले ऑर्बीज छर्रे निकल रहे थे। हालांकि, इस पूरे मामले ने वेमो के इन-केबिन सर्विलांस नेटवर्क की हकीकत सबको दिखा दी। कंपनी ने स्पष्ट किया कि उसकी टैक्सियां विशेष ऑटोमेटेड तकनीक से लैस हैं, जो कार के भीतर असलहे की मौजूदगी भांपकर चेतावनी जारी कर सकती हैं। आधुनिक ड्राइवरलेस गाड़ियों की बाहरी बनावट कैमरों से पटी होती है, जिससे गाड़ी आसपास के रास्तों को देख पाती है। इसके अलावा रडार और लिडार जैसे उन्नत सेंसर भी रास्ते की टोह लेते हैं। लेकिन गाड़ियों के केबिन के भीतर छिपे कैमरों पर लोगों का ध्यान अपेक्षाकृत कम जाता है, जिन्हें कंपनियां सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और नियम कायदे लागू करने के लिए बेहद जरूरी बताती हैं।
केबिन की निगरानी और सुरक्षा नियमों की पड़ताल
इस साल की शुरुआत में कैलिफोर्निया में सफर कर रहे कई यात्रियों के साथ अजीब वाकया पेश आया। बीस से तीस वर्ष के कई वयस्क मुसाफिरों ने बताया कि सफर के बीच में ही गाड़ी के इंटरकॉम से अचानक कर्मचारियों ने बोलना शुरू कर दिया, ताकि वे तस्दीक कर सकें कि मुसाफिर अकेले सफर करने की तय उम्र पूरी कर चुके हैं या नहीं। वहां मौजूद एक 35 वर्षीय यात्री को लगा कि उसकी पीठ पर टंगे बैग के कारण सिस्टम ने गलत अंदेशा जताया। रोबोटैक्सी ऑपरेटरों की प्राइवेसी नीतियां काफी व्यापक और खुली होती हैं। इन नीतियों में लिखा होता है कि केबिन के भीतर की फुटेज कई सामान्य कामों में इस्तेमाल हो सकती है, जैसे दो फेरों के बीच कार की सफाई देखना या किसी छूटे हुए सामान का पता लगाना। लेकिन साथ ही यह भी लिखा होता है कि कंपनियां अपने उत्पादों और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए भी इन फुटेज का इस्तेमाल कर सकती हैं।
कानूनी ढिलाई और कंपनियों पर निर्भर मुसाफिर
व्यापक नियमों के तहत कंपनियां फुटेज का दायरा अपनी मर्जी से बहुत बड़ा कर सकती हैं। अमेरिका में इस तरह की अंदरूनी निगरानी पर अंकुश लगाने वाले स्पष्ट नियम कायदे बेहद सीमित हैं, क्योंकि ऐप के जरिए सवारी बुक करने से पहले ग्राहकों को बारीक अक्षरों में लिखी लंबी चौड़ी सेवा शर्तों पर सहमति देनी पड़ती है। इसके चलते मुसाफिर केवल इस भरोसे पर निर्भर रह जाते हैं कि कंपनियां उनकी निजी जानकारी का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करेंगी। इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन में सर्विलांस और पुलिसिंग मामलों के सीनियर पॉलिसी एनालिस्ट मैथ्यू गुआरिग्लिया ने आगाह किया है कि उपभोक्ता प्राइवेसी और कंपनियों द्वारा डेटा के इस्तेमाल के मामले में नीति नियंताओं ने आम लोगों को एक तरह से बेसहारा छोड़ दिया है। उनका कहना है कि गाड़ी में अकेले होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप सचमुच अकेले हैं, बल्कि आपको यह मानकर चलना चाहिए कि अगली सीट पर कोई सतर्क व्यक्ति बैठा आपको देख रहा है।
विभिन्न कंपनियों के नियम और स्वचालित जांच व्यवस्था
सामान्य तौर पर वेमो, जूक्स और टेस्ला जैसी कंपनियां दावा करती हैं कि केबिन कैमरों की फुटेज इंसानी कर्मचारी केवल जरूरी होने पर ही देखते हैं। हालांकि, सभी कंपनियों की नीतियों में दर्ज है कि रिकॉर्डिंग समेत निजी डेटा जरूरत पड़ने पर पुलिस, जांच एजेंसियों या नियामकों को सौंपा जा सकता है। वेमो के एक सहायता पृष्ठ पर उल्लेख है कि डेटा मांगने वाली सरकारी एजेंसियों को वैध कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद केबिन के कैमरे हर वक्त चालू रहते हैं और लगातार काम करते हैं। वेमो की प्रवक्ता जूलिया इलिना के अनुसार, कंपनी संभावित उल्लंघनों की पहचान करने में टीमों की मदद के लिए ऑटोमेटेड तकनीक का उपयोग करती है। इसके अलावा 2025 के एक पेटेंट में ऐसी व्यवस्था का जिक्र है जहां इन-केबिन कैमरा सिस्टम यात्रा से पहले, यात्रा के दौरान और यात्रा के बाद स्वचालित चेकलिस्ट पूरी करता है, हालांकि इलिना ने यह साफ नहीं किया कि यह सिस्टम अभी चालू है या नहीं।
डेटा कलेक्शन और अलग-अलग कंपनियों के तौर तरीके
अमेज़न के स्वामित्व वाली कंपनी जूक्स की वेबसाइट पर दर्ज है कि उसके केबिन कैमरे पूरी सवारी को रिकॉर्ड करते हैं। इस निजी डेटा का इस्तेमाल गाड़ियों के परिचालन के साथ-साथ उत्पाद के विकास और सुधार के लिए भी किया जा सकता है। जूक्स का कहना है कि वह ग्राहकों और सपोर्ट कर्मचारियों के बीच होने वाली बातचीत रिकॉर्ड कर सकती है, लेकिन उन रिकॉर्डिंग्स को हमेशा के लिए सहेज कर नहीं रखती। जूक्स की प्रवक्ता व्हिटनी जेंक्स ने प्राइवेसी नीतियों को लेकर अतिरिक्त ब्योरा देने से मना कर दिया। दूसरी ओर, टेस्ला की रोबोटैक्सी सेवा के ऑनलाइन दस्तावेजों के अनुसार, जब भी केबिन कैमरा चालू होता है तो गाड़ी की केंद्रीय टचस्क्रीन पर एक हरा इंडिकेटर जलने लगता है। यात्री ऐप के डेटा और प्राइवेसी सेक्शन में जाकर वीडियो और ऑडियो साझा करने का विकल्प चुन सकते हैं। दस्तावेजों में यह भी स्पष्ट है कि कंपनी के अर्ली एक्सेस कार्यक्रम में शामिल मुसाफिरों का डेटा शेयरिंग विकल्प अपने आप चालू रहता है। टेस्ला ने सितंबर की शुरुआत में टेक्सास और फ्लोरिडा के कुछ शहरों में अपनी रोबोटैक्सी ऐप आम जनता के लिए खोली थी।
निगरानी की जरूरत और ऑटो कंपनियों का पिछला रिकॉर्ड
खाली चलती कार में निगरानी रखना कई मायनों में स्वाभाविक भी लगता है। कंज्यूमर रिपोर्ट्स में टेक्नोलॉजी पॉलिसी के निदेशक जस्टिन ब्रुकमैन का मानना है कि बिना ड्राइवर वाली गाड़ी में लोगों की हरकतों पर नजर रखना जरूरी है, वरना लोग मनमानी करने लगेंगे। हालांकि, मौजूदा कानून अब तक यह तय नहीं कर पाए हैं कि इन कंपनियों को क्या देखने, क्या सहेजने और क्या इस्तेमाल करने की छूट होनी चाहिए। ब्रुकमैन के अनुसार, ये गाड़ियां अभी नई हैं इसलिए क्या उचित है और क्या नहीं, इसे लेकर कोई तय पैमाना नहीं बना है। ऑटोमोबाइल कंपनियों का डेटा प्राइवेसी को लेकर रिकॉर्ड भी बहुत अच्छा नहीं रहा है। वर्ष 2023 में यह सामने आया था कि टेस्ला के कर्मचारियों के समूहों ने कई वर्षों के दौरान मालिकों की कारों द्वारा रिकॉर्ड की गई बेहद संवेदनशील तस्वीरें और वीडियो आपस में साझा किए थे। इनमें कार के पास आते एक नग्न व्यक्ति का वीडियो और एक साइकिल सवार बच्चे की कार से टक्कर की फुटेज शामिल थी। टेस्ला जहां अपने विशाल डेटा भंडार को सॉफ्टवेयर सुधार का साधन बताती है और डेटा गुमनाम रखने का दावा करती है, वहीं पूर्व कर्मियों के अनुसार सिस्टम से फुटेज की लोकेशन आसानी से पता चल जाती थी। इसके अलावा इसी साल जनरल मोटर्स ने बिना सहमति ड्राइविंग डेटा दलालों और बीमा कंपनियों को बेचने पर कैलिफोर्निया के वाहन चालकों को हर्जाने के रूप में करीब 13 मिलियन डॉलर चुकाए हैं। गुआरिग्लिया आगाह करते हैं कि वाहन निर्माता डेटा जुटाने के शौकीन हैं और स्वायत्त वाहनों के साथ उन्हें और ज्यादा डेटा मिलेगा, जिसे बाद में बेचने के नए बहाने तलाशे जाएंगे। तब तक मुसाफिरों के लिए सलाह यही है कि वे कार में सलीके से रहें।



















