फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित प्रसिद्ध एफिल टावर पर एक हिंदू धार्मिक प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान पैदा हुआ विवाद अब आधिकारिक जांच के नतीजों के बाद शांत होता दिख रहा है। बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था, जिसे संक्षेप में BAPS के नाम से जाना जाता है, पर आरोप लगे थे कि उनके दल के दौरे के दौरान एफिल टावर के विजिटर रूट से महिला कर्मचारियों को हटाने या उनकी जगह पुरुष कर्मियों को तैनात करने की मांग की गई थी। हालांकि, पूरे मामले की आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि संस्था की तरफ से महिला स्टाफ को हटाने, छिपाने या अलग रखने को लेकर कोई भी अनुरोध नहीं किया गया था। इस निष्कर्ष के सामने आने के बाद संस्था ने आधिकारिक वक्तव्य जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
आधिकारिक जांच के निष्कर्ष और BAPS का पक्ष
बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था वैश्विक स्तर पर स्वामीनारायण संप्रदाय की एक प्रमुख सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक हिंदू संस्था के तौर पर कार्यरत है और यह फ्रांस में पहले पारंपरिक हिंदू मंदिर से भी जुड़ी है। मामले की आधिकारिक पड़ताल के परिणाम सार्वजनिक होने के बाद BAPS हिंदू मंदिर ऑफ पेरिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना आधिकारिक बयान जारी किया। संस्था ने अपने बयान में सबसे पहले उन महिला कर्मियों के प्रति चिंता और सहानुभूति व्यक्त की, जो इस पूरे घटनाक्रम और गलतफहमी से किसी भी तरह प्रभावित हुई थीं।
संस्था ने शुरू से ही अपना रुख साफ रखा था कि एफिल टावर के आगंतुक मार्ग यानी विजिटर रूट पर काम करने वाली महिला कर्मचारियों को हटाने, छिपाने या अलग रखने के संबंध में उनकी ओर से कभी कोई निर्देश या आग्रह नहीं किया गया था। आधिकारिक जांच रिपोर्ट ने भी संस्था के इसी बयान पर अपनी मुहर लगाई है। जांच में स्पष्ट तौर पर पाया गया कि महिलाओं को उनके तय कार्यक्षेत्र से अलग करने के पीछे संस्था का कोई हाथ या मांग नहीं थी।
ऑपरेशनल कमियां और संवादहीनता बनी विवाद की वजह
यह विवाद तब गरमाया था जब कुछ शुरुआती दावों में कहा गया कि हिंदू प्रतिनिधिमंडल के एफिल टावर भ्रमण के समय महिला कर्मचारियों को अपने निर्धारित स्थानों से हटाकर अन्य हिस्सों में भेज दिया गया और उनके स्थान पर पुरुष कर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई। इस घटना के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। हालांकि, आधिकारिक जांच के विवरण से पता चलता है कि यह पूरी स्थिति मौके पर मौजूद प्रबंधन की परिचालन संबंधी गलतियों और दोनों पक्षों के बीच आपसी संवाद के अभाव के कारण उत्पन्न हुई थी।
स्थानीय संचालन और समन्वय में हुई चूकों की वजह से कुछ महिला कर्मियों की तैनाती में बदलाव हुआ था। BAPS ने पुरजोर शब्दों में कहा कि प्रशासनिक और परिचालन स्तर पर हुई इस गड़बड़ी को किसी भी सूरत में संस्था के निर्देश या मांग के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। मंदिर प्रबंधन ने भरोसा जताया कि जांच रिपोर्ट के तथ्यात्मक निष्कर्ष सामने आने के बाद मामले के सभी वास्तविक पहलुओं को सही परिप्रेक्ष्य में समझने में मदद मिलेगी।
सम्मानपूर्वक समाधान और आगे बढ़ने की अपील
अपने वक्तव्य के अंत में संस्था ने उम्मीद जताई कि इस आधिकारिक स्पष्टीकरण और जांच के साफ नतीजों के बाद इस मामले से जुड़ा हर पक्ष सम्मान और सौहार्द के साथ आगे बढ़ सकेगा। संस्था ने दोहराया कि उनका उद्देश्य हमेशा सामाजिक सद्भाव बनाए रखना रहा है और एफिल टावर दौरे के समय आगंतुकों के मार्ग से महिला कर्मचारियों को हटाने की न तो कोई मंशा थी और न ही ऐसी कोई मांग दर्ज कराई गई थी।


















