विश्व झील दिवस के अवसर पर गुजरात के अमरेली जिले स्थित दुधला गांव में एक वृहद जल संरक्षण परियोजना का आधिकारिक लोकार्पण सम्पन्न हुआ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 21 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में निर्मित 'गुजरात गौरव सरोवर' का उद्घाटन किया। यह कृत्रिम सरोवर 40 करोड़ लीटर जल भंडारण की क्षमता रखता है। इस परियोजना का निर्माण हरिकृष्ण ग्रुप और ढोलकिया फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों से पूरा किया गया है। उद्घाटन समारोह के दौरान अमित शाह ने राज्य के लंबे जल संकट और उसे दूर करने के लिए दशकों से चले आ रहे प्रशासनिक व सामाजिक प्रयासों को विस्तार से रेखांकित किया।
अमित शाह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह नया सरोवर अमरेली और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भूजल स्तर को सुधारने में बेहद कारगर साबित होगा। उन्होंने बताया कि जल संरक्षण की इस तरह की निजी और सामुदायिक पहलें राज्य के कृषि परिदृश्य को बदलने में सक्षम हैं।
नर्मदा परियोजना का इतिहास और दशकों का इंतजार
समारोह के दौरान गृह मंत्री ने नर्मदा परियोजना के लंबे और संघर्षपूर्ण इतिहास को याद किया। उन्होंने बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने साल 1964 में रखी थी। अमित शाह ने एक व्यक्तिगत संदर्भ साझा करते हुए उल्लेख किया कि उनका जन्म भी उसी वर्ष 1964 में हुआ था। हालांकि, नींव रखे जाने के बावजूद यह परियोजना कई दशकों तक राजनीतिक और प्रशासनिक रुकावटों के कारण अधर में लटकी रही।
शाह के अनुसार, नर्मदा परियोजना के मुख्य द्वार तब जाकर खोले गए जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद केंद्र सरकार ने परियोजना के मार्ग में आ रही सभी पुरानी बाधाओं को तेजी से दूर किया। इसके बाद नर्मदा नदी का पानी सौराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों और कच्छ के सुदूर खावड़ा क्षेत्र तक सुगमता से पहुंच सका। इस कदम ने गुजरात के विशाल भूभाग को भीषण जल संकट से स्थायी मुक्ति दिलाई।
2001 के बाद जल संकट से निपटने की रणनीति
गुजरात में सूखे के पुराने दौर का स्मरण करते हुए अमित शाह ने 1985, 1986 और 1987 के भयावह सूखे के वर्षों का उल्लेख किया। उन वर्षों में राज्य के कई हिस्सों में पीने के पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया था और बड़े पैमाने पर राहत कार्य चलाने पड़े थे। उन्होंने कहा कि परिस्थिति में वास्तविक बदलाव तब शुरू हुआ जब साल 2001 में नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में बागडोर संभाली।
मुख्यमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी ने जल संचयन और सिंचाई के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए दूरगामी नीतियां लागू कीं। इस दिशा में एक बड़ा कीर्तिमान साल 2003 में स्थापित हुआ, जब राज्य सरकार ने मात्र एक वर्ष की लघु अवधि में 1.5 लाख चेक डैम का निर्माण पूरा कर दिखाया। इस विशाल कदम से राज्य के लाखों किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलना आसान हुआ और राज्य का कृषि उत्पादन तेजी से बढ़ा।
सौनी योजना से लेकर जल शक्ति मंत्रालय तक की भूमिका
राज्य और केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं का ब्योरा देते हुए अमित शाह ने 'सौनी योजना' के महत्व पर प्रकाश डाला। इस योजना के माध्यम से नर्मदा नदी के अतिरिक्त पानी को सौराष्ट्र के विभिन्न बांधों तक मोड़ा गया और प्रमुख नदियों को आपस में जोड़ा गया। वहीं उत्तर गुजरात के सूखा प्रभावित जिलों में 'सुजलाम सुफलाम योजना' ने जल स्तर बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाई। इसके साथ ही ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीकों को अपनाकर पानी की बर्बादी को न्यूनतम स्तर पर लाया गया।
केंद्रीय स्तर की पहलों की चर्चा करते हुए शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र में आने के बाद 'जल शक्ति मंत्रालय' का गठन किया। इससे जल संरक्षण के प्रयासों को एक संगठित और संस्थागत रूप मिला। केंद्र के 'कैच द रेन' अभियान ने देश भर में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया। इसके अतिरिक्त, पुराने बांधों की सुरक्षा समीक्षा और सिंचाई क्षमता के विस्तार के लिए निरंतर काम किया जा रहा है।
ढोलकिया फाउंडेशन के प्रयास और गगाडिया नदी का पुनरुद्धार
अमित शाह ने गुजरात गौरव सरोवर के निर्माण में हरिकृष्ण फाउंडेशन के संस्थापक सावजीभाई ढोलकिया के योगदान की विशेष रूप से सराहना की। सावजीभाई ढोलकिया ने दो वर्ष पूर्व शाह के समक्ष इस झील के निर्माण की योजना प्रस्तुत की थी। दो वर्षों के निरंतर कार्य के बाद यह झील पूरी तरह तैयार हुई है, जिसकी लंबाई 360 मीटर, चौड़ाई 260 मीटर और गहराई 4 मीटर है।
ढोलकिया फाउंडेशन द्वारा अमरेली क्षेत्र में किए गए जल संरक्षण कार्यों का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि फाउंडेशन के प्रयासों से स्थानीय स्तर पर गगाडिया नदी को नवजीवन मिला है। इसके अलावा संस्था ने क्षेत्र में 208 नई झीलों का निर्माण भी कराया है। इन जल संरचनाओं के बनने से आसपास के सूखे कुएं दोबारा जल से भर गए हैं और भूजल स्तर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गृह मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की पहलों से समाज के सक्षम वर्ग को जल संरक्षण के कार्यों में आगे आने की प्रेरणा मिलेगी।





















