आर्थिक तंगी और आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे पाकिस्तान ने भारत से सटी अपनी तटीय सीमा पर अचानक सैन्य गतिविधियों को बढ़ा दिया है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में अलग होने की बढ़ती आवाजों और भारी कर्ज के बोझ के बीच इस्लामाबाद ने सर क्रीक के संकरे और कीचड़ भरे इलाके में नई चालबाजी शुरू की है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा सार्वजनिक तौर पर कर्ज मांगने में शर्म महसूस करने की बात स्वीकार करने के बावजूद पाकिस्तान की सेना भारत विरोधी साजिशों से पीछे नहीं हट रही है। गुजरात सीमा के पास स्थित सर क्रीक के दलदली जलमार्ग में पाकिस्तान ने चीन और तुर्की की मदद से प्रोजेक्ट अबाबील (द डिवाइन स्ट्राइक) नाम से एक गुप्त सैन्य अभियान शुरू किया है, जिससे अरब सागर से सटे इस संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।
सर क्रीक के दलदल में पाकिस्तान का सीक्रेट ऑपरेशन
रक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार पाकिस्तान की नौसेना ने सर क्रीक के जटिल और दलदली क्षेत्र में अपने सबसे घातक और विशेष रूप से प्रशिक्षित कमांडो दस्ते को तैनात किया है। नेवल स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG-N) नाम की यह बेहद गुप्त स्पेशल ऑपरेशन्स फोर्स समंदर, हवा और जमीन पर गुप्त अभियानों को अंजाम देने के लिए जानी जाती है। इन कमांडोज को अत्यधिक जोखिम वाले मिशनों और अचानक हमले करने का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त है। सर क्रीक की भौगोलिक बनावट बेहद कठिन है, जहां सामान्य पैदल सेना या भारी सैन्य वाहनों की आवाजाही आसान नहीं होती। यही कारण है कि पाकिस्तान ने अपनी इस स्पेशल फोर्स को अग्रिम चौकियों पर तैनात करके भारतीय सीमा के निकट अपनी आक्रामक स्थिति को मजबूत करने का प्रयास किया है।
चीन और तुर्की से मिली आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल
इस सीक्रेट प्रोजेक्ट की आड़ में पाकिस्तान ने अपनी तटीय सीमा पर अत्याधुनिक विदेशी हथियारों और सैन्य उपकरणों की बड़ी खेप उतार दी है। इस पूरे सैन्य जमावड़े में चीन और तुर्की की भूमिका मुख्य रणनीतिक साझीदार के रूप में सामने आई है। सीमा पर लगातार निगरानी और अचानक हमले की क्षमता विकसित करने के लिए पाकिस्तान ने कई नए हथियार प्रणालियों को शामिल किया है।
तुर्की से पाकिस्तान को बेहद उन्नत कातिल ड्रोन मिले हैं, जो सीमाओं पर 24 घंटे लगातार निगरानी करने में सक्षम हैं। ये मानवरहित हवाई वाहन न केवल टोह लेने का काम करते हैं, बल्कि भारी मात्रा में बारूद और सटीक विस्फोटक सामग्री ले जाकर पूर्व-निर्धारित लक्ष्यों पर अचानक हमला भी कर सकते हैं। इसके साथ ही सर क्रीक के उथले पानी और कीचड़ भरे रास्तों में तेज़ी से आगे बढ़ने के लिए चीन के आधुनिक होवरक्राफ्ट और हाई-स्पीड नेवल गश्ती असॉल्ट बोट्स तैनात किए गए हैं। ये होवरक्राफ्ट दलदल के ऊपर आसानी से तैरते हुए हमलावर गतिविधियों को अंजाम देने की क्षमता रखते हैं।
इस पूरे तंत्र को सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात किया गया है। यह नया एयर डिफेंस नेटवर्क पाकिस्तान सेना की हाल ही में गठित रॉकेट फोर्स के साथ सीधे रियल-टाइम तालमेल बिठाकर काम करता है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना या वायुसेना की किसी भी हलचल पर तुरंत प्रतिक्रिया देना और बाहरी खतरों से अपनी तटीय चौकियों की रक्षा करना है। इसके अतिरिक्त अरब सागर और सर क्रीक में भारतीय नौसेना को सीधी चुनौती देने के इरादे से पाकिस्तान ने अनमैन्ड एरियल और अनमैन्ड सी-ड्रोन को अपने नौसैनिक ऑपरेशन्स में एकीकृत कर लिया है।
पाकिस्तानी नौसेना को मोहरा बना रहे बीजिंग और अंकारा
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान द्वारा सर क्रीक में दिखाई जा रही यह अचानक आक्रामकता उसकी अपनी सैन्य ताकत से अधिक चीन और तुर्की के सामरिक समर्थन का नतीजा है। बीजिंग और अंकारा मिलकर पाकिस्तानी नौसेना को भारत के खिलाफ एक प्रॉक्सी बल के रूप में तैयार कर रहे हैं। ये दोनों देश पाकिस्तान की थल, नभ और जल तीनों सेनाओं को आधुनिक हथियार, तकनीक और बुनियादी ढांचा मुहैया करा रहे हैं, जिसमें नौसेना पर सबसे अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
हाल ही में चीन ने अपनी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से निर्मित पहली हैंगर-क्लास पनडुब्बी की डिलीवरी पाकिस्तान नौसेना को सौंपी है। इस आधुनिक पनडुब्बी के बेड़े में शामिल होने से अरब सागर में पाकिस्तान की स्टेल्थ क्षमता यानी छिपकर हमला करने की ताकत में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही यह पनडुब्बी पाकिस्तान को पानी के भीतर से दूसरी बार हमला करने यानी सेकंड-स्ट्राइक क्षमता प्रदान करती है। इसके अलावा चीन की तकनीकी सहायता से तैयार किए गए आधुनिक तुगरिल-क्लास युद्धपोतों को भी पाकिस्तानी नौसेना के मुख्य बेड़े में आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया गया है।
नौसैनिक रणनीति में बड़ा बदलाव और नए सुरक्षा पोस्ट
अत्याधुनिक चीनी और तुर्की हथियारों से लैस होने के बाद पाकिस्तान ने अपनी पारंपरिक समुद्री डॉक्ट्रिन में व्यापक बदलाव किया है। अतीत में पाकिस्तान की नौसैनिक रणनीति मुख्य रूप से केवल अपने तटीय क्षेत्रों और कराची बंदरगाह की रक्षा तक ही सीमित थी। हालांकि अब वह अपनी पहुंच का विस्तार करते हुए अरब सागर, लाल सागर, फारस की खाड़ी और पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में स्थायी रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की योजना पर काम कर रहा है।
सर क्रीक के संवेदनशील जलमार्ग के आसपास रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों पर पाकिस्तान ने कई नए मरीन सिक्योरिटी पोस्ट का निर्माण कर लिया है। इन अग्रिम चौकियों के आसपास दर्जनों की संख्या में कोस्टल डिफेंस बोट्स, मरीन असॉल्ट क्राफ्ट, होवरक्राफ्ट और अत्यधिक तेज़ गति वाली गश्ती नौकाएं दिन-रात लगातार गश्त लगा रही हैं। इन रक्षात्मक और आक्रामक तैयारियों के कारण भारत-पाकिस्तान की समुद्री सीमा पर सैन्य तनाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है।
भारत की सुरक्षा के लिए रणनीतिक मायने और जवाबी तैयारी
सर क्रीक का यह दलदली और जटिल क्षेत्र भारत तथा पाकिस्तान दोनों के लिए हमेशा से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता रहा है। ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र की दुर्गम बनावट का फायदा उठाकर घुसपैठिए, आतंकवादी और नशीले पदार्थों के तस्कर भारतीय सीमा में प्रवेश करने का प्रयास करते रहे हैं। ऐसे में चीन और तुर्की की प्रत्यक्ष मदद से पाकिस्तान द्वारा इस इलाके में कमांडो, हमलावर ड्रोन, पनडुब्बियों और एडवांस एयर डिफेंस प्रणालियों की भारी तैनाती भारत के समक्ष एक बहुआयामी सुरक्षा चुनौती पेश करती है।
पाकिस्तान की इस चालबाजी का मुकाबला करने के लिए भारतीय रक्षा बल पूरी तरह सतर्क हैं। भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने सर क्रीक और अरब सागर के तटीय इलाकों में अपनी गश्त और निगरानी को कई गुना बढ़ा दिया है। भारतीय बल अत्याधुनिक रडार, गश्ती जहाजों और शक्तिशाली हथियार प्रणालियों के साथ सीमा पर चौबीसों घंटे तैनात हैं ताकि पाकिस्तान की किसी भी दुस्साहस का तुरंत और करारा जवाब दिया जा सके।



















