पेशाब में बार-बार जलन और संक्रमण को हल्के में न लें, जाने कैसे करें बचाव और क्यों जरूरी है डॉक्टर की सलाहचंडीगढ़ और मोहाली में मुफ़्त आईफोन बांटने के दावे पर प्रशासन का सख्त पहरा, आयोजक पर लटकी कानूनी तलवारकच्चे तेल में नरमी और कूटनीतिक उम्मीदों से अमेरिकी वायदा बाजारों में उछाल, ब्याज दरों पर भी टिकी नजरपश्चिमी उत्तर प्रदेश में 40 बुलडोजरों से नितिन नवीन का स्वागत, 2027 चुनावी शंखनाद के साथ मेरठ पहुंचे बीजेपी अध्यक्षगुजरात में ईमेल के जरिए बम धमाकों की धमकी, सोमनाथ मंदिर और भाजपा दफ्तरों में सघन तलाशीपलामू के कृषि वैज्ञानिक ने दी धान में संतुलित खाद डालने की सलाह, जानें सही अनुपात और समयआईआईटी बॉम्बे में छात्र की मौत के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला निलंबित, जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपी गईफरीदाबाद में पैकेटबंद जूस पीने से आठ साल का बच्चा गंभीर बीमार, परिजनों ने लगाया फंगस का आरोपघर पर बनाएं हलवाई जैसे रसीले और स्पंजी गुलाब जामुन, मिर्जापुर के कारीगर अंकित गुप्ता ने साझा किया सही अनुपातबैंक ऑफ जापान के फैसले के बाद येन दबाव में, पाउंड में मामूली बढ़त
जोधपुर में भारत और जापान का संयुक्त हवाई युद्धाभ्यास, लड़ाकू विमानों ने सीमा के पास परखी मारक क्षमताभारत
20 सित॰ 2026, 1:36 pm (1 दिन पहले)· 0

जोधपुर में भारत और जापान का संयुक्त हवाई युद्धाभ्यास, लड़ाकू विमानों ने सीमा के पास परखी मारक क्षमता

जोधपुर एयरबेस पर भारत और जापान की वायुसेनाओं का संयुक्त अभ्यास 'वीर गार्जियन 2026' अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है, जिसमें सुखोई, राफेल, तेजस और एफ-2ए विमानों ने कड़ा अभ्यास किया।

पश्चिमी सीमा के निकट रेगिस्तानी इलाके में भारतीय और जापानी लड़ाकू विमानों की गर्जना ने हवाई सामरिक गतिविधियों को नई ऊंचाई दी है। भारत और जापान की वायुसेनाओं के बीच आयोजित द्विपक्षीय युद्धाभ्यास 'वीर गार्जियन 2026' इस समय अपने निर्णायक और सबसे आक्रामक चरण में चल रहा है। अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जोधपुर एयरबेस से उड़ान भरकर दोनों देशों के युद्धक विमानों ने वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में सटीक निशाने साधने और दुश्मन के बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने का गहन अभ्यास किया।

इस पूरे अभ्यास में भारतीय वायुसेना और जापान की वायु रक्षा शाखा के पायलटों ने आपसी समन्वय के साथ कई मुश्किल हवाई अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। काल्पनिक युद्ध परिदृश्यों के तहत एयर स्ट्राइक और तीव्र डॉगफाइट के दांव-पेच आजमाए गए। दोनों देशों के बीच विकसित हो रहा यह तालमेल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावी माना जा रहा है।

ये भी पढ़ें

हवाई मोर्चे पर उतरे दोनों देशों के प्रमुख लड़ाकू विमान

चौदह दिनों की समयसीमा वाले इस व्यापक सैन्य अभ्यास में दोनों देशों ने अपने सबसे सक्षम और अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों को तैनात किया है। युद्धाभ्यास के दौरान दिन और रात दोनों समय कई जटिल सॉर्टियां भरी गईं ताकि आधुनिक हवाई युद्ध की हर चुनौती से निपटा जा सके। भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान एलसीए तेजस, अग्रिम पंक्ति के बहुउद्देशीय सुखोई-30 एमकेआई और उच्च तकनीक से लैस राफेल विमानों को अभ्यास का हिस्सा बनाया। वहीं जापानी एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स ने अपने अत्याधुनिक एफ-2ए लड़ाकू जेट्स को मैदान में उतारा, जिन्होंने भारतीय विमानों के साथ बेहतरीन परिचालन संतुलन दिखाया।

जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर रणनीतिक संवाद और जमीनी योजना

आसमान में मिसाइलों और बमबारी के कृत्रिम परिदृश्यों के अभ्यास के साथ ही जमीन पर भी रक्षा रणनीतिकारों ने साझा अभियानों की रूपरेखा तैयार की। जोधपुर स्थित एयरफोर्स स्टेशन पर दोनों वायुसेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों के बीच कई दौर की मिशन प्लानिंग कॉन्फ्रेंस आयोजित की गईं। इस संवाद में सिर्फ उड़ान के पहलुओं पर ही जोर नहीं दिया गया, बल्कि विमानों के त्वरित मेंटेनेंस, ग्राउंड इंजीनियरिंग की दक्षता और अंतरिक्ष सुरक्षा से जुड़े आधुनिक तकनीकी आयामों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच जमीनी और तकनीकी तालमेल को नई दिशा देना था।

वीर गार्जियन का दूसरा संस्करण और भारत में जापानी विमानों का पहला अभ्यास

जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के एफ-2 लड़ाकू विमानों की भारतीय धरती पर भागीदारी इस युद्धाभ्यास का मुख्य आकर्षण बनी हुई है। 'वीर गार्जियन 2026' का औपचारिक आगाज 9 सितंबर को हुआ था और यह 22 सितंबर तक संचालित होगा। दोनों देशों के बीच यह द्विपक्षीय अभ्यास का दूसरा संस्करण है। इसका पहला चरण वर्ष 2023 में 'वीर गार्जियन 23' के रूप में जापानी धरती पर आयोजित किया गया था, जहां भारतीय लड़ाकू विमानों ने पहली बार जापान जाकर संयुक्त युद्धाभ्यास में भाग लिया था। अब इस नए संस्करण के जरिए जापानी वायु रक्षा बल के लड़ाकू विमान पहली बार भारत में संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण का हिस्सा बने हैं।

परिचालन तालमेल और साझा अनुभव से दक्षता बढ़ाने पर जोर

इस युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों के पायलट और तकनीशियन एक-दूसरे की परिचालन प्रक्रियाओं, मानक संचालन विधियों और रणनीतिक तौर-तरीकों को करीब से समझ रहे हैं। किसी भी संभावित बहुपक्षीय या साझा मिशन में सुचारू संचार और समन्वय स्थापित करने के लिए यह अभ्यास एक ठोस मंच तैयार करता है। वास्तविक युद्ध जैसी कठिन परिस्थितियों में अपनी तकनीकी क्षमताओं की जांच करने और एक-दूसरे के बेहतरीन अनुभवों को अपनाने से दोनों देशों की वायुसेनाओं की तत्परता पहले से अधिक मजबूत हुई है।

सवाल-जवाब

वीर गार्जियन 2026 युद्धाभ्यास कब से कब तक आयोजित किया जा रहा है?
यह संयुक्त युद्धाभ्यास 9 सितंबर को शुरू हुआ था और 22 सितंबर तक चलेगा।
यह अभ्यास किस स्थान पर आयोजित किया जा रहा है?
यह अभ्यास अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 200 किलोमीटर दूर राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर संचालित हो रहा है।
इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना के कौन से लड़ाकू विमान शामिल हैं?
भारतीय वायुसेना ने इसमें स्वदेशी तेजस (एलसीए), सुखोई-30 एमकेआई और राफेल लड़ाकू विमानों को शामिल किया है।
जापान की ओर से किस लड़ाकू विमान ने भाग लिया?
जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स ने इस अभ्यास के लिए अपने अत्याधुनिक एफ-2ए लड़ाकू विमानों को तैनात किया है।
क्या जापानी लड़ाकू विमानों का यह भारत में पहला अभ्यास है?
हां, यह जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के लड़ाकू विमानों का भारत में आयोजित पहला संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास है।
वीर गार्जियन का पहला संस्करण कब और कहां हुआ था?
वीर गार्जियन का पहला संस्करण वर्ष 2023 में जापान में आयोजित किया गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·23 घंटे पहले

आधुनिक हवाई युद्ध रणनीतिक पैंतरेबाजी के साथ-साथ डिजिटल तकनीक और डेटा तालमेल पर भी उतना ही निर्भर करता है। राफेल, सुखोई-30एमकेआई, स्वदेशी तेजस और जापान के एफ-2ए जैसे भिन्न प्लेटफॉर्म्स का एक साथ संचालन तकनीकी डेटा इंटरऑपरेबिलिटी और उन्नत मिशन प्लानिंग सॉफ्टवेयर की प्रभावशीलता को परखता है। अभ्यास के दौरान क्विक-टर्नअराउंड ग्राउंड इंजीनियरिंग और अंतरिक्ष सुरक्षा प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करना यह दर्शाता है कि भविष्य के संयुक्त सैन्य अभियानों में रियल-टाइम डेटा शेयरिंग और मेंटेनेंस टेक्नोलॉजी कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

जोधपुर में आयोजित 'वीर गार्जियन 2026' अभ्यास केवल हवाई रणनीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता का एक मजबूत संकेत है। एफ-2ए, राफेल और तेजस जैसे विमानों का साझा संचालन, त्वरित ग्राउंड इंजीनियरिंग और अंतरिक्ष सुरक्षा पर संवाद दोनों देशों के बीच तकनीकी और रक्षा समन्वय को नई गहराई दे रहा है। पश्चिमी सीमा के पास यह उच्च स्तरीय अंतर-संचालीशीलता न केवल सैन्य तैयारी को मजबूत करती है, बल्कि क्षेत्र में व्यापारिक और आर्थिक सुरक्षा का वातावरण भी निर्मित करती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

रविकाश जी का विश्लेषण बिल्कुल सटीक है। भू-राजनीतिक दृष्टि से 'वीर गार्जियन 2026' का आयोजन भारत और जापान की रणनीतिक साझेदारी को एक व्यावहारिक आकार देता है। पश्चिमी सीमा के इतने निकट जापानी लड़ाकू विमानों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि दोनों देश एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने के प्रति बेहद गंभीर हैं। यह अभ्यास न केवल सैन्य अंतर-संचालीशीलता को बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य में रक्षा प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान और कूटनीतिक समन्वय को भी और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

पश्चिमी सीमा के निकट जोधपुर में आयोजित 'वीर गार्जियन 2026' के दौरान जापानी लड़ाकू विमानों की भारतीय सरज़मीं पर पहली तैनाती दोनों देशों के सामरिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। केवल हवाई युद्धाभ्यास तक सीमित न रहकर मिशन प्लानिंग, त्वरित रख-रखाव और ग्राउंड इंजीनियरिंग पर ध्यान केंद्रित करना यह दर्शाता है कि दोनों वायुसेनाएं दीर्घकालिक अंतर-संचालनीयता और तकनीकी समन्वय की दिशा में ठोस कदम बढ़ा रही हैं। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच यह संयुक्त अभ्यास भविष्य के रणनीतिक संतुलन और साझा रक्षा तैयारियों को एक मजबूत आधार प्रदान करेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

रोहन की बात से सहमति जताते हुए, संवेदनशील पश्चिमी सीमा के समीप इस तरह का उच्च-स्तरीय अभ्यास केवल सैन्य कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सीमावर्ती सुरक्षा और रक्षा प्रणाली को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में अंतर-संचालनीयता और त्वरित ग्राउंड इंजीनियरिंग का परीक्षण आपातकालीन स्थिति में त्वरित कार्रवाई क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है। सीमा पार के रणनीतिक खतरों के बीच यह सघन प्रशिक्षण न केवल हमारी सार्वजनिक और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को मजबूत करता है, बल्कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार करता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp