पश्चिमी सीमा के निकट रेगिस्तानी इलाके में भारतीय और जापानी लड़ाकू विमानों की गर्जना ने हवाई सामरिक गतिविधियों को नई ऊंचाई दी है। भारत और जापान की वायुसेनाओं के बीच आयोजित द्विपक्षीय युद्धाभ्यास 'वीर गार्जियन 2026' इस समय अपने निर्णायक और सबसे आक्रामक चरण में चल रहा है। अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जोधपुर एयरबेस से उड़ान भरकर दोनों देशों के युद्धक विमानों ने वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में सटीक निशाने साधने और दुश्मन के बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने का गहन अभ्यास किया।
इस पूरे अभ्यास में भारतीय वायुसेना और जापान की वायु रक्षा शाखा के पायलटों ने आपसी समन्वय के साथ कई मुश्किल हवाई अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। काल्पनिक युद्ध परिदृश्यों के तहत एयर स्ट्राइक और तीव्र डॉगफाइट के दांव-पेच आजमाए गए। दोनों देशों के बीच विकसित हो रहा यह तालमेल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावी माना जा रहा है।
हवाई मोर्चे पर उतरे दोनों देशों के प्रमुख लड़ाकू विमान
चौदह दिनों की समयसीमा वाले इस व्यापक सैन्य अभ्यास में दोनों देशों ने अपने सबसे सक्षम और अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों को तैनात किया है। युद्धाभ्यास के दौरान दिन और रात दोनों समय कई जटिल सॉर्टियां भरी गईं ताकि आधुनिक हवाई युद्ध की हर चुनौती से निपटा जा सके। भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान एलसीए तेजस, अग्रिम पंक्ति के बहुउद्देशीय सुखोई-30 एमकेआई और उच्च तकनीक से लैस राफेल विमानों को अभ्यास का हिस्सा बनाया। वहीं जापानी एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स ने अपने अत्याधुनिक एफ-2ए लड़ाकू जेट्स को मैदान में उतारा, जिन्होंने भारतीय विमानों के साथ बेहतरीन परिचालन संतुलन दिखाया।
जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर रणनीतिक संवाद और जमीनी योजना
आसमान में मिसाइलों और बमबारी के कृत्रिम परिदृश्यों के अभ्यास के साथ ही जमीन पर भी रक्षा रणनीतिकारों ने साझा अभियानों की रूपरेखा तैयार की। जोधपुर स्थित एयरफोर्स स्टेशन पर दोनों वायुसेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों के बीच कई दौर की मिशन प्लानिंग कॉन्फ्रेंस आयोजित की गईं। इस संवाद में सिर्फ उड़ान के पहलुओं पर ही जोर नहीं दिया गया, बल्कि विमानों के त्वरित मेंटेनेंस, ग्राउंड इंजीनियरिंग की दक्षता और अंतरिक्ष सुरक्षा से जुड़े आधुनिक तकनीकी आयामों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच जमीनी और तकनीकी तालमेल को नई दिशा देना था।
वीर गार्जियन का दूसरा संस्करण और भारत में जापानी विमानों का पहला अभ्यास
जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के एफ-2 लड़ाकू विमानों की भारतीय धरती पर भागीदारी इस युद्धाभ्यास का मुख्य आकर्षण बनी हुई है। 'वीर गार्जियन 2026' का औपचारिक आगाज 9 सितंबर को हुआ था और यह 22 सितंबर तक संचालित होगा। दोनों देशों के बीच यह द्विपक्षीय अभ्यास का दूसरा संस्करण है। इसका पहला चरण वर्ष 2023 में 'वीर गार्जियन 23' के रूप में जापानी धरती पर आयोजित किया गया था, जहां भारतीय लड़ाकू विमानों ने पहली बार जापान जाकर संयुक्त युद्धाभ्यास में भाग लिया था। अब इस नए संस्करण के जरिए जापानी वायु रक्षा बल के लड़ाकू विमान पहली बार भारत में संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण का हिस्सा बने हैं।
परिचालन तालमेल और साझा अनुभव से दक्षता बढ़ाने पर जोर
इस युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों के पायलट और तकनीशियन एक-दूसरे की परिचालन प्रक्रियाओं, मानक संचालन विधियों और रणनीतिक तौर-तरीकों को करीब से समझ रहे हैं। किसी भी संभावित बहुपक्षीय या साझा मिशन में सुचारू संचार और समन्वय स्थापित करने के लिए यह अभ्यास एक ठोस मंच तैयार करता है। वास्तविक युद्ध जैसी कठिन परिस्थितियों में अपनी तकनीकी क्षमताओं की जांच करने और एक-दूसरे के बेहतरीन अनुभवों को अपनाने से दोनों देशों की वायुसेनाओं की तत्परता पहले से अधिक मजबूत हुई है।























