देशभर में मौसमी गतिविधियों में एक व्यापक बदलाव दर्ज किया जा रहा है, जहां एक तरफ गुलाबी ठंड की दस्तक शुरू हो चुकी है और सुबह एवं शाम के वक्त हल्की सिहरन महसूस हो रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख समुद्री क्षेत्रों और वायुमंडलीय तंत्रों में सक्रियता बढ़ गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी ताजा मौसमी आकलन के अनुसार, अगले 15 घंटों के भीतर देश के कम से कम नौ राज्यों में वर्षा संबंधी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। यह स्थिति 18 अक्टूबर को मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में उभरने की पूरी संभावना है। विशेष रूप से तमिलनाडु और इसके नजदीकी तटीय क्षेत्रों में अत्यंत भारी बारिश का खतरा मंडरा रहा है, जबकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इसके आसपास के मैदानी इलाकों में आसमान आमतौर पर साफ बना रहेगा।
समुद्री विक्षोभ और वायुमंडलीय चक्रवात का मिलाजुला प्रभाव
इस मौसमी उथल-पुथल की मुख्य वजह उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण है, जिसके साथ ही बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में पैदा हुई हलचल भी मिलकर काम कर रही है। इन प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से 18 अक्टूबर को कई राज्यों में तेज वर्षा होने के आसार बन रहे हैं। वायुमंडलीय अस्थिरता के कारण कई स्थानों पर आकाशीय बिजली चमकने, गरज के साथ बौछारें पड़ने और लगभग 55 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से तूफानी हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। पश्चिमी तट पर महाराष्ट्र के कोंकण एवं गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के इलाकों में भी गरज-चमक के साथ तेज हवाओं का असर देखने को मिलेगा। इसके अतिरिक्त अरब सागर में कर्नाटक और केरल के समुद्र तटों के निकट जल क्षेत्र की स्थिति बेहद अशांत और उबड़-खाबड़ रहने की आशंका है, जिसे देखते हुए मछुआरों को समुद्र में न उतरने की सलाह जारी की गई है।
राजधानी दिल्ली और आसपास के मैदानी इलाकों का हाल
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे जुड़े एनसीआर के क्षेत्रों में रविवार को बारिश की गुंजाइश न के बराबर है। मौसम विभाग के दैनिक विश्लेषण के अनुसार, 18 अक्टूबर को दिनभर धूप खिली रहेगी और आसमान साफ नजर आएगा, जिससे वातावरण शुष्क बना रहेगा। वायुमंडलीय स्थिति की बात करें तो पश्चिमी विक्षोभ से संबद्ध चक्रवाती दबाव का केंद्र उत्तरी हरियाणा और इसके पड़ोसी भूभागों पर सक्रिय है, जबकि हवा के ऊपरी स्तर का एक अलग परिसंचरण उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर मौजूद है।
तापमान के मोर्चे पर फिलहाल किसी तेज गिरावट के संकेत नहीं दिख रहे हैं। पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले 24 घंटों के दौरान अधिकतम तापमान में कोई बड़ा फेरबदल दर्ज नहीं किया जाएगा, लेकिन इसके उपरांत पारे में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की मामूली बढ़त हो सकती है। इस परिस्थिति के कारण दोपहर के समय हल्की धूप और हल्की गर्माहट का अहसास बना रह सकता है, जबकि तड़के और देर शाम के समय ठंडक से भरा सुहावना वातावरण देखने को मिलेगा।
गंगा के मैदानी भाग: उत्तर प्रदेश और बिहार की स्थिति
उत्तर प्रदेश के मौसम में क्षेत्रीय स्तर पर भिन्नता देखी जा रही है। 18 अक्टूबर को राज्य भर में किसी व्यापक वर्षा का अंदेशा नहीं है, लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली सतही हवाओं की चेतावनी दी गई है। दूसरी तरफ, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के लिए बारिश की कोई बड़ी चेतावनी नहीं रखी गई है, यद्यपि आसमान में बादलों की आवाजाही और स्थानीय मौसमी उतार-चढ़ाव के चलते कुछ स्थानों पर क्षणिक रूप से तेज हवाएं और बिजली कड़कने की घटनाएं सामने आ सकती हैं।
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में भी 18 अक्टूबर को भारी वर्षा का कोई विशेष खतरा नहीं है। उत्तर-पश्चिम भारत के पूरे क्षेत्र के लिए इस हफ्ते किसी तीव्र मौसमी हलचल का पूर्वानुमान नहीं दिया गया है, जिससे उत्तराखंड के मैदानी एवं निचले इलाकों में रविवार को सूखापन बना रहेगा। हालांकि पर्वतीय भूभागों में स्थानीय ऊंचाई और हवा के दबाव के अंतर के कारण वातावरण मैदानी क्षेत्रों की तुलना में कुछ भिन्न रह सकता है। पड़ोसी राज्य बिहार के कुछ भागों में छिटपुट हल्की फुहारें पड़ने की उम्मीद जताई गई है, जबकि झारखंड के अधिकांश हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से खुला और साफ बना रहेगा।
दक्षिण भारतीय प्रायद्वीप में मूसलाधार बारिश का व्यापक दौर
मौसमी गतिविधियों का सबसे उग्र और तीव्र रूप प्रायद्वीपीय भारत में दिखाई देगा। मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश, केरल और माहे, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के तटीय बेल्ट में भारी जलभराव और तीव्र बौछारों का संकट बना हुआ है, जबकि तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में भी तेज बारिश दर्ज होने की पूरी संभावना है।
दीर्घकालिक अनुमान के मुताबिक, दक्षिण भारत में 17 से 23 अक्टूबर की पूरी अवधि के दौरान केरल, माहे, तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, लक्षद्वीप और तमिलनाडु के विभिन्न अंचलों में रुक-रुक कर भारी बारिश का सिलसिला बना रहेगा। तटीय आंध्र प्रदेश, यनम तथा रायलसीमा के क्षेत्रों में 17 और 18 अक्टूबर को भी बारिश का जोर जारी रहेगा। इसके साथ ही उत्तर आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना के कई हिस्सों में हफ्ते के विभिन्न दिनों में बादल बरसने का अनुमान है। प्रशासन ने लोगों से आकाशीय बिजली और तेज आंधी के खतरों को देखते हुए खराब मौसम में विशेष सतर्कता बरतने का आग्रह किया है।
तटीय इलाकों में चेतावनी और महाराष्ट्र का मौसम
तमिलनाडु में 18 अक्टूबर की तेज बारिश के बाद आगामी दिनों में भी राहत के आसार कम हैं। मौसम विभाग ने 18 और 19 अक्टूबर के साथ-साथ 21 से 23 अक्टूबर की समयावधि में भी भारी वर्षा का दौर लौटने का पूर्वानुमान लगाया है। इसी प्रकार केरल और केंद्र शासित प्रदेश माहे में 18 से 23 अक्टूबर तक लगातार अलग-अलग स्थानों पर तेज बारिश होने की चेतावनी बनी हुई है।
कर्नाटक के तटीय जिलों में 20 से 22 अक्टूबर के मध्य मूसलाधार बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि उत्तर आंतरिक कर्नाटक में 18 अक्टूबर को मौसमी अस्थिरता बनी रहेगी। आंध्र प्रदेश और रायलसीमा के हिस्सों में बारिश के साथ तेज गति से चलने वाली हवाएं लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं, जहां 18 अक्टूबर को 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने और आकाशीय बिजली कड़कने का अनुमान है। वहीं महाराष्ट्र के तटीय कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा क्षेत्रों में 17 से 19 अक्टूबर के दौरान कई स्थानों पर बिजली कड़कने और झमाझम बौछारें पड़ने की संभावना व्यक्त की गई है।



















