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अंबाला नागरिक अस्पताल में बेहद कम खर्च पर मिल रही 27 प्रकार की पंचकर्म थेरेपीहरियाणा
18 सित॰ 2026, 11:22 am (1 दिन पहले)· 1

अंबाला नागरिक अस्पताल में बेहद कम खर्च पर मिल रही 27 प्रकार की पंचकर्म थेरेपी

अंबाला के नागरिक अस्पताल में आयुष विंग के तहत मात्र 5 रुपये की ओपीडी पर्ची और डॉक्टर की सलाह पर 30 से 200 रुपये के मामूली शुल्क में 27 तरह की पंचकर्म थेरेपी की सुविधा दी जा रही है।

आज के समय में बहुत से लोग शरीर की विभिन्न समस्याओं से राहत पाने के लिए दवाइयों के साथ विभिन्न प्रकार की थेरेपी का सहारा लेते हैं। कमर दर्द, घुटनों का दर्द, साइनस की परेशानी या एंजायटी जैसी दिक्कतों से जूझ रहे लोग अक्सर प्राइवेट थेरेपी सेंटरों का रुख करते हैं। लेकिन निजी सेंटरों में लगातार थेरेपी का खर्च उठाना आम आदमी के बजट से बाहर हो जाता है। ऐसे में अंबाला के निवासियों के लिए एक राहत भरी खबर है क्योंकि स्थानीय नागरिक अस्पताल में आयुष विंग के माध्यम से कई प्रकार की पंचकर्म थेरेपी बेहद कम खर्च पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिन उपचारों के लिए निजी केंद्रों में मरीजों को हजारों रुपये चुकाने पड़ते हैं, वही सुविधाएं अंबाला नागरिक अस्पताल में लगभग 30 रुपये से 200 रुपये तक के मामूली शुल्क में मिल रही हैं।

मात्र 5 रुपये की ओपीडी पर्ची से शुरू होती है प्रक्रिया

इस पूरी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ उठाने के लिए मरीज को सबसे पहले नागरिक अस्पताल में केवल 5 रुपये की आयुर्वेदिक ओपीडी पर्ची बनवानी होती है। इसके बाद अस्पताल के आयुर्वेदिक डॉक्टर मरीज की शारीरिक समस्या को विस्तार से समझते हैं और उसके निदान के लिए उचित उपचार की सलाह देते हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर संबंधित पंचकर्म थेरेपी की सिफारिश करते हैं, जिसके आधार पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

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नागरिक अस्पताल में लगभग 27 तरह की पंचकर्म थेरेपी उपलब्ध

इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए पंचकर्मा थेरेपिस्ट मयक वर्मा ने बताया कि वह पिछले लगभग 5 साल से नागरिक अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में पंचकर्म थेरेपी की एक विशेष और महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस चिकित्सा में मुख्य रूप से पांच प्रकार के कर्म शामिल होते हैं। इसके अलावा भी मरीज की विशिष्ट समस्याओं के समाधान के लिए कई तरह की प्रक्रियाएं और थेरेपी अपनाई जाती हैं। वर्तमान में नागरिक अस्पताल के भीतर मरीजों को लगभग 27 प्रकार की अलग-अलग थेरेपी की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

कमर और घुटनों के दर्द के मरीज पहुंच रहे हैं अस्पताल

मयक वर्मा के अनुसार मौजूदा समय में बड़ी संख्या में लोग कमर दर्द, घुटनों के दर्द, एंजायटी और साइनस पेन जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। मरीज की बीमारी और उसकी गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर सटीक थेरेपी की सलाह देते हैं। इस पूरी चिकित्सा प्रणाली में नस्य, शिरोविरेचन, रक्तमोक्षण, वमन, विरेचन और वस्ति जैसी विभिन्न प्रक्रियाएं शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि हर मरीज की शारीरिक स्थिति एक जैसी नहीं होती, इसलिए सभी के लिए एक ही प्रकार की थेरेपी तय नहीं की जाती है। यही कारण है कि आयुर्वेदिक डॉक्टर के परामर्श के बाद ही थेरेपी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है। उन्होंने यह भी साझा किया कि पंचकर्म की कुछ विशेष प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए विशिष्ट विधियों का उपयोग करना पड़ता है।

कुछ विशेष परिस्थितियों में जोंक से किया जाता है रक्तमोक्षण

थेरेपिस्ट ने उदाहरण देते हुए समझाया कि रक्तमोक्षण की प्रक्रिया के दौरान कुछ चुनिंदा परिस्थितियों में जोंक का उपयोग किया जाता है। आयुर्वेदिक पद्धति के अनुसार इस विशेष प्रक्रिया के दौरान शरीर के संबंधित हिस्से से दूषित रक्त को बाहर निकालने का कार्य किया जाता है। हालांकि, यह पूरी प्रक्रिया भी केवल मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और योग्य चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही अमल में लाई जाती है, ताकि उपचार पूरी तरह सुरक्षित रहे।

30 से 200 रुपये तक के मामूली शुल्क में मिल रही हैं सेवाएं

मयक वर्मा ने जानकारी दी कि नागरिक अस्पताल में विभिन्न पंचकर्म थेरेपी के एवज में रोजाना लगभग 30 रुपये से लेकर 200 रुपये तक का न्यूनतम शुल्क लिया जाता है। इसके विपरीत निजी अस्पतालों और व्यावसायिक थेरेपी सेंटरों में मरीजों को इसी तरह की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अपनी जेब से हजारों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। ऐसे में सरकारी अस्पताल में इतनी कम कीमत पर मिलने वाली यह थेरेपी उन लोगों के लिए बहुत मायने रखती है, जो लंबे समय तक महंगे उपचार का खर्च उठाने में असमर्थ महसूस करते हैं।

विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह के बाद ही तय होती है सही थेरेपी

मयक वर्मा ने स्पष्ट किया कि हर इंसान के शरीर की बनावट और उसकी स्वास्थ्य समस्या भिन्न होती है, इसलिए थेरेपी का चयन भी उसी के अनुरूप होना चाहिए। उनके अनुसार पिछले कुछ समय में लोगों के बीच आयुर्वेद और पंचकर्म को लेकर जागरूकता काफी बढ़ी है। यही वजह है कि अस्पताल में भी इन पारंपरिक सुविधाओं का लाभ उठाने वाले मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। पारंपरिक उपचार पद्धतियों के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से एक सकारात्मक बदलाव है। यदि अंबाला में कोई भी व्यक्ति पंचकर्म थेरेपी कराने का विचार कर रहा है, तो वह सीधे नागरिक अस्पताल के आयुष विंग में जाकर डॉक्टर से परामर्श ले सकता है।

5 रुपये की पर्ची और डॉक्टर की सलाह है अनिवार्य

उन्होंने अंत में दोहराया कि पूरी प्रक्रिया की शुरुआत महज 5 रुपये की ओपीडी पर्ची से होती है और डॉक्टर की सलाह मिलने के बाद आवश्यकतानुसार 30 से 200 रुपये तक के खर्च में संबंधित थेरेपी उपलब्ध करवा दी जाती है। हालांकि, किसी भी थेरेपी को अपनी मर्जी से लेने के बजाय यह बेहद जरूरी है कि पहले योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य ली जाए, ताकि शरीर को सही और सुरक्षित उपचार मिल सके।

सवाल-जवाब

अंबाला नागरिक अस्पताल में पंचकर्म थेरेपी का न्यूनतम शुल्क कितना है?
नागरिक अस्पताल में अलग-अलग पंचकर्म थेरेपी के लिए रोजाना 30 रुपये से लेकर 200 रुपये तक का शुल्क लिया जाता है।
इस थेरेपी की शुरुआत करने के लिए क्या करना होता है?
इसके लिए मरीज को सबसे पहले अस्पताल में केवल 5 रुपये की आयुर्वेदिक ओपीडी पर्ची बनवानी पड़ती है।
अस्पताल में कुल कितनी तरह की पंचकर्म थेरेपी उपलब्ध हैं?
नागरिक अस्पताल के आयुष विंग में मरीजों को लगभग 27 प्रकार की पंचकर्म थेरेपी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
अस्पताल में कौन-कौन सी मुख्य बीमारियाँ लेकर मरीज पहुँच रहे हैं?
अस्पताल में मुख्य रूप से कमर दर्द, घुटनों के दर्द, एंजायटी और साइनस पेन से पीड़ित मरीज आ रहे हैं।
रक्तमोक्षण प्रक्रिया में किस विशेष विधि का उपयोग किया जाता है?
रक्तमोक्षण प्रक्रिया के दौरान कुछ विशेष परिस्थितियों में जोंक का उपयोग किया जाता है।
क्या हर मरीज को एक जैसी थेरेपी दी जाती है?
नहीं, हर मरीज की शारीरिक संरचना और समस्या अलग होती है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के बाद ही थेरेपी तय की जाती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·22 घंटे पहले

यह रिपोर्ट ज़िला स्तर पर आयुष नीतियों के व्यावहारिक क्रियान्वयन और लोक स्वास्थ्य नीति में पारंपरिक चिकित्सा के एकीकरण को दर्शाती है। सरकारी अस्पतालों में पंचकर्म जैसी रियायती सुविधाएं उपलब्ध कराना सीधे तौर पर आम नागरिकों के जेब से होने वाले चिकित्सा खर्च को कम करता है। सार्वजनिक नीति के दृष्टिकोण से, यदि राज्य सरकारें इस तरह की सुविधाओं को पर्याप्त संसाधन और कुशल कार्यबल प्रदान करना जारी रखती हैं, तो यह मॉडल सुशासन और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·22 घंटे पहले

अर्जुन की टिप्पणी सही दिशा में है। आर्थिक दृष्टिकोण से, भारत में चिकित्सा पर होने वाला जेब से खर्च मध्यम और निम्न आय वर्गों को वित्तीय संकट में डालने का बड़ा कारण है। प्राथमिक व जिला स्तर पर किफायती आयुष एवं पंचकर्म सुविधाओं का विस्तार स्वास्थ्य लागत की मुद्रास्फीति को नियंत्रित करता है। इससे न केवल आम परिवारों की बचत की रक्षा होती है, बल्कि क्रोनिक बीमारियों का शुरुआती प्रबंधन होने से बड़े अस्पतालों पर वित्तीय व इंफ्रास्ट्रक्चर का दबाव भी कम होता है। दीर्घकालिक रूप से, ऐसा किफायती मॉडल राज्य के स्वास्थ्य बजट के इष्टतम उपयोग और कार्यबल की उत्पादकता बढ़ाने में आर्थिक रूप से अत्यंत कारगर सिद्ध हो सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

अंबाला नागरिक अस्पताल की आयुष विंग द्वारा कम खर्च पर 27 प्रकार की पंचकर्म थेरेपी उपलब्ध कराना जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक सकारात्मक और अनुकरणीय कदम है। निजी चिकित्सा केंद्रों में महंगे इलाज के बोझ तले दबने वाले आम नागरिकों के लिए यह व्यवस्था संजीवनी साबित हो रही है। उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के जिला अस्पतालों में भी यदि इस मॉडल को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो पारंपरिक आयुर्वेद चिकित्सा आम आदमी की सीधी पहुँच में आ सकेगी और सरकारी अस्पतालों पर निर्भरता और अधिक सार्थक होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

अंबाला नागरिक अस्पताल की यह पहल पब्लिक हेल्थकेयर सिस्टम को जन-उन्मुख बनाने का एक बेहतरीन उदाहरण है। जब सरकारी स्तर पर इस तरह की लागत-प्रभावी और विशेषज्ञ उपचार पद्धतियाँ मिलेंगी, तो गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को महंगे निजी विकल्पों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह प्रशासनिक और स्वास्थ्य प्रबंधन की दृष्टि से एक सराहनीय कदम है, जिससे जनता के स्वास्थ्य अधिकारों को वास्तविक धरातल पर मजबूती मिलती है।

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