जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए आज के समय में किसान रासायनिक कीटनाशकों के सुरक्षित विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। इसी कड़ी में प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से तैयार होने वाला 'ब्रह्मास्त्र' एक बेहद किफायती और असरदार उपाय के रूप में उभर रहा है। यह पूरी तरह से घरेलू और जैविक कीटनाशक है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से फसलों को कीटों के हमलों और विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए किया जाता है। इसका छिड़काव बीमारी आने से पहले ही बचाव के तौर पर किया जाता है, जिससे फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और रासायनिक खर्चों में भारी कटौती होती है।
छत्तीसगढ़ के किसान ने साझा किए अपने अनुभव
इस तकनीक को अपनी खेती में उतारने वाले छत्तीसगढ़ के मिलाराबद गांव के एक युवा कृषक लक्ष्मीकांत प्रधान ने इसके शानदार परिणामों को साझा किया है। वे अपनी जैविक फसलों पर सीजन के दौरान कम से कम दो से तीन बार इस घरेलू घोल का छिड़काव करते हैं। लक्ष्मीकांत प्रधान के अनुभव के अनुसार, नियमित तौर पर एहतियात के रूप में इसका इस्तेमाल करने से फसलों को तना छेदक, शीथ ब्लाइट, नेक ब्लास्ट, माइट्स और माहू जैसे घातक कीटों व रोगों से बचाया जा सकता है। इस जैविक कीटनाशक की मारक क्षमता को और अधिक बढ़ाने के लिए इसमें वॉटर-सॉल्युबल नीम ऑयल यानी पानी में घुलनशील नीम का तेल भी मिलाया जाता है, जिससे खेतों में बेहतरीन परिणाम मिलते हैं।
ब्रह्मास्त्र तैयार करने के लिए सामग्री का चयन
इस शक्तिशाली घोल को तैयार करने के लिए मुख्य रूप से ऐसी 5 से 10 तरह की पत्तियों का चयन किया जाता है, जिन्हें गाय या बकरी जैसे पालतू पशु खाना पसंद नहीं करते। इन पत्तियों में नीम, अरंडी, आक, सीताफल, करंज और बेल के पत्ते प्रमुख रूप से शामिल किए जा सकते हैं। इस मिश्रण को तैयार करते समय नीम की पत्तियों का हिस्सा सबसे अधिक रखा जाता है क्योंकि उनमें कीड़ों को दूर भगाने के प्राकृतिक गुण होते हैं। पशुओं द्वारा न खाई जाने वाली इन पत्तियों का कड़वापन कीटों के खिलाफ बेहतरीन सुरक्षा कवच का काम करता है।
बनाने की आसान विधि
ब्रह्मास्त्र बनाने की विधि बेहद सरल है और इसे घर पर ही तैयार किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले सभी चुनिंदा ताजी पत्तियों को अच्छी तरह से कूट लिया जाता है या फिर उनके छोटे-छोटे टुकड़े कर लिए जाते हैं। इसके बाद, इन कटी हुई पत्तियों को एक मिट्टी के बर्तन में डालकर लगभग 10 लीटर गौमूत्र के साथ मिलाकर आंच पर गर्म किया जाता है। इस पूरे मिश्रण को तब तक उबाला जाता है जब तक कि इसमें कम से कम चार उबाल न आ जाएं। चार बार अच्छी तरह उबलने के बाद इस घोल को पूरी तरह से ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है। ठंडा हो जाने पर इसे बारीक कपड़े से अच्छी तरह छान लिया जाता है, जिसके बाद यह इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाता है।
उपयोग की सही मात्रा और लागत
मात्रा और उपयोग के नियमों की बात करें तो किसान लक्ष्मीकांत प्रधान के अनुसार, एक सामान्य स्प्रे टैंक में सिर्फ 100 मिलीलीटर ब्रह्मास्त्र ही काफी होता है। वहीं, पूरे एक एकड़ खेत की फसल पर छिड़काव करने के लिए करीब 1 से 1.5 लीटर तैयार ब्रह्मास्त्र की आवश्यकता होती है। चूंकि इसे बनाने में लगने वाली सभी सामग्रियां आसपास के वातावरण और खेतों से ही मिल जाती हैं, इसलिए इसे बनाने की लागत न के बराबर आती है, जो छोटे और सीमांत किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है।





















