संगीत जगत के महान गायक मोहम्मद रफी की यादें आज भी उनके प्रशंसकों के दिलों में तरोताजा हैं। हाल ही में मुंबई के बांद्रा इलाके में स्थित उनके ऐतिहासिक घर 'रफी मेंशन' में एक खास सांस्कृतिक संगम देखने को मिला। भारतीय संगीत और खेल जगत की तीन प्रमुख हस्तियों, पार्श्व गायक सोनू निगम, क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर और संगीतकार सलीम मर्चेंट ने एक साथ इस यादगार स्थान का दौरा किया। इस विजिट के दौरान तीनों हस्तियों ने रफी साहब के जीवन और उनकी संगीतमय यात्रा से जुड़े दुर्लभ क्षणों को करीब से महसूस किया।
मोहम्मद रफी के हारमोनियम पर सोनू निगम की सुरीली प्रस्तुति
गायक सोनू निगम हमेशा से ही मोहम्मद रफी की गायकी के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा और लगाव व्यक्त करते रहे हैं। 'रफी मेंशन' के दौरे के दौरान एक अत्यंत भावुक और सुरीला पल तब आया जब सोनू निगम ने रफी साहब के मूल हारमोनियम को बजाते हुए उनका अमर गाना 'दीवाना हुआ बादल' गुनगुनाया। यह मशहूर गीत साल 1964 में प्रदर्शित हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'कश्मीर की कली' का है। ओ.पी. नैयर के संगीत निर्देशन में बने इस कालजयी गीत को मूल रूप से मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने अपनी सुरीली आवाजों से सजाया था। जब सोनू निगम हारमोनियम पर इस धुन को छेड़ रहे थे, तो पास खड़े सचिन तेंदुलकर बेहद तन्मयता और ध्यान के साथ इस सुरीली प्रस्तुति को सुनते दिखे। इस पूरी संगीतमय शाम में सलीम मर्चेंट भी उनके साथ मौजूद रहे।
सोशल मीडिया पर साझा कीं खास यादें
इस अद्भुत और यादगार लम्हे को सोनू निगम ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो के माध्यम से प्रशंसकों के साथ साझा किया। इस वीडियो को पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि रफी मेंशन में यह विजिट उनके लिए संगीत से भरी एक बेहद खास और यादगार यात्रा रही। वीडियो में तीनों हस्तियों के चेहरे पर संगीत के प्रति गहरा सम्मान और रफी साहब की विरासत को नमन करने का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। इस सोशल मीडिया पोस्ट को प्रशंसकों द्वारा बेहद पसंद किया जा रहा है और लोग इसे भारतीय संगीत इतिहास का एक खूबसूरत क्षण बता रहे हैं।
शाहिद रफी से मुलाकात और विरासत को संजोने का प्रयास
अपनी इस यात्रा के दौरान सोनू निगम, सचिन तेंदुलकर और सलीम मर्चेंट ने मोहम्मद रफी के सुपुत्र शाहिद रफी से भी विस्तृत मुलाकात की। शाहिद रफी अपने पिता की विशाल संगीत विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने और उसे आगे बढ़ाने के कार्य में निरंतर समर्पित हैं। वह मोहम्मद रफी के सात बच्चों में सबसे छोटे हैं और स्वयं भी एक गायक हैं। शाहिद रफी अक्सर सार्वजनिक मंचों पर अपने पिता के व्यक्तिगत जीवन, उनकी अनुशासित जीवनशैली और संगीत साधना से जुड़े अनसुने किस्सों को साझा करते रहते हैं।
'रफी मेंशन' म्यूजियम में संजोई गई दुर्लभ वस्तुएं
मुंबई के बांद्रा स्थित 'रफी मेंशन' के एक विशेष हिस्से को एक व्यक्तिगत म्यूजियम के रूप में बेहद खूबसूरती से सजाया और सुरक्षित रखा गया है। इस म्यूजियम में मोहम्मद रफी द्वारा उपयोग किए जाने वाले प्रमुख वाद्य यंत्र, जैसे कि उनका पसंदीदा हारमोनियम और तानपुरा, विशेष रूप से प्रदर्शित हैं। इसके अलावा, यहाँ उनके करियर के दौरान मिले प्रतिष्ठित पुरस्कार, ऐतिहासिक तस्वीरें और उनके कई व्यक्तिगत सामान रखे गए हैं। प्रशंसक यहाँ उनके दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली क्रॉकरी, उनका पुराना लैंडलाइन टेलीफोन और यहाँ तक कि वह ग्लास भी देख सकते हैं जिसमें रफी साहब अपनी पसंदीदा कोल्ड ड्रिंक पिया करते थे। 31 जुलाई 1980 को दुनिया को अलविदा कहने वाले मोहम्मद रफी की रोजमर्रा की जिंदगी की ये छोटी-छोटी झलकियाँ आज भी उनके चाहने वालों को उनसे भावनात्मक रूप से जोड़ती हैं।


















