अदालती मुकदमों के लंबे चक्र से आम नागरिकों को बचाने और आपसी बातचीत से मसले हल कराने के उद्देश्य से एक नई पहल शुरू की गई है। मेघालय राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने शुक्रवार को जेन्गजल में आयोजित एक बड़े शिविर और सेमिनार के दौरान नालसा के प्रसिद्ध थीम गीत एक मुट्ठी आसमान का गारो संस्करण प्रस्तुत किया। इसी मंच से एक एनिमेटेड लघु फिल्म भी जारी की गई, जिसका मुख्य मकसद स्थानीय आबादी को सामुदायिक मध्यस्थता अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
आपसी सहमति से विवादों का समाधान
इस एनिमेटेड फिल्म के जरिए यह संदेश दिया गया है कि जमीन से जुड़े मामलों, पड़ोसियों के बीच की तकरार और अन्य घरेलू झगड़ों को अदालत ले जाने के बजाय बातचीत से भी सुलझाया जा सकता है। कानूनी प्रक्रियाओं में लगने वाले भारी खर्च और वर्षों के समय को बचाने के लिए यह माध्यम बेहद उपयोगी माना जा रहा है। जब लोग अपने स्तर पर बैठकर शांतिपूर्ण चर्चा करते हैं, तो सामाजिक ताना-बाना मजबूत रहता है और मानसिक तनाव भी नहीं झेलना पड़ता।
न्याय विभाग की परियोजना के तहत तैयारी
यह रचनात्मक फिल्म भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग के अंतर्गत तैयार की गई है। इसका निर्माण सामुदायिक मध्यस्थता के जरिए न्याय तक पहुंच बढ़ाने के विशेष प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इस पूरी मुहिम का जोर इस बात पर है कि नागरिकों में कानूनी समझ बढ़े और वे अदालत की चौखट पर जाने से पहले अपने क्षेत्र में ही सुलह-समझौते के रास्तों को प्राथमिकता दें।
न्यायाधीशों और स्थानीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी
जेन्गजल में हुए इस विशेष आयोजन को मेघालय उच्च न्यायालय की मध्यस्थता समिति के साझा सहयोग से आयोजित किया गया था। इस मौके पर मेघालय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति एच.एस. थांगखिव और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डिएंगदोह ने दोनों पहलों का औपचारिक अनावरण किया। कार्यक्रम में इलाके के ग्रामीण, पारंपरिक नेता, विभिन्न सरकारी महकमों के पदाधिकारी और वकील शामिल हुए।






















