राजस्थान के पाली जिले में देसूरी उपखंड के ग्रामीण मार्ग पर उस समय गंभीर संकट की स्थिति बन गई, जब विद्यार्थियों को लेकर जा रही एक निजी स्कूल बस के भीतर अचानक एक विषैला सांप रेंगता हुआ दिखाई दिया। चलती गाड़ी के अंदर अचानक जीव के प्रकट होने से केबिन में सवार छोटे बच्चों के बीच भारी घबराहट फैल गई और शोर-शराबा शुरू हो गया। विपरीत परिस्थितियों के बीच चालक ने अत्यंत संयम और सतर्कता का परिचय दिया, जिसके चलते एक बड़ा सड़क हादसा अथवा किसी अनहोनी की आशंका समय रहते टल गई।
लापी गांव के रास्ते पर सामने आया अचानक संकट
यह घटना देसूरी उपखंड के अंतर्गत लापी गांव की दिशा में जाने वाली सड़क पर घटित हुई। सामान्य दिनों की भांति एक गैर-सरकारी शिक्षण संस्थान की बस ग्रामीण क्षेत्रों से छात्र-छात्राओं को लेते हुए आगे बढ़ रही थी। वाहन में कई विद्यार्थी सवार हो चुके थे और यात्रा सामान्य गति से चल रही थी। उसी समय चालक का ध्यान अचानक स्टीयरिंग व्हील और डैशबोर्ड के समीप मौजूद हिस्से पर गया, जहां एक विषैला सांप रेंगता हुआ आगे बढ़ रहा था। चलती गाड़ी के संचालन नियंत्रण तंत्र के बेहद करीब सांप को देखकर चालक स्तब्ध रह गया, किंतु उसने तत्परता दिखाते हुए वाहन पर अपना नियंत्रण बनाए रखा।
शांति से नियंत्रित की गति, पहले खाली कराई बस
सड़क पर चलते वाहनों के भीतर जब ऐसी अप्रत्याशित घटनाएं घटती हैं, तो अक्सर अचानक घबराहट या हड़बड़ाहट के कारण स्टियरिंग से नियंत्रण छूट जाता है, जिससे बड़े सड़क हादसों का जोखिम उत्पन्न हो जाता है। इस चालक ने ऐसी किसी भी हड़बड़ी से बचते हुए सूझबूझ का रास्ता चुना। उसने तुरंत बस की गति को धीमा किया और सुरक्षित स्थान देखते हुए वाहन को सड़क के एक किनारे ले जाकर पूरी तरह रोक दिया। गाड़ी रुकते ही चालक ने रोते और सहमे बच्चों का हौसला बढ़ाया और एक-एक करके सभी मासूमों को बस से बाहर निकाल कर सड़क से सुरक्षित दूरी पर खड़ा किया।
सांप को झाड़ियों में खदेड़ा, पूर्ण जांच के बाद यात्रा पूरी
जब सभी स्कूली बच्चे खतरे के दायरे से पूरी तरह बाहर आ गए, तब चालक ने स्थानीय स्तर पर डंडे और अन्य उपलब्ध साधनों का इस्तेमाल करते हुए सांप को वाहन से निकालने का प्रयास आरंभ किया। निरंतर प्रयासों के उपरांत सांप केबिन से बाहर निकलकर पास की झाड़ियों की ओर ओझल हो गया। इसके बाद चालक ने वाहन के कोने-कोने की गहनता से पड़ताल की, ताकि यह निश्चित किया जा सके कि गाड़ी के भीतर कोई अन्य जीव या खतरा शेष नहीं है। पूरी संतुष्टि के पश्चात सभी बच्चों को पुनः सीटों पर बैठाया गया और बस विद्यालय की ओर रवाना की गई। स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने इस सूझबूझ भरे कार्य की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि यदि चालक जरा भी अपना धैर्य खो देता, तो दर्जनों बच्चों की सुरक्षा पर भारी संकट आ सकता था।

















